By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 at 03:49 PM
मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को वायरल वीडियो मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। गोपालगंज की एमपी-एमएलए अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों को वेलफेयर फंड में 10 हजार रुपये जमा करने होंगे। मामले में सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस अब तक न तो कथित हथियार बरामद कर सकी और न ही फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में पेश कर पाई।
सोमवार को जमानत याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पुलिस की ओर से फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके अलावा वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले हथियारों की भी बरामदगी नहीं हो सकी। अदालत ने इन तथ्यों पर विचार करने के बाद अनंत सिंह समेत सभी नामजद आरोपियों को राहत प्रदान की।
क्या है पूरा मामला?
मामला गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव से जुड़ा है। दो और तीन मई को गांव निवासी गुड्डू राय के घर उपनयन संस्कार का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। अनंत सिंह भी अपने समर्थकों के साथ समारोह में पहुंचे थे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे दो वीडियो
कार्यक्रम के कुछ दिन बाद चार मई को सोशल मीडिया पर दो वीडियो तेजी से वायरल हुए। पहले वीडियो में एक डांसर मंच पर प्रस्तुति देती दिखाई दे रही थी, जबकि दावा किया गया कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग उसका प्रदर्शन देख रहे थे। दूसरे वीडियो में कुछ लोगों को हथियार जैसी वस्तुओं के साथ नाचते हुए दिखाया गया था।
पुलिस ने दर्ज की थी प्राथमिकी
वीडियो वायरल होने के बाद मीरगंज थाना में साइबर सेल के एक पुलिस अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। प्राथमिकी में अनंत सिंह सहित सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने हथियार प्रदर्शन के आरोपों की भी जांच शुरू की थी और संबंधित हथियारों के सत्यापन का निर्देश दिया गया था।
पहले नहीं मिली थी अग्रिम जमानत
मामले की शुरुआती सुनवाई में अनंत सिंह को अग्रिम जमानत नहीं मिली थी। हालांकि अदालत ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बाद बचाव पक्ष ने दोबारा अदालत में अपना पक्ष रखा और जांच में हुई प्रगति को लेकर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष ने वीडियो पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि वायरल हुए दो अलग-अलग वीडियो को जोड़कर एक सामग्री तैयार की गई थी। उनका कहना था कि उपलब्ध वीडियो की सत्यता पर भी सवाल खड़े होते हैं और प्रथम दृष्टया सामग्री को देखकर उसके संपादित या कृत्रिम रूप से तैयार किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हथियार को लेकर क्या था विवाद?
सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के साथ यह दावा भी किया गया था कि अनंत सिंह के पास बैठे एक व्यक्ति के हाथ में प्रतिबंधित श्रेणी की एक रायफल जैसी वस्तु दिखाई दे रही है। इसी दावे को आधार बनाकर पुलिस ने प्राथमिकी में हथियार प्रदर्शन का जिक्र किया था। हालांकि जांच के दौरान अब तक न तो कथित हथियार बरामद हुआ और न ही उसकी पुष्टि करने वाली कोई वैज्ञानिक रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जा सकी।
जांच की धीमी रफ्तार बनी राहत की वजह
मामला दर्ज होने के करीब डेढ़ महीने बाद भी जांच एजेंसियां कोई ठोस भौतिक साक्ष्य अदालत के सामने नहीं रख सकीं। यही कारण रहा कि बचाव पक्ष को अदालत में मजबूत आधार मिला। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दलीलों पर विचार करने के बाद अनंत सिंह, भोजपुरी गायक गुंजन सिंह तथा अन्य नामजद आरोपियों को जमानत दे दी।
आगे क्या?
फिलहाल अदालत से राहत मिलने के बाद अनंत सिंह की गिरफ्तारी का खतरा टल गया है। हालांकि मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यदि भविष्य में जांच एजेंसियां नए साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करती हैं तो मामले में आगे भी कानूनी कार्रवाई संभव है।

