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E-20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद, अब E-22 से E-30 लागू करने में जल्दबाजी नहीं करेगी सरकार!

By Malay Ojha | Published: 07 July 2026 at 06:03 PM

देशभर में ई-20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को लेकर अपनी रफ्तार धीमी कर दी है। सरकार अब ई-22 से ई-30 तक के एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लागू करने में जल्दबाजी नहीं करेगी। पहले लोगों की चिंताओं, तकनीकी रिपोर्ट और वाहन कंपनियों की राय को पूरी तरह परखा जाएगा। सरकार का मानना है कि बिना भरोसा बनाए आगे बढ़ना सही नहीं होगा।

भारतीय मानक ब्यूरो ने भले ही ई-22 से ई-30 तक के पेट्रोल के लिए मानक तय कर दिए हैं, लेकिन अब सरकार इस दिशा में सावधानी से कदम बढ़ाना चाहती है। पहले माना जा रहा था कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी, लेकिन ई-20 को लेकर देशभर में शुरू हुई बहस के बाद सरकार ने अपना रुख नरम कर लिया है। अब हर फैसला तकनीकी जांच और व्यापक चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

वाहन मालिकों की शिकायतों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
ई-20 पेट्रोल लागू होने के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने कई तरह की शिकायतें सामने रखीं। लोगों का कहना है कि कुछ वाहनों में माइलेज कम हो रहा है, जबकि कई लोगों ने इंजन और दूसरे पुर्जों पर असर पड़ने की भी बात कही। खासकर पुराने वाहनों को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठाए गए। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए सरकार अब आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच कराना चाहती है।

तकनीकी अध्ययन के बाद ही होगा अगला फैसला
सरकार ने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच की जिम्मेदारी ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया को दी है। यह संस्था जांच करेगी कि अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल का मौजूदा वाहनों पर क्या असर पड़ता है। अध्ययन में माइलेज, इंजन की स्थिति, रखरखाव का खर्च और वाहन के प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा होगी। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट अगले वर्ष के अंत तक सरकार को मिल सकती है।

क्या मौजूदा वाहन तैयार हैं?
ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अभी देश में चल रहे अधिकांश वाहन अधिकतम ई-20 तक के मिश्रण को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। यदि भविष्य में ई-22, ई-25 या ई-30 जैसे ईंधन लागू किए जाते हैं तो कई वाहनों में इंजन और ईंधन प्रणाली में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तर पर तकनीकी सुधार जरूरी होंगे। सरकार इसी पहलू पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है।

माइलेज पर भी होगी अलग समीक्षा
माइलेज को लेकर लोगों की चिंता भी सरकार के सामने बड़ा मुद्दा बन गई है। वाहन कंपनियों का कहना है कि नई तकनीक के जरिए इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए व्यापक परीक्षण जरूरी हैं। सरकार विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ही इस विषय पर कोई अंतिम फैसला करेगी।

कीमत कम करने पर भी चल रहा विचार
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि सरकार उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर कर में राहत देती है और उसका पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचता है, तो भविष्य में यह पेट्रोल मौजूदा सामान्य पेट्रोल से सस्ता भी हो सकता है। हालांकि सरकार अभी इस विकल्प पर अध्ययन कर रही है और किसी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंची है।

चीनी उद्योग और किसानों को हो सकता है फायदा
दूसरी ओर चीनी और जैव ईंधन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में ई-22 और ई-25 जैसे ईंधन लागू होते हैं तो एथेनॉल की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे चीनी मिलों की अतिरिक्त क्षमता का बेहतर उपयोग होगा और गन्ना किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

जनता का भरोसा जीतने के बाद ही आगे बढ़ेगी सरकार
सरकार की रणनीति अब पहले जैसी नहीं दिख रही है। ई-20 को लेकर उठे सवालों ने यह साफ कर दिया है कि केवल मानक तय कर देना पर्याप्त नहीं है। सरकार पहले वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और वाहन उद्योग की राय का इंतजार करेगी। इसके बाद लोगों को पूरी जानकारी देकर भरोसे में लेने की कोशिश की जाएगी। तभी यह तय होगा कि भविष्य में ई-22 से ई-30 तक के एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को लागू किया जाए या नहीं।

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E-20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद, अब E-22 से E-30 लागू करने में जल्दबाजी नहीं करेगी सरकार!

