By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 09:45 AM
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन से जुड़े कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके के परिवार ने राहत की सांस ली है। अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके ने आंदोलन के दौरान परिवार की बेचैनी और बेटे से हुई बातचीत को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कई बार अभिजीत से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन बेटे ने उन्हें बार-बार फोन करने से मना कर दिया था। भगवानराव के मुताबिक, अभिजीत ने उनसे कहा था कि अब वह सिर्फ उनका बेटा नहीं है, बल्कि पूरे देश का बेटा है।
भगवानराव दीपके ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि आंदोलन के दौरान उनका पूरा परिवार लगातार तनाव में था। खासकर 20 जुलाई के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई थी। उन्होंने बताया कि एक समय उनके मन में आया कि वह खुद दिल्ली जाकर अभिजीत को वापस घर ले आएं, लेकिन अभिजीत ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उसने साफ तौर पर कहा कि वह बार-बार फोन न करें और उसे अपना काम करने दें।
बेटे की एक बात ने पिता को कर दिया भावुक
भगवानराव के अनुसार, अभिजीत ने बातचीत के दौरान उनसे कहा था कि वह अब सिर्फ उनके परिवार का हिस्सा नहीं है। उसके साथ बड़ी संख्या में छात्र और युवा जुड़े हैं और वह खुद को उनकी आवाज मानकर आंदोलन कर रहा है। बेटे की इस बात ने परिवार की चिंता को और गहरा कर दिया, क्योंकि उन्हें लगातार डर था कि आंदोलन के दौरान उसके साथ कुछ अनहोनी न हो जाए।
‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सही समय पर हुआ’
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत के पिता ने इसे सही और जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ उनके माता-पिता और परिवार के लोगों में भी गुस्सा बढ़ रहा था। उनके मुताबिक, शुरुआत में विरोध प्रदर्शन एक जगह तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर दूसरे हिस्सों में भी दिखाई देने लगा। ऐसे में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा तनाव को कम करने वाला फैसला साबित हुआ।
‘बच्चों और उनके माता-पिता में बहुत गुस्सा था’
भगवानराव ने कहा कि जिन छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन चल रहा था, उनमें काफी नाराजगी थी। उनके माता-पिता और रिश्तेदार भी इस पूरे घटनाक्रम से परेशान थे। उनका मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रहती तो आंदोलन किस दिशा में जाता, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल था। इसलिए उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बढ़ते तनाव को रोकने वाला फैसला बताया।
परिवार कई हफ्तों तक डर के माहौल में रहा
अभिजीत दीपके के आंदोलन को लेकर उनके परिवार की चिंता केवल फोन पर बातचीत तक सीमित नहीं थी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके माता-पिता ने आंदोलन के दौरान कई दिनों तक डर और तनाव में रहने की बात कही है। परिवार को अभिजीत की सुरक्षा की चिंता सताती रही। उनकी मां अनीता दीपके ने भी आंदोलन के दौरान लगातार बेचैनी और रातों की नींद उड़ जाने का जिक्र किया था।
‘अब हमारा इंतजार सिर्फ बेटे के घर लौटने का है’
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि आंदोलन का एक बड़ा पड़ाव पूरा हो गया। अभिजीत की मां ने भी कहा कि अब वह चाहती हैं कि उनका बेटा जल्द घर लौटे। परिवार ने आंदोलन के दौरान जिस तनाव और चिंता का सामना किया, उसके बाद अब उनकी निगाहें अभिजीत की वापसी पर टिकी हैं।
इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जोशी पहले से ही केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामलों से जुड़े मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है और अब इस पूरे घटनाक्रम के बीच छात्रों की मांगों तथा परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
आंदोलन से जुड़े कई सवाल अब भी बाकी
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन के लिए एक बड़ा घटनाक्रम जरूर है, लेकिन आंदोलन से जुड़े दूसरे मुद्दे अभी भी चर्चा में हैं। अभिजीत दीपके ने इस्तीफे के बाद भी छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों को उठाने की बात कही है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार छात्रों की बाकी मांगों पर क्या कदम उठाती है और आंदोलन से जुड़े लोगों की अगली रणनीति क्या होती है।
पिता ने बेटे के अगले कदम पर भी दिया संकेत
भगवानराव दीपके ने अपने बेटे के भविष्य को लेकर भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि अभिजीत आगे क्या कदम उठाएगा। उन्होंने बताया कि अभिजीत राजनीति को करीब से देख चुका है, लेकिन वह खुद राजनीति को पसंद नहीं करते। हालांकि, बेटे के फैसलों को लेकर उनकी अपनी राय भले अलग हो, लेकिन वह उसके साथ खड़े रहेंगे।
अब परिवार को है अभिजीत के घर लौटने का इंतजार
कई दिनों तक चले आंदोलन, लगातार बढ़ती चिंता और बेटे की सुरक्षा को लेकर परेशान रहे परिवार के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़े मोड़ के रूप में सामने आया है। भगवानराव दीपके की बातों से साफ है कि आंदोलन के दौरान एक तरफ उनका बेटा छात्रों की आवाज उठाने में जुटा था, तो दूसरी तरफ परिवार हर पल उसकी सुरक्षा को लेकर डरा हुआ था। अब जब आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा पूरा हो चुका है, परिवार की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि अभिजीत सुरक्षित घर लौटे और अपनों के बीच समय बिताए।
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