By Malay Ojha | Published: 11 July 2026 at 06:02 PM
पटना के एक किशोर ने हड्डी के बेहद दुर्लभ और खतरनाक कैंसर इविंग सारकोमा को मात देकर नई जिंदगी हासिल की है। करीब तीन साल तक चले इलाज, नियमित कीमोथेरेपी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी के बाद अब वह पूरी तरह कैंसर मुक्त है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि इस बीमारी की समय रहते पहचान हो जाए और मरीज इलाज में लापरवाही न करे, तो इसके सफल उपचार की संभावना काफी बढ़ जाती है।
परिजनों के अनुसार किशोर को लंबे समय से हड्डी में तेज दर्द और सूजन की शिकायत रहती थी। शुरुआत में इसे सामान्य तकलीफ समझा गया, लेकिन जब दर्द कम नहीं हुआ तो विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच कराई गई। अगस्त 2022 में हुई विस्तृत जांच के बाद पता चला कि वह इविंग सारकोमा नाम के दुर्लभ हड्डी के कैंसर से पीड़ित है। बीमारी की पुष्टि होते ही इलाज शुरू कर दिया गया।
बिना देरी शुरू हुई कीमोथेरेपी
बीमारी सामने आने के तुरंत बाद पटना स्थित नारायणा कैंसर सेंटर में विशेषज्ञों की देखरेख में कीमोथेरेपी शुरू की गई। इलाज कई चरणों में चला और इस दौरान मरीज की नियमित जांच भी होती रही। डॉक्टरों की सलाह का पूरी तरह पालन करने और लगातार इलाज जारी रखने से बीमारी पर धीरे-धीरे नियंत्रण मिलता गया।
अब पूरी तरह कैंसर मुक्त है मरीज
डॉक्टरों के मुताबिक लंबे उपचार के बाद मरीज की सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। फिलहाल वह कैंसर मुक्त है और सामान्य किशोर की तरह पढ़ाई, खेलकूद और रोजमर्रा की गतिविधियां कर रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि समय पर इलाज शुरू होने से गंभीर कैंसर का भी सफल उपचार संभव है।
डॉक्टर ने बताया क्या है इविंग सारकोमा
नारायणा कैंसर सेंटर एवं मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि इविंग सारकोमा हड्डी का एक दुर्लभ कैंसर है, जो अधिकतर बच्चों और किशोरों में देखा जाता है। यह बीमारी शरीर की लंबी हड्डियों, पसलियों या श्रोणि की हड्डियों को प्रभावित कर सकती है। शुरुआती लक्षण सामान्य दर्द जैसे लगते हैं, इसलिए कई बार लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
किन लक्षणों को हल्के में न लें
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी बच्चे या किशोर को लंबे समय तक हड्डी में लगातार दर्द रहे, सूजन बनी रहे, गांठ महसूस हो या बिना किसी बड़ी चोट के दर्द बढ़ता जाए, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। समय रहते बीमारी पकड़ में आने पर इलाज के अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
इलाज के दौरान मरीज का सहयोग भी बना सफलता की वजह
डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि मरीज और उसके परिवार ने इलाज के दौरान चिकित्सकीय सलाह का पूरी तरह पालन किया। समय पर दवाएं लेना, नियमित जांच कराना और हर चरण में डॉक्टरों से संपर्क बनाए रखना उपचार की सफलता में अहम साबित हुआ। उन्होंने कहा कि कैंसर के इलाज में डॉक्टरों के साथ-साथ मरीज और परिवार की सकारात्मक सोच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आधुनिक इलाज से बढ़ी उम्मीद
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज में काफी प्रगति हुई है। आधुनिक दवाओं, बेहतर कीमोथेरेपी और नई उपचार पद्धतियों की मदद से इविंग सारकोमा जैसे जटिल कैंसर का भी सफल इलाज संभव हो रहा है। इसलिए बीमारी के लक्षण दिखने पर डरने के बजाय जल्द जांच और इलाज शुरू करना सबसे जरूरी कदम है।
डॉक्टरों की अपील
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि यदि बच्चों या किशोरों में लंबे समय तक हड्डी का दर्द, सूजन या गांठ जैसी समस्या बनी रहे तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। शुरुआती जांच और सही समय पर इलाज कई मरीजों की जान बचा सकता है। यह मामला भी इस बात की बड़ी मिसाल है कि जागरूकता, समय पर पहचान और नियमित उपचार से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हराया जा सकता है।
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