Friday, July 3, 2026

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राम मंदिर चढ़ावा मामला: एसआईटी ने चंपत, अनिल और गोपाल से की पूछताछ, अब जमीन सौदों और गहनों के हिसाब पर भी फोकस

By Malay Ojha | Published: 03 July 2026 at 08:06 AM

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार को मंदिर परिसर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और सहायक प्रशासक गोपाल राव से लंबी पूछताछ की। इस बार जांच सिर्फ दान की गिनती तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन खरीद, कीमती गहनों के रखरखाव और पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता हुई या नहीं, इस पर भी विस्तार से सवाल किए गए।

सूत्रों के अनुसार, 13 जून को गठित एसआईटी पहले भी छह दिनों तक जांच कर प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। इसके बाद जांच टीम दूसरी बार अयोध्या पहुंची है। इस बार अधिकारियों ने अलग-अलग स्तर पर जुड़े लोगों के बयान लेकर पूरी प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे की गिनती से लेकर उसे सुरक्षित रखने और बैंक तक पहुंचाने तक कहीं कोई चूक या गड़बड़ी तो नहीं हुई।

अनिल मिश्रा से दान की पूरी व्यवस्था पर पूछे गए सवाल
जांच की शुरुआत ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा से हुई। एसआईटी ने उनसे पूछा कि दान पात्र की गिनती किस तरह होती है, इस काम में किन लोगों की जिम्मेदारी होती है और नकदी को बैंक तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था कैसे संचालित की जाती थी। इसके अलावा सुरक्षा कर्मियों की भूमिका, गिनती के दौरान मौजूद कर्मचारियों की जिम्मेदारी और कीमती सामान को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली गई।

सोना-चांदी और गहनों के रिकॉर्ड पर भी जांच
एसआईटी ने यह भी जानना चाहा कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता था। जांच दल ने पूछा कि इन वस्तुओं को सुरक्षित रखने, उनका हिसाब तैयार करने और बैंक या सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था क्या थी। अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को क्रमवार समझने का प्रयास किया।

गोपाल राव से जमीन खरीद और आभूषणों पर पूछताछ
इसके बाद जांच दल ने सहायक प्रशासक गोपाल राव से लंबी पूछताछ की। गोपाल राव मंदिर में आने वाले कीमती चढ़ावे और आभूषणों के रखरखाव से जुड़े रहे हैं। इसी वजह से एसआईटी ने उनसे महंगे गहनों के रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल किए।

इतना ही नहीं, मंदिर निर्माण के दौरान ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीनों को लेकर भी उनसे विस्तार से जानकारी मांगी गई। जांच एजेंसी यह समझना चाहती है कि जमीनों की पहचान, सत्यापन और खरीद की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही और सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं।

जमीन सौदों में कथित कमीशन की भी हो रही पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी अब उन आरोपों की भी जांच कर रही है जिनमें जमीन खरीद के दौरान कथित कमीशन लेने की बात कही गई है। हालांकि अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसआईटी इस पहलू पर दस्तावेजों, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।

सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों से भी लिए गए बयान
जांच सिर्फ ट्रस्ट पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रही। दान की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और चढ़ावे को सुरक्षित रखने से जुड़े निजी सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों से भी अलग-अलग पूछताछ की गई। जांच एजेंसी सभी के बयानों का मिलान कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर तैयार करने में जुटी है।

चंपत राय से बयानों का किया गया मिलान
अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ के बाद एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी बातचीत की। सूत्रों का कहना है कि जांच दल यह समझना चाहता था कि अन्य अधिकारियों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों में कहीं कोई विरोधाभास तो नहीं है। इसी आधार पर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए, ताकि अलग-अलग लोगों के बयान एक-दूसरे से मिलाए जा सकें।

जांच के बीच राम निवास मंदिर को लेकर नया विवाद
इसी बीच अयोध्या में राम मंदिर परिसर के पास स्थित प्राचीन राम निवास मंदिर को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। खुद को मंदिर की पंच समिति का प्रमुख बताने वाले हरिशंकर सफारीवाला ने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मंदिर की संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई। उनका दावा है कि मंदिर किसी निजी व्यक्ति की संपत्ति नहीं बल्कि पंच समिति के अधीन धार्मिक स्थल है और इसकी बिक्री नहीं की जा सकती।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर को बिक्री योग्य संपत्ति दिखाकर करोड़ों रुपये का कथित सौदा तैयार किया गया और कुछ बैंक खातों में धनराशि भेजी गई। सफारीवाला का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रशासन से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और मामले की जांच जारी है।

