By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 03:43 PM
रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को अचानक और तेज हो गया। विधानसभा घेराव के लिए निकले छात्रों को रोकने के दौरान पुलिस ने पानी की बौछार के बाद लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसी बीच JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया। एक ही दिन हुई इन दोनों घटनाओं ने पूरे आंदोलन को और गरमा दिया है।
छात्रों की बड़ी संख्या विधानसभा की ओर बढ़ रही थी। रास्ते में लगाए गए बैरिकेड और कंटीले तार भी प्रदर्शनकारियों को रोकने में पूरी तरह कामयाब नहीं रहे। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने पहले पानी की बौछार की और फिर लाठीचार्ज किया। इसके बाद आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
आंसू गैस के बाद भी पीछे हटने को तैयार नहीं छात्र
आंसू गैस छोड़े जाने के बाद कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों के बीच अफरा-तफरी भी देखी गई। छात्रों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था नहीं बिगाड़ने की अपील की गई है।
देवेंद्र महतो बोले- अब सीधा मुख्यमंत्री से बात होगी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार पर छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों से बात करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
देवेंद्र महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जन्मदिन का जिक्र करते हुए कहा कि आज छात्रों को जिस तरह पानी की बौछार और आंसू गैस का सामना करना पड़ रहा है, वह झारखंड के लिए कलंक की बात है। उन्होंने चेतावनी दी कि छात्रों की यह लड़ाई सरकार की कुर्सी हिला सकती है।
‘डेलिगेशन से बात नहीं, सीएम से सीधी बातचीत’
देवेंद्र महतो ने कहा कि अब छात्रों का प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों या सरकार की ओर से भेजे जाने वाले किसी प्रतिनिधिमंडल से बात नहीं करेगा। उनका कहना है कि छात्र अब सीधे मुख्यमंत्री से बातचीत चाहते हैं। उन्होंने सरकार पर छात्रों को दुश्मन की तरह देखने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सरकार अपनी कुर्सी बचाना चाहती है तो उसे छात्रों की मांगों पर फैसला करना होगा।
गिरफ्तारी से और गरमाया JPSC विवाद
विधानसभा मार्च के बीच JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया। परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी पहले उनसे कई बार पूछताछ कर चुकी थी। सोमवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
इस्तीफे के अगले दिन गिरफ्तारी
ख्यांगते ने विरोध बढ़ने के बीच एक दिन पहले ही अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके अगले ही दिन सीआईडी की गिरफ्तारी की कार्रवाई सामने आई। परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसी पहले से ही कई स्तरों पर पड़ताल कर रही है। ऐसे में पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी को आंदोलन के बीच हुई बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
छात्रों की मुख्य मांगों पर अब भी अड़ा विवाद
छात्रों का आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। अभ्यर्थी JPSC और JSSC की अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, प्रश्नपत्र से जुड़ी शिकायतों और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जांच और दोषियों पर कार्रवाई शामिल है। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन कोई ऐसा समाधान नहीं निकला जिससे आंदोलन पूरी तरह खत्म हो सके।
सरकार ने कई मांगें मानने का दावा किया
सरकार की ओर से दावा किया गया है कि छात्रों की बड़ी संख्या में मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं। हालांकि आंदोलनकारी छात्र अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। खासकर जांच की प्रक्रिया और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामलों को लेकर छात्रों का दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि बातचीत के बावजूद आंदोलन विधानसभा मार्च तक पहुंच गया।
भाजपा ने पुलिस कार्रवाई पर सरकार को घेरा
भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर रहे थे और उन्हें रोकने के लिए कंटीले तार लगाए गए, जिससे कई छात्र घायल हुए। इसके बाद लाठीचार्ज किए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया।
‘दिल्ली में कुछ, झारखंड में कुछ और’
प्रदीप वर्मा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली में कांग्रेस अलग बात करती है, जबकि झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज कराया जा रहा है। उन्होंने इसे कांग्रेस और राहुल गांधी का कथित दोहरा रवैया बताया। भाजपा की ओर से यह भी दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान उसके कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया।
आंदोलन की तस्वीर अब बदल गई है
रांची में सोमवार की घटनाओं ने छात्र आंदोलन को एक नए मोड़ पर ला दिया है। एक तरफ विधानसभा की ओर बढ़ती छात्रों की भीड़, दूसरी तरफ पुलिस की कार्रवाई और उसी दिन पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार छात्रों के साथ सीधे बातचीत कर कोई रास्ता निकालती है या आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होगा।
फिलहाल छात्र पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन के सामने विधानसभा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। परीक्षा विवाद की जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। ऐसे में रांची का यह छात्र आंदोलन अब केवल भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि सरकार और छात्रों के बीच सीधे टकराव की स्थिति बनती जा रही है।
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