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बिहार के 147 स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण, अब हटेगा कब्जा; 20 केंद्रीय विद्यालयों को मिली 5-5 एकड़ जमीन

By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 03:57 PM

बिहार में स्कूलों की जमीन और भवन से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा है कि राज्य के भूमिहीन स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। पिछले दो महीनों में 20 केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ जमीन दी जा चुकी है। इसके साथ ही राजस्व विभाग के पास अतिक्रमण वाले 147 स्कूलों की सूची पहुंची है, जिनसे कब्जा हटाने की कार्रवाई तेज की जाएगी।

राजस्व मंत्री ने बताया कि अभी तक 147 ऐसे विद्यालयों की जानकारी विभाग को मिली है, जहां स्कूल की जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। उन्होंने साफ किया कि यह संख्या आगे और बढ़ सकती है। सरकार का लक्ष्य केवल अतिक्रमण हटाना ही नहीं है, बल्कि विद्यालयों तक पहुंचने के लिए जरूरी रास्ते की जमीन उपलब्ध कराना भी है।

स्कूलों की जमीन पर अब तेजी से होगी कार्रवाई
अतिक्रमण के कारण कई जगह स्कूलों के पास पर्याप्त परिसर नहीं बचा है। कहीं खेल मैदान प्रभावित हैं तो कहीं विद्यालय तक पहुंचने में भी परेशानी होती है। डॉ. जायसवाल ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाएगी। विद्यालयों और खेल मैदानों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ-साथ जरूरत के अनुसार पहुंच पथ के लिए जमीन देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।

20 केंद्रीय विद्यालयों को मिली जमीन
भूमिहीन विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार ने काम शुरू कर दिया है। राजस्व मंत्री के अनुसार, पिछले दो महीने में 20 केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। सरकार का प्रयास है कि जमीन के अभाव में किसी विद्यालय के निर्माण या विस्तार का काम अटका न रहे।

शिक्षा विभाग के लिए बनेगा नोडल अधिकारी
भूमि से जुड़े मामलों के निपटारे में शिक्षा विभाग को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए एक नई व्यवस्था की जाएगी। राजस्व मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग के भूमि संबंधी मामलों के निष्पादन के लिए अलग से जिला भूमि सुधार उप समाहर्ता या अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। इससे जमीन से जुड़े मामलों में समन्वय और कार्रवाई दोनों तेज होने की उम्मीद है।

अधिकारियों को स्कूल जाकर बच्चों से मिलने की सलाह
अधिवेशन भवन में चल रहे राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के दूसरे दिन शिक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जायसवाल ने काम करने के तरीके को लेकर भी कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव, जिला शिक्षा पदाधिकारी, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से संवाद करना चाहिए और कक्षा भी लेनी चाहिए।

जमीन की समस्या के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
राजस्व मंत्री ने कहा कि स्कूल की जमीन, भवन या अन्य संसाधनों की समस्या दूर करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी नई पीढ़ी तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना चाहिए।

शिक्षकों की समस्याएं दूर करने का दावा
डॉ. जायसवाल ने कहा कि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की पहल पर शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को एक-एक कर दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षकों से भी अपील की कि वे शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करें। उनका कहना था कि विद्यालय व्यवस्था को बेहतर बनाने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

रोज अपने काम का हिसाब रखने की सलाह
राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को काम की गुणवत्ता सुधारने के लिए रोज आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सोने से पहले पूरे दिन किए गए काम का आकलन करना चाहिए। इसके साथ ही अगले दिन कौन-कौन से काम करने हैं, इसकी योजना पहले से बनाकर रखनी चाहिए। इससे काम को व्यवस्थित करने और उसकी गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है।

तनाव में नहीं, ऊर्जा के साथ काम करें अधिकारी
शिक्षा अधिकारियों से डॉ. जायसवाल ने कहा कि काम का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। अधिकारियों का काम कलम और दिमाग से होता है, इसलिए मानसिक तनाव कम रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिनभर कई लोगों से मिलने वाले अधिकारियों को हर व्यक्ति से सकारात्मक ऊर्जा और मुस्कान के साथ मिलना चाहिए।

हर काम का नतीजा दिखना चाहिए
राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को परिणाम आधारित काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी काम का उद्देश्य केवल उसे पूरा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका असर भी दिखाई देना चाहिए। अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि उनके फैसलों और योजनाओं से जमीन पर क्या बदलाव आया है।

चिंतन शिविर से काम की समीक्षा जरूरी
उन्होंने कहा कि अधिकारियों और शिक्षकों को समय-समय पर ऐसे चिंतन शिविरों के माध्यम से अपने काम की समीक्षा करनी चाहिए। इससे यह पता चलता है कि शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे प्रयासों का कितना असर हो रहा है और किन क्षेत्रों में अभी और सुधार की जरूरत है।

शिक्षा मंत्री ने किया स्वागत
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी मौजूद रहे। इससे पहले उन्होंने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। कार्यशाला के दौरान शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की जमीन और अधिकारियों के कामकाज से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

स्कूलों की जमीन पर सरकार का फोकस
पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने स्कूलों की जमीन की समस्या को केवल राजस्व विभाग का मामला मानने के बजाय इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखने की पहल की है। एक तरफ भूमिहीन विद्यालयों को जमीन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अतिक्रमण वाले स्कूलों की पहचान कर कब्जा हटाने की तैयारी है। अगर यह कार्रवाई तय समय में जमीन पर उतरती है तो इससे स्कूलों के भवन, खेल मैदान और पहुंच मार्ग से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं का समाधान हो सकता है।

