Saturday, June 13, 2026

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टीएमसी में बड़ा विस्फोट! कल्याण बनर्जी ने अभिषेक पर खोला मोर्चा, ममता के सामने रख दी ‘या मैं, या वो’ की शर्त

By Malay Ojha | Published: 11 June 2026 at 03:04 PM

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके व्यवहार को पार्टी की मुश्किलों की बड़ी वजह बताया है। इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने साफ शब्दों में यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि पार्टी में उनके लिए जगह है या फिर अभिषेक बनर्जी के लिए। उनके इस बयान ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष को नई चर्चा दे दी है।

एक वीडियो संदेश में कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें पार्टी के कई महत्वपूर्ण मामलों में भरोसे में नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो गई है, जिससे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका लगातार कमजोर हुई है। उनका कहना था कि लंबे समय तक पार्टी के लिए संघर्ष करने के बावजूद उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसकी अपेक्षा थी।

अभिषेक बनर्जी के रवैये पर उठाए सवाल
कल्याण बनर्जी ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के व्यवहार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक आत्मविश्वास और एकतरफा निर्णयों ने संगठन को नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक पार्टी के कई अनुभवी नेताओं की राय को नजरअंदाज किया गया, जिसका असर संगठन की एकजुटता पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि काम करना मुश्किल होता जा रहा है।

ममता बनर्जी के सामने रखी बड़ी शर्त
सबसे अहम बात यह रही कि कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी के बावजूद ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा जताई। उन्होंने कहा कि वह आज भी ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन अब फैसला उन्हें करना होगा। उनके अनुसार यदि पार्टी पूरी तरह अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ने वाली है तो फिर उनके लिए वहां काम करना कठिन होगा। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सबसे बड़े असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विधायकों और सांसदों की नाराजगी ने बढ़ाई चिंता
कल्याण बनर्जी का बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि कई विधायक और सांसद नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कुछ नेताओं ने संगठन में संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने की शिकायत भी की है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

राज्यसभा से इस्तीफों ने बढ़ाया दबाव
हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी छोड़ने वाले कई नेताओं ने सीधे या परोक्ष रूप से संगठन के भीतर नेतृत्व शैली को लेकर असहमति जताई है। यही वजह है कि कल्याण बनर्जी का ताजा बयान और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ी बेचैनी
पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। चुनावी नतीजों के बाद संगठन के भीतर आत्ममंथन की मांग उठी थी, लेकिन अब कई नेता खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठाने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद पैदा हुई बेचैनी अब सार्वजनिक बयानबाजी के रूप में सामने आ रही है।

शुभेंदु अधिकारी की सक्रियता पर भी नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्षी खेमे की गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस से असंतुष्ट कई नेता विपक्षी नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और राजनीतिक बयानबाजी ने अटकलों को जरूर हवा दी है।

ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट बनाए रखने की है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी यदि इसी तरह सामने आती रही तो आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। कल्याण बनर्जी का बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर असंतोष अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक मंच तक पहुंच चुका है।

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टीएमसी में बड़ा विस्फोट! कल्याण बनर्जी ने अभिषेक पर खोला मोर्चा, ममता के सामने रख दी ‘या मैं, या वो’ की शर्त

By Malay Ojha | Published: 11 June 2026 at 03:04 PM

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके व्यवहार को पार्टी की मुश्किलों की बड़ी वजह बताया है। इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने साफ शब्दों में यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि पार्टी में उनके लिए जगह है या फिर अभिषेक बनर्जी के लिए। उनके इस बयान ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष को नई चर्चा दे दी है।

एक वीडियो संदेश में कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें पार्टी के कई महत्वपूर्ण मामलों में भरोसे में नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो गई है, जिससे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका लगातार कमजोर हुई है। उनका कहना था कि लंबे समय तक पार्टी के लिए संघर्ष करने के बावजूद उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसकी अपेक्षा थी।

अभिषेक बनर्जी के रवैये पर उठाए सवाल
कल्याण बनर्जी ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के व्यवहार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक आत्मविश्वास और एकतरफा निर्णयों ने संगठन को नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक पार्टी के कई अनुभवी नेताओं की राय को नजरअंदाज किया गया, जिसका असर संगठन की एकजुटता पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि काम करना मुश्किल होता जा रहा है।

ममता बनर्जी के सामने रखी बड़ी शर्त
सबसे अहम बात यह रही कि कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी के बावजूद ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा जताई। उन्होंने कहा कि वह आज भी ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन अब फैसला उन्हें करना होगा। उनके अनुसार यदि पार्टी पूरी तरह अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ने वाली है तो फिर उनके लिए वहां काम करना कठिन होगा। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सबसे बड़े असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विधायकों और सांसदों की नाराजगी ने बढ़ाई चिंता
कल्याण बनर्जी का बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि कई विधायक और सांसद नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कुछ नेताओं ने संगठन में संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने की शिकायत भी की है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

राज्यसभा से इस्तीफों ने बढ़ाया दबाव
हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी छोड़ने वाले कई नेताओं ने सीधे या परोक्ष रूप से संगठन के भीतर नेतृत्व शैली को लेकर असहमति जताई है। यही वजह है कि कल्याण बनर्जी का ताजा बयान और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ी बेचैनी
पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। चुनावी नतीजों के बाद संगठन के भीतर आत्ममंथन की मांग उठी थी, लेकिन अब कई नेता खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठाने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद पैदा हुई बेचैनी अब सार्वजनिक बयानबाजी के रूप में सामने आ रही है।

शुभेंदु अधिकारी की सक्रियता पर भी नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्षी खेमे की गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस से असंतुष्ट कई नेता विपक्षी नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और राजनीतिक बयानबाजी ने अटकलों को जरूर हवा दी है।

ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट बनाए रखने की है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी यदि इसी तरह सामने आती रही तो आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। कल्याण बनर्जी का बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर असंतोष अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक मंच तक पहुंच चुका है।

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