By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 11:14 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन से जुड़े एक वीडियो को सोशल मीडिया मंच मेटा ने भारत में कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया। वीडियो पर कार्रवाई के बाद जब इसे देखने की कोशिश की गई तो कानूनी अनुरोध का हवाला दिया गया। मामला सामने आने के बाद मेटा ने एबीपी न्यूज को बताया कि प्रधानमंत्री का वीडियो गलती से हट गया था और अब उसे बहाल कर दिया गया है। इस सफाई के बाद कंपनी के फैसले को लेकर उठे सवालों का रुख भी बदल गया।
मामला उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए साझा किए गए वीडियो को भारत में देखने पर रोक दिखाई दी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, देर रात करीब 1 बजकर 25 मिनट पर वीडियो के साथ दिए गए कारण को देखने पर कानूनी अनुरोध के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर प्रधानमंत्री का संदेश सोशल मीडिया मंच पर भारत में क्यों प्रतिबंधित किया गया।
मामला तूल पकड़ने लगा तो मेटा की ओर से सफाई दी गई। कंपनी ने एबीपी न्यूज को भेजे जवाब में कहा कि वीडियो को गलती से हटा दिया गया था। मेटा के मुताबिक, इस गलती को ठीक कर दिया गया और वीडियो को फिर से उपलब्ध करा दिया गया। यानी शुरुआती कार्रवाई के पीछे किसी स्थायी प्रतिबंध की बात नहीं थी, बल्कि कंपनी ने इसे तकनीकी या प्रक्रियागत गलती के तौर पर पेश किया।
कानूनी अनुरोध दिखने से उठे सवाल
वीडियो के साथ कानूनी अनुरोध का उल्लेख दिखाई देने के कारण मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया था। आम तौर पर सोशल मीडिया मंचों पर किसी सामग्री को कानूनी मांग के आधार पर प्रतिबंधित किए जाने की सूचना तब दिखाई जाती है, जब किसी सरकारी या कानूनी प्रक्रिया के तहत सामग्री पर कार्रवाई की जाती है। ऐसे में प्रधानमंत्री के वीडियो पर इसी तरह का संदेश दिखना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, बाद में मेटा की सफाई ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वीडियो को गलती से हटाया गया था और बाद में उसे बहाल कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया मंचों पर राजनीतिक और सार्वजनिक महत्व वाले वीडियो की निगरानी तथा सामग्री पर होने वाली कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच आया था वीडियो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश ऐसे समय सामने आया था, जब पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का प्रदर्शन चर्चा में था। जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री ने युवाओं और परीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार ने पेपर लीक के मामलों को गंभीरता से लिया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
प्रधानमंत्री के संदेश का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया। छात्रों के प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार की ओर से लगातार परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे पर अपना पक्ष रखा जा रहा था। प्रधानमंत्री ने युवाओं को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए सरकार कदम उठा रही है।
संसद मार्च के दौरान भी बढ़ा था तनाव
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में छात्रों का संसद मार्च भी महत्वपूर्ण रहा। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी और बल प्रयोग की खबरें सामने आईं। बाद में जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया।
प्रदर्शन के दौरान पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवाल लगातार उठते रहे। विपक्ष ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाया और शिक्षा मंत्री की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए। दूसरी ओर, सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की बात कही।
पीएम मोदी ने पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा था कि पेपर लीक कोई छोटा मुद्दा नहीं है और इससे लाखों छात्रों तथा उनके परिवारों को परेशानी होती है। उन्होंने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने सख्त कानून और तेज सुनवाई की व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही।
सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कानून में कड़े प्रावधान लाने और विशेष अदालतों के जरिए मामलों की तेजी से सुनवाई कराने की बात सामने आई। सरकार का तर्क रहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कार्यबल
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने की घोषणा की। उन्होंने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों के लिए उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल बनाए जाने की जानकारी दी। इस कार्यबल का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब केवल मौजूदा मामलों पर कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है। इसी सोच के तहत गठित कार्यबल परीक्षा सुधारों पर काम करेगा और उसकी सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली को ज्यादा विश्वसनीय बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी कार्यबल के गठन की पुष्टि की गई है।
वीडियो संदेशों के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री की ओर से वीडियो संदेश जारी करने का तरीका भी चर्चा में रहा। पहला संदेश सेल्फी कैमरे से रिकॉर्ड किया गया था और इसमें सीधे युवाओं को संबोधित करने की शैली अपनाई गई। बाद के संदेश में प्रधानमंत्री ने युवाओं से मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं का भी जिक्र किया। इससे साफ था कि सरकार परीक्षा और पेपर लीक के मुद्दे पर सीधे छात्रों तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही थी।
इस बीच, प्रधानमंत्री के वीडियो को मेटा की ओर से भारत में कुछ समय के लिए प्रतिबंधित किए जाने और फिर गलती मानकर बहाल किए जाने की घटना ने अलग चर्चा शुरू कर दी। खासकर इसलिए क्योंकि वीडियो ऐसे समय आया था, जब छात्र प्रदर्शन और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज थी।
मेटा के फैसले ने बढ़ाई सोशल मीडिया कार्रवाई पर बहस
मेटा की ओर से वीडियो हटाए जाने को गलती बताकर बहाल किए जाने के बाद फिलहाल विवाद का तत्काल समाधान हो गया है। लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि सोशल मीडिया मंचों पर राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री पर कार्रवाई किस प्रक्रिया के तहत होती है और ऐसी कार्रवाई के पीछे किस तरह की समीक्षा व्यवस्था काम करती है।
जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया मंचों की भूमिका पहले से ही चर्चा में रही है। दिल्ली पुलिस ने भी प्रदर्शन के दौरान कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो पर सोशल मीडिया मंचों से कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम की ओर से कई सामग्री की पहचान किए जाने और कुछ खातों को लेकर कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
फिलहाल प्रधानमंत्री के वीडियो पर मेटा की ओर से दी गई सफाई यही है कि उसे गलती से हटाया गया था और बाद में बहाल कर दिया गया। दूसरी तरफ, परीक्षा सुधार को लेकर सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून, तेज सुनवाई और नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के जरिए लंबी अवधि की व्यवस्था बदलने का संकेत दिया है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि परीक्षा सुधारों को लेकर सरकार की घोषणाएं जमीन पर कितनी जल्दी लागू होती हैं और छात्रों की चिंताओं का समाधान किस तरह किया जाता है।
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