By Malay Ojha | Published: 07 July 2026 at 06:03 PM

देशभर में ई-20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को लेकर अपनी रफ्तार धीमी कर दी है। सरकार अब ई-22 से ई-30 तक के एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लागू करने में जल्दबाजी नहीं करेगी। पहले लोगों की चिंताओं, तकनीकी रिपोर्ट और वाहन कंपनियों की राय को पूरी तरह परखा जाएगा। सरकार का मानना है कि बिना भरोसा बनाए आगे बढ़ना सही नहीं होगा।

भारतीय मानक ब्यूरो ने भले ही ई-22 से ई-30 तक के पेट्रोल के लिए मानक तय कर दिए हैं, लेकिन अब सरकार इस दिशा में सावधानी से कदम बढ़ाना चाहती है। पहले माना जा रहा था कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी, लेकिन ई-20 को लेकर देशभर में शुरू हुई बहस के बाद सरकार ने अपना रुख नरम कर लिया है। अब हर फैसला तकनीकी जांच और व्यापक चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

वाहन मालिकों की शिकायतों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
ई-20 पेट्रोल लागू होने के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने कई तरह की शिकायतें सामने रखीं। लोगों का कहना है कि कुछ वाहनों में माइलेज कम हो रहा है, जबकि कई लोगों ने इंजन और दूसरे पुर्जों पर असर पड़ने की भी बात कही। खासकर पुराने वाहनों को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठाए गए। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए सरकार अब आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच कराना चाहती है।

तकनीकी अध्ययन के बाद ही होगा अगला फैसला
सरकार ने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच की जिम्मेदारी ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया को दी है। यह संस्था जांच करेगी कि अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल का मौजूदा वाहनों पर क्या असर पड़ता है। अध्ययन में माइलेज, इंजन की स्थिति, रखरखाव का खर्च और वाहन के प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा होगी। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट अगले वर्ष के अंत तक सरकार को मिल सकती है।

क्या मौजूदा वाहन तैयार हैं?
ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अभी देश में चल रहे अधिकांश वाहन अधिकतम ई-20 तक के मिश्रण को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। यदि भविष्य में ई-22, ई-25 या ई-30 जैसे ईंधन लागू किए जाते हैं तो कई वाहनों में इंजन और ईंधन प्रणाली में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तर पर तकनीकी सुधार जरूरी होंगे। सरकार इसी पहलू पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है।

माइलेज पर भी होगी अलग समीक्षा
माइलेज को लेकर लोगों की चिंता भी सरकार के सामने बड़ा मुद्दा बन गई है। वाहन कंपनियों का कहना है कि नई तकनीक के जरिए इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए व्यापक परीक्षण जरूरी हैं। सरकार विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ही इस विषय पर कोई अंतिम फैसला करेगी।

कीमत कम करने पर भी चल रहा विचार
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि सरकार उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर कर में राहत देती है और उसका पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचता है, तो भविष्य में यह पेट्रोल मौजूदा सामान्य पेट्रोल से सस्ता भी हो सकता है। हालांकि सरकार अभी इस विकल्प पर अध्ययन कर रही है और किसी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंची है।

चीनी उद्योग और किसानों को हो सकता है फायदा
दूसरी ओर चीनी और जैव ईंधन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में ई-22 और ई-25 जैसे ईंधन लागू होते हैं तो एथेनॉल की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे चीनी मिलों की अतिरिक्त क्षमता का बेहतर उपयोग होगा और गन्ना किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

जनता का भरोसा जीतने के बाद ही आगे बढ़ेगी सरकार
सरकार की रणनीति अब पहले जैसी नहीं दिख रही है। ई-20 को लेकर उठे सवालों ने यह साफ कर दिया है कि केवल मानक तय कर देना पर्याप्त नहीं है। सरकार पहले वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और वाहन उद्योग की राय का इंतजार करेगी। इसके बाद लोगों को पूरी जानकारी देकर भरोसे में लेने की कोशिश की जाएगी। तभी यह तय होगा कि भविष्य में ई-22 से ई-30 तक के एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को लागू किया जाए या नहीं।

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