By Malay Ojha | Published: 02 July 2026 at 04:04 PM
टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप और चर्चित शिक्षक खान सर के बीच चल रहे मानहानि विवाद में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को अदालत के बाहर बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की सलाह देते हुए मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है। अदालत ने कहा कि जो नुकसान होना था, वह हो चुका है और अब विवाद को बढ़ाने के बजाय समाधान तलाशना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने माना कि दोनों पक्ष चाहें तो आपसी सहमति से इस विवाद का समाधान निकाल सकते हैं। अदालत ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालना बेहतर विकल्प हो सकता है।
अदालत की टिप्पणी- मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी की आलोचना करना गलत नहीं है, लेकिन उसकी भी एक सीमा और मर्यादा होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि संभव है कुछ बयान प्रतिक्रिया में दिए गए हों, लेकिन ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए जिससे किसी की प्रतिष्ठा प्रभावित हो। अदालत ने दोनों पक्षों को आपत्तिजनक टिप्पणियां हटाने पर भी विचार करने की सलाह दी।
अंजना ओम कश्यप ने क्या कहा?
अंजना ओम कश्यप और उनके संस्थान की ओर से अदालत में कहा गया कि शिक्षकों की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए कुछ पोस्ट मानहानिकारक हैं। उनके वकील ने अदालत से अंतरिम राहत देने की मांग करते हुए कहा कि इन पोस्ट की वजह से पत्रकार और उनके परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर बच्चों के स्कूल से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने के बाद जान से मारने की धमकियां मिलने लगी हैं। इसलिए बच्चों से जुड़ी सभी जानकारी तत्काल हटाई जानी चाहिए।
खान सर को अदालत की सलाह
अदालत ने खान सर की ओर से पेश वकील से कहा कि बच्चों को किसी भी विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बच्चों से जुड़ी कोई जानकारी साझा की गई है तो उसे तुरंत हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक शिक्षक की पहचान समाज में सकारात्मक होनी चाहिए और सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा भी उसी अनुरूप होनी चाहिए।
खान सर की ओर से क्या जवाब आया?
खान सर की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्चों से जुड़ी जानकारी हटाने में कोई आपत्ति नहीं है और इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि उनकी ओर से यह भी कहा गया कि विवाद को बढ़ाने वाली टिप्पणियों से सभी पक्षों को बचना चाहिए ताकि माहौल और खराब न हो।
दोनों पक्ष मिलकर तय करेंगे आपत्तिजनक शब्द
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों को निर्देश दिया कि वे आपस में बैठकर उन शब्दों और टिप्पणियों की सूची तैयार करें, जिन पर आपत्ति जताई गई है। इसके बाद मध्यस्थता की प्रक्रिया के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। अदालत ने साफ किया कि यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो इससे दोनों पक्षों का समय और संसाधन बचेंगे।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा को लेकर आयोजित एक लाइव बहस के बाद शुरू हुआ था। आरोप है कि उस कार्यक्रम के दौरान अंजना ओम कश्यप ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले कुछ शिक्षकों पर टिप्पणी की थी।
इसके बाद खान सर समेत कई शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। इसी को लेकर अंजना ओम कश्यप और उनके संस्थान ने दो करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया। याचिका में दावा किया गया कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
अब 9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई तय की है। तब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अदालत यह देखेगी कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद सुलझाने में सफल होते हैं या नहीं।
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