By aryavartalive | Published: 06 August 2026 at 06:58 PM
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z और Gen Alpha छात्रों को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुंबई में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन देश के खिलाफ नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन भी संवाद का एक माध्यम है और जब लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तब विरोध अपनी बात रखने का वैध रास्ता बन जाता है।
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z और Gen Alpha पीढ़ी के छात्रों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सिर्फ आदेश नहीं, बल्कि अपने सवालों के जवाब चाहिए। अगर उनके साथ खुलकर संवाद किया जाए तो रिश्ते भी मजबूत होंगे और समाज भी आगे बढ़ेगा।
‘आंदोलन भी लोकतंत्र का हिस्सा है’
मोहन भागवत ने कहा कि आंदोलन को केवल विरोध के रूप में नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक, आंदोलन भी बातचीत का ही एक रूप है। अगर संवाद नहीं होगा तो केवल बहस रह जाएगी, लेकिन बातचीत से समाधान निकलता है। लोकतंत्र में आम सहमति बनाने के लिए संवाद और आंदोलन दोनों की अपनी भूमिका होती है।
‘जब बात नहीं सुनी जाती, तब लोग आंदोलन करते हैं’
RSS प्रमुख ने कहा कि कई बार लोगों की चिंताओं पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में आंदोलन अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का एक तरीका बन जाता है। उन्होंने कहा कि Gen Z की कई शिकायतें वाजिब हैं और उन्हें गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई
मोहन भागवत ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है। इसके लिए सरकार, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के बीच लगातार संवाद होना चाहिए, तभी बेहतर बदलाव संभव होगा।
Gen Z और पुरानी पीढ़ी का अंतर भी समझाया
भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ी अपने बड़ों की बात बिना ज्यादा सवाल किए मान लेती थी। लेकिन आज की Gen Z और Gen Alpha हर बात का कारण जानना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्वाभाविक है और इसका जवाब संवाद के जरिए ही दिया जा सकता है। लोकतंत्र भी इसी भावना पर चलता है।
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