By Malay Ojha | Published: 21 June 2026 at 03:23 PM
भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब एक नया और रहस्यमयी मोड़ सामने आया है। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में भरत तिवारी अपने मोबाइल फोन को लेकर ऐसी बात कहते दिखाई दे रहे हैं, जिसने पूरे मामले को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन अब मोबाइल की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार पहले ही मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा कर चुकी है।
वायरल वीडियो में भरत तिवारी कहते नजर आते हैं कि उनकी मौत के बाद उनका मोबाइल फोन माता-पिता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के हाथ में नहीं जाना चाहिए। उनका दावा था कि मोबाइल में ऐसी जानकारियां और साक्ष्य मौजूद हैं जिन्हें न तो मिटाया जा सकता है और न ही झुठलाया जा सकता है। इसी बयान के सामने आने के बाद अब लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा मोबाइल में मौजूद कथित सामग्री को लेकर हो रही है।
क्या फोन में छिपे हैं किसी बड़े खुलासे के संकेत?
भरत तिवारी वीडियो में दावा करते हैं कि उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों और तथ्यों को सुरक्षित रखने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल किया है। उनका कहना था कि यह केवल एक उपकरण नहीं बल्कि उनके जीवन का दस्तावेज है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मोबाइल में वास्तव में ऐसी कोई सामग्री मौजूद है जो जांच को नई दिशा दे सकती है या फिर यह केवल उनकी व्यक्तिगत आशंका थी।
परिजनों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
वीडियो वायरल होने के बाद परिजनों और ग्रामीणों के बीच चर्चा तेज हो गई है। परिवार का कहना है कि यदि मोबाइल में कोई महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। परिजन चाहते हैं कि मोबाइल के डाटा की जांच स्वतंत्र तरीके से हो ताकि किसी भी तरह की आशंका या विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।
शरीर दान की भी जताई थी इच्छा
वायरल वीडियो में भरत तिवारी अपनी अंतिम इच्छा का भी जिक्र करते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को सबसे पहले भारतीय सेना को दान करने का प्रयास किया जाए। यदि किसी कारण से ऐसा संभव न हो तो उनके शरीर का उपयोग गरीब और जरूरतमंद लोगों के हित में किया जाए। वीडियो का यह हिस्सा भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजनीतिक टिप्पणियां भी आईं सामने
वीडियो में भरत तिवारी कुछ राजनीतिक टिप्पणियां करते हुए भी दिखाई देते हैं। वह तत्कालीन सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते नजर आते हैं। साथ ही यह भी कहते हैं कि वह किसी दबाव, लालच या धमकी के कारण अपने विचारों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। हालांकि वीडियो में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एनकाउंटर के बाद लगातार बढ़ रहे सवाल
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही पूरे मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एनकाउंटर की परिस्थितियों, जांच प्रक्रिया और अब वायरल वीडियो में किए गए दावों को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। इसी वजह से न्यायिक जांच की घोषणा के बाद लोगों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
जांच पूरी होने तक बना रहेगा रहस्य
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भरत तिवारी जिस मोबाइल फोन का बार-बार जिक्र कर रहे थे, उसमें आखिर ऐसा क्या मौजूद है जिसे लेकर वह इतने चिंतित थे। अभी तक किसी जांच एजेंसी की ओर से मोबाइल में मौजूद कथित साक्ष्यों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। ऐसे में यह रहस्य जांच पूरी होने तक बरकरार रह सकता है।
दावों की नहीं हुई है आधिकारिक पुष्टि
महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल वीडियो में किए गए सभी दावे भरत तिवारी के व्यक्तिगत बयान हैं। मोबाइल में कथित साक्ष्यों की मौजूदगी या वीडियो में कही गई अन्य बातों की अब तक किसी सरकारी एजेंसी या जांच टीम ने पुष्टि नहीं की है। इसलिए मामले से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
पुलिस और CM दोनों की भूमिका की जांच की मांग
भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में एनकाउंटर फर्जी साबित होता है तो इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। सिन्हा ने आरोप लगाया कि राज्य में हो रहे लगातार एनकाउंटर को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भूमिका की भी जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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