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बिहार के 147 स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण, अब हटेगा कब्जा; 20 केंद्रीय विद्यालयों को मिली 5-5 एकड़ जमीन

By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 03:57 PM

बिहार में स्कूलों की जमीन और भवन से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा है कि राज्य के भूमिहीन स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। पिछले दो महीनों में 20 केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ जमीन दी जा चुकी है। इसके साथ ही राजस्व विभाग के पास अतिक्रमण वाले 147 स्कूलों की सूची पहुंची है, जिनसे कब्जा हटाने की कार्रवाई तेज की जाएगी।

राजस्व मंत्री ने बताया कि अभी तक 147 ऐसे विद्यालयों की जानकारी विभाग को मिली है, जहां स्कूल की जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। उन्होंने साफ किया कि यह संख्या आगे और बढ़ सकती है। सरकार का लक्ष्य केवल अतिक्रमण हटाना ही नहीं है, बल्कि विद्यालयों तक पहुंचने के लिए जरूरी रास्ते की जमीन उपलब्ध कराना भी है।

स्कूलों की जमीन पर अब तेजी से होगी कार्रवाई
अतिक्रमण के कारण कई जगह स्कूलों के पास पर्याप्त परिसर नहीं बचा है। कहीं खेल मैदान प्रभावित हैं तो कहीं विद्यालय तक पहुंचने में भी परेशानी होती है। डॉ. जायसवाल ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाएगी। विद्यालयों और खेल मैदानों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ-साथ जरूरत के अनुसार पहुंच पथ के लिए जमीन देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।

20 केंद्रीय विद्यालयों को मिली जमीन
भूमिहीन विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार ने काम शुरू कर दिया है। राजस्व मंत्री के अनुसार, पिछले दो महीने में 20 केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। सरकार का प्रयास है कि जमीन के अभाव में किसी विद्यालय के निर्माण या विस्तार का काम अटका न रहे।

शिक्षा विभाग के लिए बनेगा नोडल अधिकारी
भूमि से जुड़े मामलों के निपटारे में शिक्षा विभाग को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए एक नई व्यवस्था की जाएगी। राजस्व मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग के भूमि संबंधी मामलों के निष्पादन के लिए अलग से जिला भूमि सुधार उप समाहर्ता या अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। इससे जमीन से जुड़े मामलों में समन्वय और कार्रवाई दोनों तेज होने की उम्मीद है।

अधिकारियों को स्कूल जाकर बच्चों से मिलने की सलाह
अधिवेशन भवन में चल रहे राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के दूसरे दिन शिक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जायसवाल ने काम करने के तरीके को लेकर भी कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव, जिला शिक्षा पदाधिकारी, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से संवाद करना चाहिए और कक्षा भी लेनी चाहिए।

जमीन की समस्या के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
राजस्व मंत्री ने कहा कि स्कूल की जमीन, भवन या अन्य संसाधनों की समस्या दूर करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी नई पीढ़ी तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना चाहिए।

शिक्षकों की समस्याएं दूर करने का दावा
डॉ. जायसवाल ने कहा कि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की पहल पर शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को एक-एक कर दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षकों से भी अपील की कि वे शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करें। उनका कहना था कि विद्यालय व्यवस्था को बेहतर बनाने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

रोज अपने काम का हिसाब रखने की सलाह
राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को काम की गुणवत्ता सुधारने के लिए रोज आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सोने से पहले पूरे दिन किए गए काम का आकलन करना चाहिए। इसके साथ ही अगले दिन कौन-कौन से काम करने हैं, इसकी योजना पहले से बनाकर रखनी चाहिए। इससे काम को व्यवस्थित करने और उसकी गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है।

तनाव में नहीं, ऊर्जा के साथ काम करें अधिकारी
शिक्षा अधिकारियों से डॉ. जायसवाल ने कहा कि काम का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। अधिकारियों का काम कलम और दिमाग से होता है, इसलिए मानसिक तनाव कम रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिनभर कई लोगों से मिलने वाले अधिकारियों को हर व्यक्ति से सकारात्मक ऊर्जा और मुस्कान के साथ मिलना चाहिए।

हर काम का नतीजा दिखना चाहिए
राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को परिणाम आधारित काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी काम का उद्देश्य केवल उसे पूरा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका असर भी दिखाई देना चाहिए। अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि उनके फैसलों और योजनाओं से जमीन पर क्या बदलाव आया है।

चिंतन शिविर से काम की समीक्षा जरूरी
उन्होंने कहा कि अधिकारियों और शिक्षकों को समय-समय पर ऐसे चिंतन शिविरों के माध्यम से अपने काम की समीक्षा करनी चाहिए। इससे यह पता चलता है कि शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे प्रयासों का कितना असर हो रहा है और किन क्षेत्रों में अभी और सुधार की जरूरत है।

शिक्षा मंत्री ने किया स्वागत
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी मौजूद रहे। इससे पहले उन्होंने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। कार्यशाला के दौरान शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की जमीन और अधिकारियों के कामकाज से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

स्कूलों की जमीन पर सरकार का फोकस
पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने स्कूलों की जमीन की समस्या को केवल राजस्व विभाग का मामला मानने के बजाय इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखने की पहल की है। एक तरफ भूमिहीन विद्यालयों को जमीन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अतिक्रमण वाले स्कूलों की पहचान कर कब्जा हटाने की तैयारी है। अगर यह कार्रवाई तय समय में जमीन पर उतरती है तो इससे स्कूलों के भवन, खेल मैदान और पहुंच मार्ग से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं का समाधान हो सकता है।

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