By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 06:34 PM
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को छात्रों का आंदोलन अचानक बेहद उग्र हो गया। विधानसभा घेराव के लिए निकले हजारों छात्रों ने पुलिस की कई स्तर की बैरिकेडिंग तोड़ दी और खेतों के रास्ते नई विधानसभा परिसर की दीवार तक पहुंच गए। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन चलाया, लाठीचार्ज किया और बाद में आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसी बीच नौ दिन से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार को साफ चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
विधानसभा की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई स्तर की बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक सुरक्षा घेरा तोड़ना शुरू कर दिया। चौथा बैरिकेड टूटने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की तेज बौछार के बावजूद छात्र पीछे नहीं हटे। कई प्रदर्शनकारी पानी की बौछार के बीच नारे लगाते और आगे बढ़ते दिखाई दिए।
पानी की बौछार भी नहीं रोक पाई भीड़
पुलिस की कार्रवाई के बाद आंदोलनकारी अलग-अलग रास्तों से आगे बढ़ने लगे। कुछ छात्र खेतों के रास्ते विधानसभा की दीवार तक पहुंच गए। इसके बाद आखिरी बैरिकेड भी टूट गया और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ गए। हालात को संभालने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और बाद में आंसू गैस के गोले छोड़े। घटनास्थल पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव काफी बढ़ गया।
देवेंद्र महतो ने कहा- अब आंदोलन रुकने वाला नहीं
आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महतो ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं तो इसका असर सरकार पर पड़ेगा और मुख्यमंत्री की कुर्सी तक खतरा पहुंच सकता है।
नौ दिन से भूख हड़ताल पर हैं देवेंद्र महतो
देवेंद्र नाथ महतो पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। विधानसभा घेराव से पहले उन्होंने सामाजिक माध्यम पर वीडियो संदेश जारी कर आंदोलन में शामिल होने वाले छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि पुलिस अगर रास्ता रोकती है तो उससे उलझने के बजाय प्रदर्शनकारी दूसरे रास्ते तलाशें। उनका जोर इस बात पर भी था कि आंदोलन में किसी राजनीतिक या धार्मिक झंडे का इस्तेमाल न किया जाए और केवल तिरंगा लेकर छात्र पहुंचें।
एंबुलेंस के बाद छात्रों के कंधों पर पहुंचे
भूख हड़ताल के कारण कमजोर हालत के बावजूद देवेंद्र नाथ महतो विधानसभा मार्च में शामिल हुए। पहले उन्हें एंबुलेंस से आंदोलन स्थल तक लाया गया और बाद में वह छात्रों के कंधों पर सवार होकर मार्च में आगे बढ़े। उनके हाथ में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी दिखाई दी। महतो का कहना है कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे।
‘आज क्रांति और बदलाव का दिन’
विधानसभा घेराव से पहले अपने संदेश में देवेंद्र नाथ महतो ने इसे छात्रों के आंदोलन का ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि आज का विधानसभा घेराव सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर निर्णायक लड़ाई है। उन्होंने आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों से संयम रखने और किसी भी तरह के विवाद से दूर रहने की अपील की थी।
सीजीएल परीक्षा रद्द करने पर अड़े छात्र
छात्रों का सबसे बड़ा विवाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा को लेकर है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसी मांग को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।
सरकार ने सीबीआई जांच से किया इनकार
छात्रों की मांग के विपरीत सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं है। सरकार की ओर से सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि अगर जांच के दौरान वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो उसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय से भी जांच कराई जा सकती है। हालांकि छात्र इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं और केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग पर कायम हैं।
परीक्षा विवाद से शुरू हुआ आंदोलन अब बड़ा मुद्दा
सीजीएल परीक्षा को लेकर छात्रों का विरोध नया नहीं है। परीक्षा और उसके परिणाम को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं होने से हजारों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ता है। इसी नाराजगी ने धीरे-धीरे बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले लिया है। अब आंदोलनकारी केवल परीक्षा विवाद पर जवाब नहीं, बल्कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
विधानसभा घेराव ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल
सोमवार का विधानसभा घेराव सरकार के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदर्शनकारी राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को कई जगहों पर पार करते हुए विधानसभा परिसर के करीब तक पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पहले बैरिकेडिंग, फिर वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इसके बाद आंसू गैस छोड़ी गई। इसके बावजूद छात्रों का पीछे नहीं हटना बताता है कि आंदोलनकारी फिलहाल अपनी मांगों से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
छात्रों और सरकार के बीच अब टकराव बढ़ने के संकेत
छात्रों की मांग और सरकार के प्रस्ताव के बीच सबसे बड़ा अंतर जांच की प्रक्रिया को लेकर है। छात्र सीजीएल परीक्षा रद्द करने के साथ केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच चाहते हैं, जबकि सरकार न्यायिक जांच का रास्ता अपना रही है। यही असहमति अब आंदोलन की सबसे बड़ी वजह बन गई है। सोमवार की घटनाओं के बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है।
‘मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन जारी रहेगा’
देवेंद्र नाथ महतो और प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ कहना है कि केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जब तक सीजीएल परीक्षा रद्द करने और केंद्रीय जांच की मांग पर सरकार ठोस फैसला नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। सोमवार को विधानसभा की ओर छात्रों का बढ़ना इसी दबाव की अगली कड़ी माना जा रहा है।
अब सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
रांची में विधानसभा घेराव के दौरान जिस तरह हजारों छात्र सुरक्षा घेरा तोड़कर परिसर के करीब पहुंचे, उसने पूरे आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस कार्रवाई के बाद भी प्रदर्शन जारी रहने से सरकार पर छात्रों से बातचीत कर रास्ता निकालने का दबाव बढ़ गया है। दूसरी तरफ छात्र नेता पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर है।
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