National

spot_img

बिहार में जमीन खरीदने से पहले जान लें नए नियम, रजिस्ट्री महंगी और कई इलाकों में खरीद-बिक्री पर रोक

By Malay Ojha | Published: 17 August 2026 at 01:54 PM

बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए पिछले कुछ महीनों में नियमों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। अब रजिस्ट्री से पहले जमीन की जांच की प्रक्रिया ज्यादा सख्त हो गई है, शहरों में जमीन की सरकारी कीमत कई जगह दोगुनी हो चुकी है और टोपो लैंड की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में जमीन का सौदा करने से पहले कागज, सरकारी दर और जमीन की श्रेणी तीनों की जांच करना जरूरी हो गया है।

बिहार में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर सबसे अहम बदलाव यह है कि अब खरीदार को जमीन की जरूरी जानकारी पहले से देनी होगी और उसके बाद सरकारी स्तर पर उसकी जांच की जाएगी। एक अप्रैल 2026 से रजिस्ट्री के आवेदन के दौरान जमीन से जुड़ी 13 जानकारियां देना जरूरी किया गया है। इनमें अंचल, मौजा, थाना, खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, जमाबंदी धारक, खरीदार, विक्रेता और जमीन के प्रकार जैसी जानकारी शामिल है।

अंचल अधिकारी की रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगा मामला
नई व्यवस्था में जमीन की जानकारी संबंधित अंचल अधिकारी तक पहुंचेगी। सरकार ने डिजिटल और कागजरहित निबंधन व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए भूमि संबंधी ऑनलाइन जांच की सुविधा भी शुरू की है। 11 जुलाई को वैशाली में इस नई व्यवस्था के तहत भूमि जांच, स्थल निरीक्षण और कागजरहित निबंधन जैसी सेवाओं का शुभारंभ किया गया।

10 दिन में जांच की व्यवस्था
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है, जमाबंदी सही है या नहीं, जमीन पर किसी तरह का विवाद तो नहीं है और उसके सरकारी रिकॉर्ड में क्या स्थिति दर्ज है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अंचल अधिकारी को आवेदन मिलने के बाद जांच रिपोर्ट देने के लिए दस दिन की समय-सीमा तय की गई है। रिपोर्ट की जानकारी आवेदक को उसके खाते और संदेश के जरिए मिलने की व्यवस्था की गई है।

फर्जी रजिस्ट्री रोकना सरकार का बड़ा लक्ष्य
सरकार की इस पूरी व्यवस्था का मकसद जमीन के फर्जी कागज, गलत जमाबंदी और विवादित जमीन की खरीद-बिक्री पर लगाम लगाना है। पहले कई मामलों में खरीदार को रजिस्ट्री के बाद जमीन से जुड़े पुराने विवादों का पता चलता था। अब रजिस्ट्री से पहले ही उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड की जांच कराने की कोशिश की जा रही है। खरीदार के लिए इसका फायदा यह है कि जोखिम कम हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ पूरी प्रक्रिया में पहले की तुलना में ज्यादा समय लगने की संभावना है।

जमीन की सरकारी कीमत सीधे बढ़ी
दूसरा बड़ा बदलाव जमीन की सरकारी कीमत से जुड़ा है। जून 2026 में बिहार में नई न्यूनतम मूल्य दर लागू की गई। इसके तहत शहरी इलाकों में जमीन की सरकारी कीमत को कई मामलों में दोगुना किया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है। लंबे समय बाद हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर जमीन की रजिस्ट्री पर पड़ने वाले शुल्क पर पड़ा है।

पटना में कई इलाकों की जमीन दो करोड़ से ऊपर
राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में नई सरकारी दर काफी ऊपर पहुंच गई है। गांधी मैदान के आसपास, बोरिंग रोड और एग्जीबिशन रोड जैसे इलाकों में प्रति कट्ठा सरकारी मूल्य 2.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पाटलिपुत्र कॉलोनी और कंकड़बाग जैसे इलाकों में भी दर करीब 2.18 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा तक बताई गई है। राजाबाजार में यह दर लगभग 1.85 करोड़ रुपये तक पहुंची है।

