By Malay Ojha | Published: 06 August 2026 at 06:43 PM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़कर नई पार्टी में गए तीन सांसदों ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर दो अहम मुद्दे उठाए। सांसदों ने एक ओर लंबित एसआईआर मामलों के जल्द निपटारे की मांग की, वहीं धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर को अदालतों के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलने देने की बात कही। सांसदों का कहना था कि यदि मस्जिदों में नियमों के तहत लगे लाउडस्पीकर से अजान भी नहीं होगी तो इससे लोगों में गलत संदेश जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने वालों में अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान शामिल रहे। तीनों उन सांसदों में गिने जाते हैं जिन्होंने विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई का दामन थाम लिया था। यह दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का समर्थन कर रहा है। हालांकि अभी तक इन सांसदों को सदन में एनसीपीआई के सांसद के रूप में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
मुलाकात के बाद खलीलुर्रहमान ने बताया कि गृह मंत्री के सामने दो प्रमुख विषय रखे गए। पहला मुद्दा एसआईआर से जुड़े उन मामलों का था जो अभी भी न्यायाधिकरण में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से फैसले का इंतजार कर रहे लोगों को जल्द राहत मिलनी चाहिए ताकि उनकी प्रशासनिक और कानूनी परेशानियां समाप्त हो सकें।
लाउडस्पीकर को लेकर क्या कहा?
दूसरे मुद्दे के रूप में सांसदों ने धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर का विषय उठाया। उनका कहना था कि चाहे मंदिर हो, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च, यदि वहां लगाए गए लाउडस्पीकर उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं तो उन्हें बिना किसी बाधा के चलने दिया जाना चाहिए। सांसदों ने विशेष रूप से कहा कि मस्जिदों में नियमों के तहत अजान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर अनावश्यक रोक नहीं लगनी चाहिए।
गृह मंत्री को सौंपी लिखित मांग
तीनों सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री को एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा। इसमें कहा गया कि बड़ी संख्या में ऐसे वास्तविक मतदाता हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं और उनके मामले अब भी न्यायाधिकरण में लंबित हैं। फैसले में हो रही देरी की वजह से उन्हें कई सरकारी प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
किन परेशानियों का किया जिक्र?
ज्ञापन में कहा गया कि लंबित मामलों के कारण पासपोर्ट सत्यापन, जमीन के पंजीकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में लोगों को दिक्कत हो रही है। सांसदों ने आग्रह किया कि ऐसे मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाए ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।
क्या-क्या मांगें रखीं?
सांसदों ने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए अतिरिक्त न्यायाधिकरण पीठों का गठन किया जाए। साथ ही शिकायतों की निगरानी के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए और जब तक मामलों का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक प्रभावित नागरिकों को जरूरी सरकारी सेवाओं से वंचित न रखा जाए।
वापसी की अटकलों के बीच बढ़ी चर्चा
हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों से जीतकर आए ये तीनों सांसद मौजूदा राजनीतिक स्थिति से असहज हैं और तृणमूल कांग्रेस में लौट सकते हैं। हालांकि एनसीपीआई के नेताओं ने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया था। अब अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद एक बार फिर इन सांसदों की राजनीतिक भूमिका चर्चा का विषय बन गई है।
आगे क्या?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि गृह मंत्रालय इन मांगों पर क्या निर्णय लेगा। हालांकि सांसदों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल उन नागरिकों की समस्याओं का समाधान कराना है जिनके मामले लंबे समय से लंबित हैं। आने वाले दिनों में इस मुलाकात के राजनीतिक और प्रशासनिक असर पर सभी की नजर रहेगी।
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