By Malay Ojha | Published: 02 July 2026 at 06:45 PM
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए महिला एवं बाल विकास निगम ने गुरुवार को एक अहम पहल की। निगम की ओर से आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न विभागों की आंतरिक शिकायत समितियों के सदस्यों को साफ निर्देश दिया गया कि महिलाओं से जुड़ी किसी भी शिकायत को हल्के में न लिया जाए। हर शिकायत की निष्पक्ष, गोपनीय और तय समय सीमा के भीतर जांच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास निगम की प्रबंध निदेशक डॉ. प्रीति ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर संस्थान का नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि शिकायत समिति के सदस्यों को प्रत्येक मामले में पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पीड़ित महिला को समय पर न्याय मिल सके और कार्यस्थल का माहौल सुरक्षित बना रहे।
कार्यशाला को औपचारिक कार्यक्रम नहीं, जिम्मेदारी समझें
डॉ. प्रीति ने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं का उद्देश्य केवल नियमों की जानकारी देना नहीं है, बल्कि शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को और मजबूत बनाना भी है। उन्होंने समिति के सदस्यों से अपील की कि वे कानून की भावना के अनुरूप काम करें और किसी भी शिकायत की जांच में निष्पक्षता बनाए रखें।
क्या कहता है कानून, अधिकारियों को दी गई पूरी जानकारी
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम, प्रतिषेध और शिकायतों के निपटारे से जुड़े कानून के प्रमुख प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि प्रत्येक सरकारी और निजी संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। यदि किसी विभाग के कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर संचालित होते हैं तो प्रत्येक प्रशासनिक इकाई में अलग समिति बनाई जानी चाहिए।
हर संस्था में शिकायत समिति बनाना जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि समिति की अध्यक्षता संस्थान की वरिष्ठ महिला कर्मचारी करेंगी, जबकि अन्य सदस्यों का चयन संबंधित नियोक्ता करेगा। वहीं, जिन संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या कम है या शिकायत सीधे नियोक्ता के खिलाफ हो, ऐसे मामलों की सुनवाई जिला स्तर पर गठित स्थानीय समिति द्वारा की जाती है।
किन मामलों को माना जाएगा लैंगिक उत्पीड़न
कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि लैंगिक उत्पीड़न केवल शारीरिक छेड़छाड़ तक सीमित नहीं है। किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संपर्क करना, यौन संबंध बनाने का दबाव डालना, अशोभनीय या यौन संकेत वाले शब्दों का इस्तेमाल करना, आपत्तिजनक तस्वीरें या सामग्री दिखाना अथवा किसी भी प्रकार का अभद्र मौखिक, शारीरिक या इशारों के माध्यम से किया गया व्यवहार भी उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने पर जोर
कार्यशाला में मौजूद अधिकारियों और समिति के सदस्यों से कहा गया कि उनका उद्देश्य केवल शिकायतों की जांच करना नहीं, बल्कि ऐसा कार्यस्थल तैयार करना भी है जहां महिलाएं बिना किसी डर और दबाव के काम कर सकें। इसके लिए जागरूकता, संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्रवाई को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया।
विभिन्न विभागों के अधिकारी रहे शामिल
एक दिवसीय इस कार्यशाला में विभिन्न सरकारी विभागों की आंतरिक शिकायत समितियों के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कानून से जुड़े कई सवाल पूछे और विशेषज्ञों से उनके जवाब भी प्राप्त किए। आयोजन का उद्देश्य शिकायत समिति के सदस्यों को कानूनी प्रावधानों और उनकी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक जागरूक बनाना था।
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