रजिस्ट्री कराने में अब ज्यादा पैसा लगेगा
सरकारी मूल्य बढ़ने का मतलब केवल कागज पर जमीन महंगी होना नहीं है। इसी सरकारी मूल्य के आधार पर रजिस्ट्री से जुड़े शुल्क की गणना होती है, इसलिए खरीदार को पहले की तुलना में ज्यादा रकम खर्च करनी होगी। गांधी मैदान जैसे महंगे इलाकों में एक कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री पर शुल्क करीब 27.50 लाख रुपये तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।

हर साल पांच प्रतिशत बढ़ने की तैयारी
सरकार ने केवल एक बार दर बढ़ाकर मामला खत्म नहीं किया है। नई व्यवस्था में न्यूनतम मूल्य दर में हर साल पांच प्रतिशत की स्वतः बढ़ोतरी का प्रावधान भी बताया गया है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में सरकारी दरों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री का खर्च और बढ़ सकता है।

महिलाओं के नाम पर अभी राहत
जमीन या मकान महिलाओं के नाम पर कराने वालों को राहत भी जारी है। महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री में पांच प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान बताया गया है। इसलिए जमीन खरीदने वाले परिवारों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि रजिस्ट्री किसके नाम पर कराई जा रही है और उस पर कौन-कौन सी छूट लागू होती है।

टोपो लैंड पर सरकार ने लगाई रोक
तीसरा और बेहद अहम बदलाव टोपो लैंड को लेकर है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 14 जिलों में टोपो लैंड की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और लगान निर्धारण पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इन जिलों में पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, भोजपुर, सारण, सिवान, खगड़िया, गोपालगंज, बक्सर और पश्चिम चंपारण शामिल हैं।

आखिर क्या होती है टोपो लैंड
आसान भाषा में समझें तो नदी के रास्ते में बदलाव, कटाव या बहाव के कारण सामने आने वाली ऐसी जमीन, जिसका पुराना राजस्व रिकॉर्ड साफ तौर पर उपलब्ध नहीं होता, कई मामलों में टोपो लैंड कही जाती है। ऐसी जमीन में खाता, खेसरा और सर्वे से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं होने के कारण मालिकाना हक को लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है। इसी वजह से सरकार ने फिलहाल ऐसी जमीनों के निजी स्वामित्व और लेन-देन पर सख्ती दिखाई है।

14 जिलों के खरीदारों को खास सावधानी
सरकार के ताजा आदेश के बाद इन 14 जिलों में टोपो लैंड की खरीद का जोखिम और बढ़ गया है। इसलिए केवल स्थानीय कागज या आपसी समझौते के आधार पर ऐसी जमीन खरीदना नुकसानदेह हो सकता है। जमीन की श्रेणी, पुराना रिकॉर्ड और सरकारी स्थिति की जांच किए बिना सौदा करना खरीदार को कानूनी परेशानी में डाल सकता है।

चार सैटेलाइट टाउनशिप इलाकों में भी रोक
जमीन की खरीद-बिक्री पर एक और अलग तरह की रोक चार प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप से जुड़े इलाकों में लगी है। भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में चिन्हित क्षेत्रों में जमीन के हस्तांतरण, खरीद-बिक्री और नए निर्माण पर 30 जून 2027 तक रोक का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों का मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन के अनियोजित इस्तेमाल को रोकना है।

यह रोक टोपो लैंड से अलग है
यह समझना जरूरी है कि सैटेलाइट टाउनशिप वाले इलाकों पर लगी रोक और टोपो लैंड पर लगी रोक एक ही आदेश नहीं है। टोपो लैंड का मामला जमीन की प्रकृति और सरकारी स्वामित्व से जुड़ा है, जबकि सैटेलाइट टाउनशिप वाले क्षेत्रों में रोक भविष्य की शहरी योजना और मास्टर प्लान तैयार करने के लिए लगाई गई है। चारों क्षेत्रों के लिए 30 जून 2027 तक की समय-सीमा तय की गई है।

जमीन खरीदने वालों के लिए अब तीन जांच जरूरी
अब बिहार में जमीन खरीदने वाले व्यक्ति के लिए तीन बातें पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं। पहली, जमीन का सरकारी रिकॉर्ड और अंचल अधिकारी की जांच। दूसरी, उस इलाके की नई सरकारी मूल्य दर और रजिस्ट्री खर्च। तीसरी, जमीन कहीं टोपो लैंड या किसी प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में तो नहीं आती। इन तीनों की जानकारी लिए बिना जल्दबाजी में किया गया सौदा बाद में परेशानी का कारण बन सकता है।

