By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 11:59 AM
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा समझौता हुआ है। इस समझौते के बाद ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है, जिससे देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। मेलबर्न में संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के रिश्तों में अहम पड़ाव बताया और कहा कि आपसी विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हुआ यह समझौता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके जरिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति संभव होगी, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में देश को बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत लगातार गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है और यह समझौता उसी लक्ष्य को मजबूत करेगा।
ऑस्ट्रेलिया ने भी समझौते की पुष्टि की
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए बताया कि वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को यूरेनियम निर्यात करने संबंधी प्रशासनिक व्यवस्था पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी और ऑस्ट्रेलिया के संसाधन क्षेत्र को भी नया बाजार मिलेगा।
PM मोदी बोले- दोनों देशों के रिश्ते भरोसे पर टिके हैं
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया सरकार और वहां की जनता का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अल्बनीज की व्यक्तिगत पहल और प्रतिबद्धता ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया सिर्फ रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि ऐसे भरोसेमंद मित्र हैं जो हर क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
क्रिकेट के जरिए समझाया भारत-ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के संबंधों को क्रिकेट से जोड़ते हुए दिलचस्प अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता क्रिकेट के हर प्रारूप की तरह मजबूत और संतुलित है। चाहे तेज रफ्तार मुकाबले हों या लंबी साझेदारी, दोनों देशों के संबंध हर परिस्थिति में मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनका यह उदाहरण प्रेस वार्ता का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगी नई ताकत
भारत आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में लगातार निवेश कर रहा है। ऐसे में यूरेनियम की नियमित उपलब्धता देश के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भविष्य में परमाणु बिजली परियोजनाओं को गति मिलेगी और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
दो लोकतंत्रों की साझेदारी और मजबूत होगी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों जीवंत लोकतंत्र हैं। दोनों देशों में विविध संस्कृति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और समुद्री सुरक्षा को लेकर समान सोच है। यही समानताएं दोनों देशों के बीच भरोसे को लगातार मजबूत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में व्यापार, रक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग और तेज होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता
भारत दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे समय में यूरेनियम की आपूर्ति सुनिश्चित होना भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहयोग मिलेगा। यही वजह है कि इस समझौते को भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
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