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राम मंदिर चढ़ावा मामला: एसआईटी ने चंपत, अनिल और गोपाल से की पूछताछ, अब जमीन सौदों और गहनों के हिसाब पर भी फोकस

By Malay Ojha | Published: 03 July 2026 at 08:06 AM

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार को मंदिर परिसर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और सहायक प्रशासक गोपाल राव से लंबी पूछताछ की। इस बार जांच सिर्फ दान की गिनती तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन खरीद, कीमती गहनों के रखरखाव और पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता हुई या नहीं, इस पर भी विस्तार से सवाल किए गए।

सूत्रों के अनुसार, 13 जून को गठित एसआईटी पहले भी छह दिनों तक जांच कर प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। इसके बाद जांच टीम दूसरी बार अयोध्या पहुंची है। इस बार अधिकारियों ने अलग-अलग स्तर पर जुड़े लोगों के बयान लेकर पूरी प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे की गिनती से लेकर उसे सुरक्षित रखने और बैंक तक पहुंचाने तक कहीं कोई चूक या गड़बड़ी तो नहीं हुई।

अनिल मिश्रा से दान की पूरी व्यवस्था पर पूछे गए सवाल
जांच की शुरुआत ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा से हुई। एसआईटी ने उनसे पूछा कि दान पात्र की गिनती किस तरह होती है, इस काम में किन लोगों की जिम्मेदारी होती है और नकदी को बैंक तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था कैसे संचालित की जाती थी। इसके अलावा सुरक्षा कर्मियों की भूमिका, गिनती के दौरान मौजूद कर्मचारियों की जिम्मेदारी और कीमती सामान को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली गई।

सोना-चांदी और गहनों के रिकॉर्ड पर भी जांच
एसआईटी ने यह भी जानना चाहा कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता था। जांच दल ने पूछा कि इन वस्तुओं को सुरक्षित रखने, उनका हिसाब तैयार करने और बैंक या सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था क्या थी। अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को क्रमवार समझने का प्रयास किया।

गोपाल राव से जमीन खरीद और आभूषणों पर पूछताछ
इसके बाद जांच दल ने सहायक प्रशासक गोपाल राव से लंबी पूछताछ की। गोपाल राव मंदिर में आने वाले कीमती चढ़ावे और आभूषणों के रखरखाव से जुड़े रहे हैं। इसी वजह से एसआईटी ने उनसे महंगे गहनों के रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल किए।

इतना ही नहीं, मंदिर निर्माण के दौरान ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीनों को लेकर भी उनसे विस्तार से जानकारी मांगी गई। जांच एजेंसी यह समझना चाहती है कि जमीनों की पहचान, सत्यापन और खरीद की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही और सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं।

जमीन सौदों में कथित कमीशन की भी हो रही पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी अब उन आरोपों की भी जांच कर रही है जिनमें जमीन खरीद के दौरान कथित कमीशन लेने की बात कही गई है। हालांकि अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसआईटी इस पहलू पर दस्तावेजों, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।

सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों से भी लिए गए बयान
जांच सिर्फ ट्रस्ट पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रही। दान की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और चढ़ावे को सुरक्षित रखने से जुड़े निजी सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों से भी अलग-अलग पूछताछ की गई। जांच एजेंसी सभी के बयानों का मिलान कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर तैयार करने में जुटी है।

चंपत राय से बयानों का किया गया मिलान
अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ के बाद एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी बातचीत की। सूत्रों का कहना है कि जांच दल यह समझना चाहता था कि अन्य अधिकारियों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों में कहीं कोई विरोधाभास तो नहीं है। इसी आधार पर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए, ताकि अलग-अलग लोगों के बयान एक-दूसरे से मिलाए जा सकें।

जांच के बीच राम निवास मंदिर को लेकर नया विवाद
इसी बीच अयोध्या में राम मंदिर परिसर के पास स्थित प्राचीन राम निवास मंदिर को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। खुद को मंदिर की पंच समिति का प्रमुख बताने वाले हरिशंकर सफारीवाला ने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मंदिर की संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई। उनका दावा है कि मंदिर किसी निजी व्यक्ति की संपत्ति नहीं बल्कि पंच समिति के अधीन धार्मिक स्थल है और इसकी बिक्री नहीं की जा सकती।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर को बिक्री योग्य संपत्ति दिखाकर करोड़ों रुपये का कथित सौदा तैयार किया गया और कुछ बैंक खातों में धनराशि भेजी गई। सफारीवाला का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रशासन से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और मामले की जांच जारी है।

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