By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 11:24 PM
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां भले ही अलग-अलग विचारधारा और झंडे के साथ राजनीति करती हों, लेकिन असहमति जताने वालों और विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सोशल मीडिया पर एक जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश को सिर्फ सरकार बदलने की नहीं, बल्कि राजनीति करने का तरीका बदलने की जरूरत है।
गीतांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब उनके पति सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब भाजपा से जुड़े सोशल मीडिया समर्थकों की ओर से उनके परिवार को लेकर कई तरह के आरोप लगाए गए। उन्होंने दावा किया कि उस समय उन्हें देशद्रोही, चीनी एजेंट और विदेशी फंडिंग लेने वाला तक कहा गया।
कांग्रेस के विरोध के बाद बदले आरोप
आंगमो ने कहा कि अब जब उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए और उसे दिखावटी बताया, तो कांग्रेस समर्थक ट्रोल उन्हें संघ से जुड़ा हुआ और भाजपा का समर्थक बताने लगे। उनके मुताबिक, दोनों मामलों में आरोप लगाने वालों की राजनीतिक पहचान भले अलग हो, लेकिन असहमति की आवाज को दबाने का तरीका एक जैसा है।
‘झंडे अलग हैं, लेकिन तरीका वही है’
गीतांजलि आंगमो ने अपनी पोस्ट में देश की मौजूदा राजनीतिक संस्कृति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि भारत की राजनीति में विरोधी विचार रखने वालों को सुनने और उनसे बातचीत करने के बजाय उन्हें अपमानित करने और किसी खेमे से जोड़ देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि देश को केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित राजनीति की जरूरत नहीं है। राजनीतिक व्यवस्था में ऐसा बदलाव होना चाहिए, जिसमें असहमति को दुश्मनी न माना जाए और अलग राय रखने वाले व्यक्ति को तुरंत किसी राजनीतिक खेमे का हिस्सा न बताया जाए।
देशभक्ति को पार्टी से जोड़ने पर भी सवाल
आंगमो ने अपनी बात रखते हुए कहा कि देशभक्ति का पैमाना किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से तय नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, राजनीति में पार्टी से जुड़े होने के बजाय सच्चाई और ईमानदारी को ज्यादा महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने गुटबाजी की राजनीति के बजाय देश और जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
राहुल गांधी के प्रदर्शन पर पहले उठाए थे सवाल
गीतांजलि आंगमो की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वह इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठा चुकी हैं। कांग्रेस की ओर से यह प्रदर्शन 21 जुलाई को किया गया था। आंगमो ने इस प्रदर्शन को लेकर कहा था कि अगर कांग्रेस वास्तव में लद्दाख और देश से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर है, तो उसे उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए जो लंबे समय से इन सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को बताया था बेहतर विकल्प
एक साक्षात्कार के दौरान आंगमो ने कहा था कि कांग्रेस को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बजाय जंतर-मंतर पर दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर अपनी आवाज उठानी चाहिए थी। उनका कहना था कि किसी मुद्दे पर राजनीति करने से ज्यादा जरूरी है कि उस मुद्दे को लेकर ईमानदार तरीके से जनता के बीच आवाज उठाई जाए।
‘देश की जनता को अब मूर्ख नहीं बनाया जा सकता’
सोनम वांगचुक की पत्नी ने अपने साक्षात्कार में यह भी कहा था कि देश की जनता अब पहले की तरह आसानी से गुमराह नहीं की जा सकती। उन्होंने भारत को जागरूक देश बताते हुए कहा था कि लोग अब अपने हित और नुकसान को समझने की क्षमता रखते हैं। उनके इस बयान को कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर उनकी स्पष्ट असहमति के तौर पर देखा गया।
पहले तारीफ, फिर निशाने पर आने का दावा
आंगमो के मुताबिक, उनके कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी का रुख बदल गया। उनका कहना है कि जिस परिवार को पहले कांग्रेस के नेताओं की ओर से देशभक्त और संघर्ष करने वाला बताया जा रहा था, वही परिवार बाद में सोशल मीडिया पर कांग्रेस समर्थकों के निशाने पर आ गया।
राजनीतिक पहचान थोपने की संस्कृति पर आपत्ति
गीतांजलि आंगमो ने इसी पूरे घटनाक्रम को आधार बनाकर भाजपा और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति किसी एक पार्टी की आलोचना करता है, तो उसे दूसरी पार्टी का समर्थक मान लेना अब राजनीति का सामान्य तरीका बनता जा रहा है। उन्होंने इस रवैये को लोकतांत्रिक बहस के लिए नुकसानदेह बताया।
असहमति को दुश्मनी मानने की राजनीति पर सवाल
आंगमो की पोस्ट का सबसे अहम संदेश यही है कि राजनीतिक दलों को असहमति की आवाज सुनने की आदत विकसित करनी चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में किसी व्यक्ति की बात से सहमत न होना अलग बात है, लेकिन उसके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करना या उसे किसी राजनीतिक दल से जोड़कर खारिज कर देना स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति नहीं है।
सोनम वांगचुक के आंदोलन के बाद चर्चा में रहा है परिवार
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उनके आंदोलनों और बयानों के कारण वह लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो के बयान भी अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन रहे हैं। खास तौर पर तब, जब उन्होंने किसी एक दल के बजाय देश की दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
आंगमो के बयान से बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
गीतांजलि आंगमो की ताजा पोस्ट को सिर्फ भाजपा या कांग्रेस की आलोचना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने जिस तरह दोनों दलों को एक ही तरह की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बताया है, उससे देश में असहमति, सोशल मीडिया ट्रोलिंग और राजनीतिक ध्रुवीकरण को लेकर नई बहस छिड़ सकती है। उनका जोर इस बात पर है कि राजनीति में विरोधी विचारों को दबाने के बजाय उनसे संवाद किया जाना चाहिए।
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