By Malay Ojha | Published: 10 July 2026 at 09:03 PM
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नामांकन दाखिल होने के महज 24 घंटे के भीतर अपना उम्मीदवार बदलकर सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। पहले अभिषेक कुमार बंटी को उम्मीदवार बनाया गया, उन्होंने नामांकन भी दाखिल किया और पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ मंच साझा किया। लेकिन अचानक उन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देकर नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह फैसला वास्तव में निजी कारणों से हुआ या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक दबाव था?
नामांकन वापस लेने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आधिकारिक तौर पर अभिषेक कुमार ने पारिवारिक कारणों को वजह बताया है, लेकिन पार्टी और विपक्ष के कई सूत्रों के हवाले से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। इन्हीं दावों ने इस पूरे घटनाक्रम को साधारण उम्मीदवार परिवर्तन से कहीं बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
चर्चा में आया चारा घोटाले से जुड़ा मामला
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि अभिषेक कुमार के माता-पिता का नाम बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता आरोपियों के रूप में दर्ज है। बताया जा रहा है कि इस मामले से जुड़े दस्तावेज विपक्षी दलों के पास पहले से मौजूद थे। चर्चा यह भी है कि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी इस मुद्दे को नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक करने की तैयारी में थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बीजेपी नेतृत्व तक पहुंची पूरी जानकारी
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही इस संभावित राजनीतिक विवाद की जानकारी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची, पूरे मामले की रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई। पार्टी के भीतर यह आशंका जताई गई कि यदि चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा तो विपक्ष इसे बड़ा चुनावी हथियार बना सकता है।
पहले से उम्मीदवार को लेकर असहज थी प्रदेश इकाई
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश इकाई के कई वरिष्ठ नेता शुरुआत से ही अभिषेक कुमार की उम्मीदवारी को लेकर सहज नहीं थे। बताया जाता है कि प्रदेश कोर समिति की बैठक में जिन तीन नामों पर सहमति बनी थी, उनमें अभिषेक शामिल नहीं थे। इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व स्तर पर उनका नाम अंतिम रूप से घोषित कर दिया गया था।
अंदरूनी नाराजगी को मिला नया आधार
बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे चारा घोटाले से जुड़े दस्तावेजों की चर्चा तेज हुई, प्रदेश नेतृत्व को उम्मीदवार बदलने का मजबूत आधार मिल गया। पार्टी के भीतर यह राय बनी कि यदि समय रहते फैसला नहीं लिया गया तो चुनाव के दौरान विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाकर नुकसान पहुंचा सकता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट होने से बढ़ी संवेदनशीलता
बांकीपुर सीट को पार्टी के लिए बेहद प्रतिष्ठित माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी इस चुनाव को केवल विधानसभा उपचुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक साख से भी जोड़कर देख रही है। ऐसे में किसी भी संभावित विवाद से बचने के लिए उम्मीदवार बदलने का फैसला लिया गया।
अब नीरज कुमार सिन्हा होंगे बीजेपी का चेहरा
अभिषेक कुमार के नामांकन वापस लेने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी उन्हें लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में पेश कर रही है। अब चुनावी मुकाबले में पूरी जिम्मेदारी नीरज कुमार सिन्हा के कंधों पर होगी।
उम्मीदवार बदलने से विपक्ष को मिला मुद्दा
हालांकि पार्टी ने समय रहते नया उम्मीदवार उतार दिया, लेकिन नामांकन के बाद उम्मीदवार बदलने की घटना ने विपक्ष को सवाल उठाने का मौका भी दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनाव प्रचार के दौरान कितना असर डालेगा, इस पर सभी की नजर रहेगी।
क्या है चारा घोटाला मामला?
अभिषेक कुमार के पिता रविंद्र प्रसाद मेसर्स मगध केमिकल्स कॉरपोरेशन में प्रबंधक थे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच में उन पर सरकारी खजाने से फर्जी निकासी और वित्तीय अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप सिद्ध हुआ था। इस फर्म की संचालक चंचला सिन्हा, जो अभिषेक कुमार की मां हैं, को भी इस मामले में दोषी ठहराया गया था। विशेष न्यायालय ने दोनों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। यही मामला अब बांकीपुर उपचुनाव की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
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