By Malay Ojha | Published: 11 August 2026 at 09:38 PM
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा फैसला लिया है। विधानसभा में उन्होंने 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। इसके साथ ही टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं की जांच कराने की बात भी कही गई है। सरकार के इस फैसले को लगातार प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
मानसून सत्र के दौरान सदन में परीक्षा विवाद पर चर्चा के बीच हेमंत सोरेन ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाएगा। इसके साथ दो बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि टीडीपीएल के जरिए कराई गई परीक्षाओं की जांच कराई जाएगी। परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे अभ्यर्थियों के बीच सरकार की इस घोषणा को काफी अहम माना जा रहा है।
टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं की जांच का भी ऐलान
परीक्षा विवाद में केवल एक परीक्षा को लेकर सवाल नहीं उठ रहे थे। छात्रों की ओर से परीक्षा कराने की पूरी व्यवस्था और उसमें बरती गई कथित अनियमितताओं को लेकर भी लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से टीडीपीएल के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं की जांच की घोषणा सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अब यह देखना होगा कि जांच किस स्तर पर होती है और उसकी प्रक्रिया क्या रहती है।
छात्रों से मिले सुझावों का भी जिक्र
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया संदेश में परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शुरू किए गए ‘छात्रों की बात-छात्रों के साथ’ अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत झारखंड के 8,500 से अधिक युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अपने सुझाव दिए हैं। सरकार का कहना है कि युवाओं से मिले सुझावों को परीक्षा प्रणाली में जरूरी बदलाव के दौरान ध्यान में रखा जाएगा।
ओएमआर से लेकर परीक्षा कैलेंडर तक बदलाव की मांग
मुख्यमंत्री के मुताबिक युवाओं की ओर से परीक्षा व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों को लेकर सुझाव मिले हैं। इनमें ओएमआर की व्यवस्था, परीक्षा कैलेंडर, अंकपत्र, प्रश्नपत्र, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में संवैधानिक दायरे के भीतर जरूरी सुधार की बातें भी सामने आई हैं।
‘सिर्फ समस्या पर चर्चा नहीं, व्यवस्था बदलना मकसद’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल परीक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करना नहीं है। उनकी कोशिश ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने की है जो आज के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पारदर्शी, निष्पक्ष, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह हो। उन्होंने युवाओं से लगातार अपने सुझाव देने की अपील की और कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार सरकार के साथ युवाओं की भागीदारी से होना चाहिए।
कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं झारखंड के छात्र
दरअसल, झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पिछले कई दिनों से छात्रों का आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, प्रश्नपत्र लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा व्यवस्था में खामियों का आरोप लगा रहे हैं। छात्रों की मांग है कि जिन परीक्षाओं को लेकर सवाल उठे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
परीक्षा रद्द करने और जांच की मांग पर बढ़ा दबाव
आंदोलन कर रहे छात्र खास तौर पर 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही परीक्षा विवाद की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग भी उठाई जा रही थी। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का दौर भी चला, लेकिन कई मुद्दों पर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हुई थी। ऐसे माहौल में विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री की घोषणा को आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधानसभा में परीक्षा मुद्दे पर सियासी घमासान
परीक्षा विवाद को लेकर विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष लगातार छात्रों की मांगों और कथित परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर सरकार को घेरता रहा। वहीं मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। इससे सदन में माहौल कई बार गरमा गया। परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा अब सिर्फ छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह झारखंड की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
अब सरकार के अगले कदम पर नजर
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और दोनों बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की औपचारिक प्रक्रिया कब पूरी होती है। इसके साथ ही टीडीपीएल के जरिए कराई गई परीक्षाओं की जांच किस एजेंसी या व्यवस्था के तहत होगी, इस पर भी नजर रहेगी। सरकार की घोषणा ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों पर आगे बढ़ने का रास्ता जरूर खोल दिया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म होगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए परीक्षा व्यवस्था में भरोसा सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। बार-बार परीक्षा को लेकर विवाद सामने आने से अभ्यर्थियों के समय, मेहनत और भविष्य पर असर पड़ता है। ऐसे में सरकार की ओर से 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के साथ अगर जांच और परीक्षा सुधार की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ती है, तो इसका असर राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले आदेश और जांच की प्रक्रिया पर टिकी है।
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