By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 at 11:59 AM
देशभर में लाखों युवाओं का सपना आईएएस अधिकारी बनने का होता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि इस पद तक पहुंचने का सिर्फ एक ही रास्ता है—यूपीएससी की कठिन परीक्षा। लेकिन हकीकत यह है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचने का एक दूसरा रास्ता भी मौजूद है। हालांकि यह रास्ता आसान नहीं है, फिर भी कुछ सरकारी अधिकारी बिना यूपीएससी परीक्षा दिए आईएएस कैडर का हिस्सा बन जाते हैं।
आईएएस अधिकारी बनने का सबसे लोकप्रिय और सीधा तरीका संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अंतिम सूची तक पहुंच पाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार जैसे कई कठिन चरणों को पार करने के बाद सफल अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर उन्हें प्रशासनिक सेवा में नियुक्त किया जाता है।
राज्य सेवा के अधिकारियों को मिलता है मौका
बहुत कम लोग जानते हैं कि राज्य सरकारों की प्रशासनिक सेवाओं में काम कर रहे अधिकारी भी आगे चलकर आईएएस बन सकते हैं। राज्य लोक सेवा आयोग के जरिए चुने गए अधिकारी वर्षों तक प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते हैं। इनमें उप-जिलाधिकारी, तहसील स्तर और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काम करने वाले अधिकारी शामिल होते हैं।
यदि किसी अधिकारी का सेवा रिकॉर्ड उत्कृष्ट हो और उसने लंबे समय तक ईमानदारी और दक्षता के साथ काम किया हो, तो उसे आईएएस कैडर में पदोन्नति का अवसर मिल सकता है।
पदोन्नति के लिए क्या होती है प्रक्रिया?
आईएएस कैडर में पदोन्नति किसी सामान्य प्रमोशन की तरह नहीं होती। इसके लिए एक विशेष चयन समिति बनाई जाती है। यह समिति अधिकारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड का अध्ययन करती है। उसके कार्यों, प्रशासनिक फैसलों, उपलब्धियों और ईमानदारी का मूल्यांकन किया जाता है।
सिर्फ वही अधिकारी आगे बढ़ पाते हैं जिनकी छवि बेदाग हो और जिन्होंने लंबे समय तक उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो। कई बार वर्षों की मेहनत के बाद भी चयन नहीं हो पाता, इसलिए इसे बेहद प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया माना जाता है।
कितने साल की नौकरी के बाद बन सकते हैं आईएएस?
आमतौर पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस कैडर में पदोन्नति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। सेवा अवधि, उपलब्ध पदों और वरिष्ठता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। यही वजह है कि यह अवसर सीमित अधिकारियों को ही मिल पाता है।
कुछ अन्य सरकारी अधिकारियों को भी मिल सकता है मौका
सिर्फ राज्य प्रशासनिक सेवा ही नहीं, बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों में अन्य गजेटेड सरकारी अधिकारियों को भी आईएएस कैडर में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित राज्य सरकार की सिफारिश और चयन प्रक्रिया की मंजूरी जरूरी होती है।
हालांकि ऐसे मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं। आमतौर पर यह अवसर उन्हीं अधिकारियों को मिलता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण काम किया हो और जिनकी प्रशासनिक क्षमता साबित हो चुकी हो।
विशेषज्ञों के लिए भी खुलता है रास्ता
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने कई बार ऐसे विशेषज्ञों को प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी हैं जो पारंपरिक सिविल सेवा परीक्षा के जरिए नहीं आए थे। अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, तकनीक और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया गया है।
हालांकि यह नियुक्तियां सीधे आईएएस कैडर में नहीं होतीं, लेकिन इन पदों की जिम्मेदारियां कई मामलों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों जैसी होती हैं।
कितना मुश्किल है यह रास्ता?
बिना यूपीएससी आईएएस बनना संभव जरूर है, लेकिन यह बहुत सीमित लोगों के लिए ही खुला रास्ता है। जहां यूपीएससी के जरिए सीधे सेवा में प्रवेश मिलता है, वहीं पदोन्नति के जरिए आईएएस बनने के लिए वर्षों तक उत्कृष्ट काम करना पड़ता है।
यही कारण है कि आज भी आईएएस बनने का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय रास्ता यूपीएससी परीक्षा ही माना जाता है। लेकिन जो अधिकारी राज्य सेवाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं, उनके लिए भी प्रशासनिक सेवा के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचने का अवसर मौजूद रहता है।

