By aryavartalive | Published: 12 August 2026 at 09:48 AM
पटना। देश की आजादी और विभाजन के 79 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि की ओर से 14 अगस्त को सभी सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों, उनसे संबद्ध कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाने की अपील पर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर हिन्दू-मुस्लिम एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ नहीं लड़े होते तो देश को आजादी मिलना मुश्किल होता।
इतिहास याद करें, लेकिन उसका उद्देश्य भी तय करें
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इतिहास के दुखद अध्यायों को याद करना जरूरी है, लेकिन यह भी देखना होगा कि उन्हें किस उद्देश्य से याद किया जा रहा है। क्या इतिहास को याद करने का मकसद भविष्य को बेहतर बनाना है या वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के मन में नफरत को बनाए रखना है।
हिन्दू-मुसलमानों ने साथ मिलकर लड़ी आजादी की लड़ाई
उन्होंने कहा कि कुछ लोग गुजरे समय के बुरे पलों को बार-बार याद कर वर्तमान और भविष्य को भी उसी नकारात्मकता से देखने की कोशिश करते हैं। जबकि इतिहास को समग्रता से देखें तो विभाजन की त्रासदी के साथ ऐसे अनगिनत उदाहरण भी मिलते हैं, जब हिन्दुओं और मुसलमानों ने एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ी और एक-दूसरे के सुख-दुःख में मजबूती से साथ खड़े रहे।
विभाजन को नफरत का आधार बनाना उचित नहीं
धनंजय सिन्हा ने कहा कि इतिहास को केवल एक पक्ष के दुःख और दूसरे पक्ष के प्रति नफरत के रूप में प्रस्तुत करना समाज को आगे ले जाने का रास्ता नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल किया कि अगर देश के अलग-अलग राज्यों के कुछ लोग कभी एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी या मारपीट कर दें, तो क्या इसके आधार पर दोनों राज्यों के सभी नागरिकों को हमेशा के लिए एक-दूसरे का विरोधी बना देना उचित होगा?
परिवार के बुरे अनुभव पूरी जिंदगी नहीं ढोए जाते
उन्होंने कहा कि यही स्थिति गांव और गांव, मोहल्ले और मोहल्ले तथा परिवार के सदस्यों के बीच भी देखी जा सकती है। एक परिवार में जीवन के दौरान अनेक अच्छे और कुछ बुरे अनुभव होते हैं। सवाल यह है कि क्या उन बुरे अनुभवों को बार-बार याद करके परिवार के लोग पूरी जिंदगी लड़ते रहें या अच्छे अनुभवों को याद करते हुए भविष्य में प्रेम, सहयोग और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करें।
भारत-पाकिस्तान संबंधों को मानवीय नजरिए से देखने की जरूरत
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के संबंधों को भी इसी व्यापक मानवीय दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। विभाजन ने दोनों देशों के लोगों को विस्थापन, हिंसा और गहरे दुःख का दर्द दिया, लेकिन उस त्रासदी की स्मृति का इस्तेमाल आने वाली पीढ़ियों के बीच स्थायी दुश्मनी पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भारत-पाक एकता के लिए सोशलिस्ट पार्टी की पदयात्रा
उन्होंने बताया कि इसी सोच के साथ सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने राष्ट्रीय प्रधान महासचिव संदीप पाण्डेय के नेतृत्व में भारत-पाकिस्तान एकता, अमन और मैत्री के उद्देश्य से पदयात्रा शुरू की है। यह यात्रा पंजाब के जालंधर से शुरू होकर विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए अमृतसर पहुंचेगी।
वाघा-अटारी सीमा पर जलेगी भाईचारे की मोमबत्ती
धनंजय सिन्हा ने कहा कि 14 अगस्त की मध्यरात्रि में अमृतसर स्थित वाघा-अटारी सीमा पर पार्टी के सदस्यों और आम नागरिकों की ओर से मोमबत्ती जलाकर प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश दिया जाएगा। इसी दौरान पाकिस्तान की ओर से भी नागरिकों का एक समूह अटारी सीमा पर पहुंचकर अमन और शांति का संदेश देने का प्रयास करेगा।
सरकारों के तनाव के बीच नागरिकों की पहल अहम
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच लगभग सभी प्रकार के संबंधों पर विराम जैसी स्थिति है। ऐसे समय में नागरिक स्तर पर संवाद, सद्भाव और विश्वास बहाली की कोशिशें और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
इतिहास की स्मृति भविष्य में शांति का रास्ता दिखाए
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इतिहास को याद करने का सबसे सार्थक तरीका यही है कि अतीत की गलतियों से सीख ली जाए और आने वाली पीढ़ियों के बीच नफरत नहीं, बल्कि प्रेम, सहयोग और भाईचारे को मजबूत किया जाए। 

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