By Malay Ojha | Published: 15 September 2026 at 06:19 PM
देश में इस बार कमजोर मॉनसून का असर अब मौसम से आगे खेती और महंगाई पर भी दिखाई देने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी शुरू हो सकती है। वहीं 1 जून से 13 सितंबर तक देश में बारिश सामान्य से करीब 15 फीसदी कम रही। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में कमी 28 फीसदी और पूर्वी व उत्तर-पूर्वी भारत में 25 फीसदी रही।
इस साल मानसून ने केरल में 4 जून को दस्तक दी थी और सामान्य तारीख से तीन दिन देर से पहुंचा था। अब इसकी वापसी भी सामान्य तारीख से कुछ दिन बाद शुरू होने की संभावना है। IMD ने हालांकि साफ किया है कि वापसी से पहले देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
कमजोर बारिश का असर खरीफ फसलों पर
बारिश की कमी का असर खरीफ की बुआई पर भी पड़ा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 11 सितंबर तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुआई करीब 109.65 मिलियन हेक्टेयर रही, जो पिछले साल के 111.25 मिलियन हेक्टेयर से 1.44 फीसदी कम है। सबसे बड़ी खरीफ फसल धान की बुआई 42.68 मिलियन हेक्टेयर रही, जो पिछले साल के मुकाबले 3.82 फीसदी कम है।
धान की बुआई घटी, उत्पादन पर नजर
धान की बुआई में कमी का मतलब यह नहीं है कि उत्पादन निश्चित रूप से उतना ही घटेगा, क्योंकि पैदावार पर बारिश के साथ सिंचाई, मौसम और फसल की उत्पादकता का भी असर पड़ता है। लेकिन बुआई का घटा रकबा बाजार के लिए जरूर चिंता का संकेत है, खासकर तब जब आगे मौसम अनुकूल नहीं रहा तो उत्पादन और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
थोक महंगाई 9.92 फीसदी पहुंची
इस बीच महंगाई के मोर्चे पर भी दबाव बढ़ा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक अगस्त 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 9.78 फीसदी थी। अगस्त में फूड इंडेक्स की महंगाई 7.05 फीसदी रही, जो जुलाई के 6.65 फीसदी से ज्यादा है।
ईंधन की महंगाई ने बढ़ाई चिंता
WPI में सबसे तेज दबाव ईंधन और बिजली की कीमतों से आया। इस समूह की महंगाई जुलाई के 20.05 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 22.93 फीसदी हो गई। खनिज तेल, खाद्य सामग्री, खाद्य उत्पादों का निर्माण, बेसिक मेटल और रसायन जैसे क्षेत्र भी अगस्त में थोक कीमतों को ऊपर खींचने वाले प्रमुख कारण रहे।
महंगे क्रूड से आगे बढ़ सकता है दबाव
महंगाई की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 107.66 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 11 सितंबर को यह 119.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। पश्चिम एशिया की अनिश्चितता और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर आने वाले समय में लागत और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।
El Nino ने बढ़ाई मौसम की चिंता
मौसम के मोर्चे पर एक और बड़ी चिंता मजबूत होता El Nino है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक El Nino अब मजबूती से स्थापित हो चुका है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है। WMO के पूर्वानुमान में फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना करीब 100 फीसदी बताई गई है। हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि El Nino की तीव्रता का असर हर देश और क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता।
आगे मौसम और महंगाई दोनों पर नजर
यानी आने वाले महीनों में भारत के लिए दो मोर्चे अहम रहने वाले हैं। एक तरफ कमजोर मॉनसून और खरीफ फसलों की स्थिति पर नजर रहेगी, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल और खाद्य कीमतों का दबाव महंगाई की दिशा तय करेगा। अगर El Nino के कारण मौसम का असंतुलन और पश्चिम एशिया में तेल बाजार की अनिश्चितता बनी रहती है, तो खाद्य और ईंधन महंगाई पर दबाव कम करना आसान नहीं होगा।
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