By Malay Ojha | Published: 29 July 2026 at 02:51 PM
सावन का महीना शुरू होते ही भगवान शिव के मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। इस पूरे महीने शिवलिंग पर जल चढ़ाने और अभिषेक करने की परंपरा है। मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने और शिवलिंग का अभिषेक करने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है। कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है।
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर जल, गंगाजल और बेलपत्र चढ़ाते हैं। कई भक्त पूरे महीने नियमित रूप से अभिषेक करते हैं, जबकि कुछ लोग सोमवार को विशेष पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की भक्ति करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
सुबह पूजा करना शुभ, लेकिन शाम को भी कर सकते हैं अभिषेक
शिवलिंग की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है। हालांकि, नौकरी, कारोबार या दूसरे जरूरी कामों के कारण यदि सुबह पूजा करना संभव न हो तो शाम के समय भी भगवान शिव का अभिषेक किया जा सकता है। पूजा के दौरान सबसे जरूरी बात श्रद्धा और साफ मन से भगवान शिव का स्मरण करना है।
सबसे पहले जल और गंगाजल से करें अभिषेक
शिवलिंग की पूजा शुरू करने से पहले पूजा की जगह को साफ कर लें। इसके बाद तांबे के पात्र से शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। यदि आप चाहें तो इसके बाद पंचामृत से भी अभिषेक कर सकते हैं। पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर भक्त पंचामृत से ही अभिषेक करे। केवल साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करना भी पूरी श्रद्धा के साथ किया जा सकता है।
दूध या पंचामृत के बाद जल जरूर चढ़ाएं
यदि आप शिवलिंग पर दूध, दही या पंचामृत अर्पित करते हैं तो उसके बाद दोबारा साफ जल चढ़ाना चाहिए। धार्मिक पूजा पद्धति में अभिषेक के बाद जल अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। अभिषेक के दौरान भक्त भगवान शिव का ध्यान करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जाता है।
पंचामृत के अलावा इन चीजों से भी कर सकते हैं अभिषेक
शिवलिंग के अभिषेक के लिए जल और गंगाजल के अलावा दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और गन्ने के रस का भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, पूजा में सभी सामग्री का होना जरूरी नहीं है। यदि आपके पास केवल जल उपलब्ध है तो आप उसी से भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं। पूजा का उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति माना जाता है।
बेलपत्र को पूजा में माना जाता है बेहद खास
अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित किया जाता है। इसके साथ धतूरा, भांग के पत्ते, शमी के पत्ते और आंकड़े के फूल भी चढ़ाने की परंपरा है। सफेद चंदन, भस्म और अक्षत भी पूजा में इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके अलावा भगवान शिव को धूप, दीप और फल या मिठाई का भोग लगाया जा सकता है।
सारी सामग्री न हो तो केवल बेलपत्र चढ़ाएं
कई बार पूजा के लिए बताई गई सभी सामग्री भक्तों के पास उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार केवल जल और बेलपत्र अर्पित करके भी भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को सरल पूजा से प्रसन्न होने वाला देवता माना गया है। इसलिए पूजा में सामग्री से ज्यादा महत्व श्रद्धा और भावना का माना जाता है।
घर पर शिवलिंग की पूजा करते समय रखें ध्यान
यदि आप घर में स्थापित शिवलिंग की पूजा कर रहे हैं तो अभिषेक के बाद उसे साफ कपड़े से हल्के हाथों से पोंछ सकते हैं। इसके बाद सफेद चंदन और भस्म से त्रिपुंड लगाने की परंपरा है। फिर अक्षत अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आंकड़े के फूल चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान शिव को भोग लगाएं।
पूजा के अंत में करें आरती और मांगें क्षमा
पूजा की सभी विधियां पूरी करने के बाद भगवान शिव की आरती करें। इस दौरान मन को शांत रखकर भगवान शिव का ध्यान करें। पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल के लिए महादेव से क्षमा मांगने की परंपरा है। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और भक्ति भगवान शिव को प्रिय होती है।
शिवलिंग पर दूध चढ़ाते समय न करें यह गलती
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर दूध चढ़ाते समय तांबे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दूध के अभिषेक के लिए दूसरे साफ पात्र का उपयोग किया जा सकता है। वहीं, शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और कुमकुम चढ़ाने की परंपरा नहीं मानी जाती है। इसलिए सावन में पूजा करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
शिवलिंग की पूजा से जुड़ी मान्यताओं में तुलसी के पत्ते अर्पित करने की मनाही बताई जाती है। इसलिए भगवान शिव की पूजा करते समय तुलसी की जगह बेलपत्र का इस्तेमाल करना अधिक प्रचलित है। यदि बेलपत्र उपलब्ध न हो तो केवल जल चढ़ाकर भी पूजा की जा सकती है।
शिवलिंग की पूरी परिक्रमा क्यों नहीं की जाती?
शिवलिंग की परिक्रमा को लेकर भी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। आमतौर पर शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती, बल्कि आधी परिक्रमा करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, जिस स्थान से शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल बाहर निकलता है, उसे लांघना नहीं चाहिए। इसी वजह से भक्त उस स्थान को पार किए बिना आधी परिक्रमा करते हैं।
सावन में पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
सावन में भगवान शिव की पूजा करते समय सबसे जरूरी है कि पूजा श्रद्धा और नियम के साथ की जाए। जल, गंगाजल, बेलपत्र और अपनी क्षमता के अनुसार अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो तो केवल जल और बेलपत्र से भी पूजा की जा सकती है। वहीं, दूध या पंचामृत से अभिषेक करने के बाद जल चढ़ाना, हल्दी-सिंदूर से बचना और शिवलिंग की परिक्रमा से जुड़ी मान्यताओं का ध्यान रखना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक का विशेष महत्व है। इस दौरान भक्त मंदिर में जाकर या घर पर शिवलिंग का पूजन कर सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु अपने गुरु या आचार्य की सलाह के अनुसार पूजा कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवान शिव की पूजा श्रद्धा, विश्वास और साफ मन से की जाए।
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