By Malay Ojha | Published: 06 August 2026 at 05:55 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर हुए खर्च को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। अब केंद्र सरकार ने पहली बार संसद में वर्ष 2021 से 2026 (जुलाई तक) की सभी विदेश यात्राओं का विस्तृत ब्यौरा पेश कर दिया है। सरकार के मुताबिक इस अवधि में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर करीब 557 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि कुछ यात्राओं के अंतिम बिल अभी मिलने बाकी हैं, इसलिए कुल राशि में आगे बदलाव संभव है।
राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान विदेश राज्य मंत्री शाबिस्ता पबित्र मार्घेरिटा ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़ी पूरी जानकारी साझा की। इसमें हर वर्ष किन-किन देशों का दौरा किया गया, प्रत्येक यात्रा पर कितना खर्च आया और उन दौरों के दौरान हुए प्रमुख समझौतों की जानकारी भी दी गई।
2021 में चार देशों की यात्रा, खर्च 36 करोड़ रुपये से अधिक
सरकार के अनुसार वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश, अमेरिका, इटली और ब्रिटेन का दौरा किया। इन यात्राओं पर कुल करीब 36.12 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें सबसे अधिक खर्च सितंबर में हुई अमेरिका यात्रा पर आया, जिस पर लगभग 19.63 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
2022 में नौ देशों के दौरे, जर्मनी यात्रा सबसे महंगी
वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री ने जर्मनी, डेनमार्क, फ्रांस, नेपाल, जापान, उज्बेकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया समेत कई देशों की यात्रा की। इन दौरों पर कुल 55.83 करोड़ रुपये खर्च हुए। सबसे अधिक खर्च जून में हुई जर्मनी यात्रा पर दर्ज किया गया, जिसकी लागत करीब 14.47 करोड़ रुपये रही।
2023 में खर्च बढ़कर 93 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचा
साल 2023 में प्रधानमंत्री ने जापान, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी, अमेरिका, मिस्र, फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, यूनान और इंडोनेशिया सहित कई देशों का दौरा किया। इन यात्राओं पर कुल 93.63 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस वर्ष जून में हुई अमेरिका यात्रा सबसे महंगी रही, जिस पर करीब 22.89 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
2024 में रूस और अमेरिका यात्राएं रहीं चर्चा में
वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, भूटान, इटली, रूस, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, यूक्रेन, ब्रुनेई, सिंगापुर, अमेरिका, लाओस, नाइजीरिया, ब्राजील, गुयाना और कुवैत समेत कई देशों की यात्रा की। इन दौरों पर कुल 109.51 करोड़ रुपये खर्च हुए। रूस की दो यात्राओं पर मिलाकर 16 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आया, जबकि सितंबर में हुई अमेरिका यात्रा पर करीब 15.33 करोड़ रुपये खर्च हुए।
2025 में सबसे ज्यादा खर्च दर्ज
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के लिहाज से सबसे व्यस्त वर्ष रहा। इस दौरान उन्होंने फ्रांस, अमेरिका, मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, सऊदी अरब, कनाडा, ब्राजील, ब्रिटेन, मालदीव, चीन, जापान और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों का दौरा किया। इन यात्राओं पर कुल 187.83 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो पिछले पांच वर्षों में किसी एक वर्ष का सबसे अधिक खर्च है। अकेले फ्रांस यात्रा पर ही करीब 25.59 करोड़ रुपये खर्च हुए।
2026 में जुलाई तक 74 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च
वर्ष 2026 में जुलाई तक प्रधानमंत्री मलेशिया, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इटली, स्लोवाकिया, सेशेल्स, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा कर चुके हैं। इन दौरों पर अब तक 74.59 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ यात्राओं के भुगतान अभी बाकी हैं और जून 2026 की फ्रांस यात्रा का खर्च भी अंतिम आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
पुराने वर्षों का रिकॉर्ड भी संसद में रखा गया
सरकार ने पहले के वर्षों के कुछ यात्रा खर्चों का रिकॉर्ड भी साझा किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में अमेरिका यात्रा पर 10.74 करोड़ रुपये और फ्रांस यात्रा पर 8.33 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। वहीं वर्ष 2013 में रूस यात्रा पर 9.95 करोड़ रुपये तथा जर्मनी यात्रा पर 6.02 करोड़ रुपये खर्च दर्ज किया गया था। सरकार का कहना है कि ये वास्तविक खर्च हैं और इनमें महंगाई या विदेशी मुद्रा विनिमय दर का समायोजन शामिल नहीं है।
विदेश यात्राओं का उद्देश्य क्या बताया?
सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का मकसद केवल राजनयिक मुलाकातें नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है। संसद में बताया गया कि जुलाई 2021 से अब तक इन दौरों के दौरान कई देशों के साथ सैकड़ों समझौते हुए हैं। इनमें अंतरिक्ष, डिजिटल भुगतान, रक्षा, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि जैसे क्षेत्रों से जुड़े समझौते भी शामिल हैं।
निवेश के आंकड़े भी रखे गए
सरकार ने अपने जवाब में यह भी बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में 381.8 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। सरकार का कहना है कि विदेश यात्राओं ने निवेश आकर्षित करने और विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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