By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 07:02 PM
मुजफ्फरनगर में एक फैक्ट्री के भीतर चल रही कथित बंधुआ मजदूरी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर दिया है। पुलिस और प्रशासन की छापेमारी में यहां से 12 मजदूरों को आजाद कराया गया। इन मजदूरों ने जो कहानी सुनाई, वह सिर्फ शोषण नहीं बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीर पेश करती है।
प्रशासन को जब इस फैक्ट्री में मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराने की सूचना मिली तो मंगलवार को टीम ने वहां दबिश दी। कार्रवाई के दौरान 12 मजदूरों को बाहर निकाला गया। इनमें कुछ नाबालिग भी बताए जा रहे हैं। मजदूरों के शरीर पर चोट, मारपीट और यातना के निशान मिले हैं। शुरुआती जांच में साफ हुआ कि इन लोगों को लंबे समय से जबरन काम कराया जा रहा था।
भूसी की रोटी, नमक-मिर्च और बेल्ट की मार
मुक्त कराए गए मजदूरों ने बताया कि उन्हें दिन भर की मेहनत के बदले भरपेट खाना तक नहीं मिलता था। चौबीस घंटे में सिर्फ एक बार तीन या चार सूखी रोटियां दी जाती थीं। कई बार वह रोटियां इतनी खराब होती थीं कि पशुओं के चारे जैसी लगती थीं। साथ में सिर्फ नमक और लाल मिर्च दी जाती थी। अगर काम करते वक्त आंख लग जाती थी तो बेल्ट और डंडों से पीटा जाता था।
नौकरी का झांसा देकर फंसाए गए
मजदूरों का कहना है कि उन्हें रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से नौकरी का लालच देकर यहां लाया गया था। हर महीने बारह से पंद्रह हजार रुपये वेतन, रहने और खाने की सुविधा और आठ घंटे काम का वादा किया गया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचते ही मोबाइल और पहचान पत्र छीन लिए गए। इसके बाद बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया।
सुबह चार बजे से आधी रात तक काम
मजदूरों के मुताबिक उनका दिन तड़के चार बजे शुरू होता था और काम आधी रात तक चलता था। सोने के लिए मुश्किल से दो या तीन घंटे मिलते थे। बीमार होने पर भी राहत नहीं दी जाती थी। विरोध करने वालों को पीटने के साथ जान से मारने की धमकी भी दी जाती थी।
फैक्ट्री को बनाया गया था कैदखाना
मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री के चारों ओर ऊंची दीवारें थीं और कई लोहे के गेट हमेशा बंद रहते थे। हर कोने में निगरानी कैमरे लगे थे। इतना ही नहीं, परिसर के अंदर और बाहर खूंखार कुत्ते छोड़े गए थे ताकि कोई भागने की हिम्मत न कर सके।
भागने की कोशिश पर कुत्ते छोड़ने का आरोप
कुछ मजदूरों ने आरोप लगाया कि जो भागने की कोशिश करता था, उस पर कुत्ते छोड़ दिए जाते थे। कई मजदूरों के शरीर पर कुत्तों के काटने और नुकीली चीजों से घायल किए जाने के निशान भी मिले हैं। उनका कहना है कि कुत्तों को उनसे बेहतर खाना दिया जाता था।
एक मजदूर की मौत का सनसनीखेज दावा
इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा नेपाल के रहने वाले अर्जुन उर्फ टोपी की कथित मौत को लेकर हुआ है। मजदूरों ने पुलिस को बताया कि पिछले साल नवंबर में फैक्ट्री के अंदर यातना के दौरान उसकी मौत हो गई थी। आरोप है कि मौत के बाद शव को एक बैग में भरकर गायब कर दिया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने नया मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरे गिरोह की तलाश में पुलिस
पुलिस अब फैक्ट्री मालिकों, सुपरवाइजरों और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुट गई है। जांच इस बात की भी हो रही है कि आखिर कितने मजदूरों को इसी तरह फंसाकर यहां कैद में रखा गया था। प्रशासन का कहना है कि सभी पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
सवाल सिर्फ एक फैक्ट्री का नहीं
यह मामला सिर्फ एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं दिख रहा। जिस तरह मजदूरों को अलग-अलग जगहों से झांसा देकर लाया गया, उससे बड़े नेटवर्क की आशंका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऐसे और भी ठिकाने हैं, जहां इसी तरह इंसानों को गुलाम बनाकर रखा गया है।
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