By aryavartalive | Published: 02 August 2026 at 04:20 PM
पटना, 2 अगस्त : सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आ जाने का मतलब यह नहीं है कि सरकार या उसके प्रतिनिधियों को मनमानी करने का अधिकार मिल गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है और छात्र-युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
छात्र-युवाओं को कभी चीन-पाकिस्तान तो कभी विपक्ष से जोड़ने का आरोप
धनंजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया कि सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने आंदोलनकारी छात्र-युवाओं को पहले चीन और पाकिस्तान से जुड़ा हुआ बताने की कोशिश की। इसके बाद कभी उन्हें कांग्रेस तो कभी आम आदमी पार्टी की कथित साजिश का हिस्सा बताया गया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-युवाओं के बीच सफेदपोश गुंडों को भेजकर हिंसा भड़काई गई और फिर उसी हिंसा को आधार बनाकर हजारों युवाओं पर लाठीचार्ज, गोलीबारी और पुलिस कार्रवाई की गई।
आंदोलनकारियों को डराने के लिए मुकदमे और पुलिस कार्रवाई का लगाया आरोप
सोशलिस्ट नेता ने कहा कि छात्र-युवाओं को डराने के लिए उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और पुलिस कार्रवाई का सहारा लिया गया। उनका आरोप है कि सरकार की कोशिश थी कि दमन और दबाव के जरिए आंदोलनकारी पीछे हट जाएं, लेकिन छात्र-युवा अपने सवालों और मांगों से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से सरकार पर लोकतांत्रिक दबाव बढ़ने लगा।
‘फ्रेंड्स’ कहकर माफी और भावनात्मक अपील पर भी उठाए सवाल
धनंजय सिन्हा ने कहा कि जब सरकार के दबाव के बावजूद छात्र-युवा झुकने को तैयार नहीं हुए, तब प्रधानमंत्री ने उन्हें “फ्रेंड्स” कहकर माफी मांगने और भावनात्मक अपील करने का रास्ता अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की अपीलों के जरिए आंदोलनकारी छात्र-युवाओं को इस तरह पेश करने की कोशिश की गई, जैसे गलती उन्हीं की हो।
मजबूत नेतृत्व के दावे पर धनंजय सिन्हा का सीधा सवाल
उन्होंने अजीत डोभाल के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के रूप में मजबूत नेतृत्व मिला है। धनंजय कुमार सिन्हा ने सवाल किया कि यदि देश में नेतृत्व इतना मजबूत है, तो फिर देश को एक साथ आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
सरकार से सवाल पूछना लोकतंत्र और राष्ट्रहित दोनों के लिए जरूरी
धनंजय सिन्हा ने कहा कि जब सरकार और उसके प्रतिनिधि अपने ही नागरिकों और छात्र-युवाओं को विदेशी शक्तियों से जोड़कर देखने लगें, तब सरकार से सवाल पूछना और उसकी नीतियों पर चर्चा करना लोकतंत्र और राष्ट्रहित दोनों के लिए जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को अपनी बात रखने और सरकार से जवाब मांगने का पूरा अधिकार है।
तिलक के विचारों से प्रेरणा लेकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का दावा
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश के छात्र-युवा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर अन्याय और दमन के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का संकल्प ले रहे हैं। उन्होंने अजीत डोभाल से अपील की कि राष्ट्रहित के नाम पर छात्र-युवाओं को गुमराह करने या सरकार की गलत नीतियों और फैसलों का बचाव करने के बजाय उन्हें लोकतंत्र और वास्तविक राष्ट्रहित का अर्थ समझाने की कोशिश की जानी चाहिए।
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