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पेपर लीक विधेयक पर पीएम मोदी के वीडियो को लेकर अभिजीत दीपके का तंज, बोले- ‘आपकी त्वचा…’

By Malay Ojha | Published: 31 July 2026 at 09:42 AM

राज्यसभा से एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर तंज कस दिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “आपकी त्वचा देश के भविष्य से ज्यादा चमकदार है.” दीपके की इस टिप्पणी ने अब इस पूरे मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है।

विधेयक के संसद से पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले गिरोहों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी और किसी भी कीमत पर ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक और कड़े कानूनों के सहारे परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम जारी रहेगा।

अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री पर कसा तंज
विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री की ओर से जारी वीडियो संदेश पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए लिखा, “आपकी त्वचा देश के भविष्य से ज्यादा चमकदार है.” दीपके की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी।

सरकार ने एनटीए पर उठे सवालों का दिया जवाब
राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने परीक्षा में पेपर लीक को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश में सामने आए पेपर लीक के ज्यादातर मामले राज्य स्तर की भर्ती और परीक्षा एजेंसियों से जुड़े रहे हैं। उनके मुताबिक, अधिकांश मामलों में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की भूमिका नहीं रही है।

परीक्षा व्यवस्था सुधारने का दावा
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का तर्क है कि कड़े दंड के साथ-साथ तेज जांच और जल्द सुनवाई की व्यवस्था से पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर दबाव बढ़ेगा। विधेयक को सरकार ने परीक्षा में अनुचित तरीकों के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति का हिस्सा बताया है।

2024 के कानून को और मजबूत करेगा संशोधन
नया विधेयक वर्ष 2024 में बनाए गए सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित तरीकों की रोकथाम से जुड़े कानून में बदलाव करता है। मौजूदा कानून में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित तरीकों से जुड़े अपराधों के लिए सजा का प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन अब सरकार ने दंड को और कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है। व्यक्तिगत स्तर पर पेपर लीक जैसे अपराधों में सजा की अवधि बढ़ाकर पांच से दस साल तक किए जाने और जुर्माना बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक करने का प्रावधान प्रस्तावित है।

विपक्ष का सवाल- सिर्फ सजा बढ़ाने से कैसे रुकेगा पेपर लीक?
हालांकि सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष ने कानून की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि केवल सजा बढ़ा देने से पेपर लीक की समस्या खत्म नहीं होगी। परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर भी ठोस सुधार की जरूरत है। हाल के संसद सत्र में पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली है।

छात्रों के आंदोलन के बीच आया संशोधन
यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच लगातार नाराजगी देखने को मिली है। हालिया पेपर लीक विवादों और छात्रों के आंदोलनों ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार की ओर से पहले ही पेपर लीक मामलों में तेजी से कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक अदालतों की दिशा में कदम उठाने की बात कही जा चुकी है।

अब कानून बनने की अगली प्रक्रिया क्या है?
लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मंजूरी मिलने के बाद अब संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के पास जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी और उसके बाद जरूरी अधिसूचना जारी होने पर इसके प्रावधान लागू होंगे। इसके बाद पेपर लीक, संगठित परीक्षा धांधली और अन्य अनुचित तरीकों से जुड़े मामलों में पहले के मुकाबले ज्यादा कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि, कानून कितना असरदार साबित होगा, यह उसकी जमीन पर होने वाली कार्रवाई, जांच की गति और दोषियों को समय पर सजा मिलने पर निर्भर करेगा।

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पेपर लीक विधेयक पर पीएम मोदी के वीडियो को लेकर अभिजीत दीपके का तंज, बोले- ‘आपकी त्वचा…’

By Malay Ojha | Published: 31 July 2026 at 09:42 AM

राज्यसभा से एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर तंज कस दिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “आपकी त्वचा देश के भविष्य से ज्यादा चमकदार है.” दीपके की इस टिप्पणी ने अब इस पूरे मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है।

विधेयक के संसद से पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले गिरोहों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी और किसी भी कीमत पर ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक और कड़े कानूनों के सहारे परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम जारी रहेगा।

अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री पर कसा तंज
विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री की ओर से जारी वीडियो संदेश पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए लिखा, “आपकी त्वचा देश के भविष्य से ज्यादा चमकदार है.” दीपके की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी।

सरकार ने एनटीए पर उठे सवालों का दिया जवाब
राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने परीक्षा में पेपर लीक को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश में सामने आए पेपर लीक के ज्यादातर मामले राज्य स्तर की भर्ती और परीक्षा एजेंसियों से जुड़े रहे हैं। उनके मुताबिक, अधिकांश मामलों में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की भूमिका नहीं रही है।

परीक्षा व्यवस्था सुधारने का दावा
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का तर्क है कि कड़े दंड के साथ-साथ तेज जांच और जल्द सुनवाई की व्यवस्था से पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर दबाव बढ़ेगा। विधेयक को सरकार ने परीक्षा में अनुचित तरीकों के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति का हिस्सा बताया है।

2024 के कानून को और मजबूत करेगा संशोधन
नया विधेयक वर्ष 2024 में बनाए गए सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित तरीकों की रोकथाम से जुड़े कानून में बदलाव करता है। मौजूदा कानून में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित तरीकों से जुड़े अपराधों के लिए सजा का प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन अब सरकार ने दंड को और कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है। व्यक्तिगत स्तर पर पेपर लीक जैसे अपराधों में सजा की अवधि बढ़ाकर पांच से दस साल तक किए जाने और जुर्माना बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक करने का प्रावधान प्रस्तावित है।

विपक्ष का सवाल- सिर्फ सजा बढ़ाने से कैसे रुकेगा पेपर लीक?
हालांकि सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष ने कानून की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि केवल सजा बढ़ा देने से पेपर लीक की समस्या खत्म नहीं होगी। परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर भी ठोस सुधार की जरूरत है। हाल के संसद सत्र में पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली है।

छात्रों के आंदोलन के बीच आया संशोधन
यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच लगातार नाराजगी देखने को मिली है। हालिया पेपर लीक विवादों और छात्रों के आंदोलनों ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार की ओर से पहले ही पेपर लीक मामलों में तेजी से कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक अदालतों की दिशा में कदम उठाने की बात कही जा चुकी है।

अब कानून बनने की अगली प्रक्रिया क्या है?
लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मंजूरी मिलने के बाद अब संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के पास जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी और उसके बाद जरूरी अधिसूचना जारी होने पर इसके प्रावधान लागू होंगे। इसके बाद पेपर लीक, संगठित परीक्षा धांधली और अन्य अनुचित तरीकों से जुड़े मामलों में पहले के मुकाबले ज्यादा कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि, कानून कितना असरदार साबित होगा, यह उसकी जमीन पर होने वाली कार्रवाई, जांच की गति और दोषियों को समय पर सजा मिलने पर निर्भर करेगा।

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