सरकार का मकसद पारदर्शिता, खरीदार पर बढ़ा बोझ
सरकार इन बदलावों को जमीन के फर्जीवाड़े और पुराने विवादों को कम करने, सरकारी रिकॉर्ड को मजबूत बनाने और जमीन की वास्तविक स्थिति सामने लाने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है। लेकिन खरीदारों के लिए तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। अब जमीन खरीदने में ज्यादा जांच, ज्यादा कागजी प्रक्रिया और कई मामलों में ज्यादा खर्च होगा। खासकर महंगे शहरी इलाकों में बढ़ी सरकारी दर का सीधा असर मध्यम वर्ग की जेब पर पड़ सकता है।

सौदा करने से पहले यह गलती न करें
बिहार में अब जमीन खरीदना केवल जमीन पसंद करने और कीमत तय करने का मामला नहीं रह गया है। खरीदार को पहले यह देखना होगा कि जमीन किसके नाम दर्ज है, जमाबंदी और खेसरा सही हैं या नहीं, जमीन विवादित तो नहीं है, उसकी सरकारी दर क्या है और उस इलाके में किसी तरह की रोक तो लागू नहीं है। इन जांचों के बाद ही अंतिम सौदा करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

बिहार में जमीन खरीदने से पहले जान लें नए नियम, रजिस्ट्री महंगी और कई इलाकों में खरीद-बिक्री पर रोक

By Malay Ojha | Published: 17 August 2026 at 01:54 PM

बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए पिछले कुछ महीनों में नियमों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। अब रजिस्ट्री से पहले जमीन की जांच की प्रक्रिया ज्यादा सख्त हो गई है, शहरों में जमीन की सरकारी कीमत कई जगह दोगुनी हो चुकी है और टोपो लैंड की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में जमीन का सौदा करने से पहले कागज, सरकारी दर और जमीन की श्रेणी तीनों की जांच करना जरूरी हो गया है।

बिहार में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर सबसे अहम बदलाव यह है कि अब खरीदार को जमीन की जरूरी जानकारी पहले से देनी होगी और उसके बाद सरकारी स्तर पर उसकी जांच की जाएगी। एक अप्रैल 2026 से रजिस्ट्री के आवेदन के दौरान जमीन से जुड़ी 13 जानकारियां देना जरूरी किया गया है। इनमें अंचल, मौजा, थाना, खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, जमाबंदी धारक, खरीदार, विक्रेता और जमीन के प्रकार जैसी जानकारी शामिल है।

अंचल अधिकारी की रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगा मामला
नई व्यवस्था में जमीन की जानकारी संबंधित अंचल अधिकारी तक पहुंचेगी। सरकार ने डिजिटल और कागजरहित निबंधन व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए भूमि संबंधी ऑनलाइन जांच की सुविधा भी शुरू की है। 11 जुलाई को वैशाली में इस नई व्यवस्था के तहत भूमि जांच, स्थल निरीक्षण और कागजरहित निबंधन जैसी सेवाओं का शुभारंभ किया गया।

10 दिन में जांच की व्यवस्था
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है, जमाबंदी सही है या नहीं, जमीन पर किसी तरह का विवाद तो नहीं है और उसके सरकारी रिकॉर्ड में क्या स्थिति दर्ज है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अंचल अधिकारी को आवेदन मिलने के बाद जांच रिपोर्ट देने के लिए दस दिन की समय-सीमा तय की गई है। रिपोर्ट की जानकारी आवेदक को उसके खाते और संदेश के जरिए मिलने की व्यवस्था की गई है।

फर्जी रजिस्ट्री रोकना सरकार का बड़ा लक्ष्य
सरकार की इस पूरी व्यवस्था का मकसद जमीन के फर्जी कागज, गलत जमाबंदी और विवादित जमीन की खरीद-बिक्री पर लगाम लगाना है। पहले कई मामलों में खरीदार को रजिस्ट्री के बाद जमीन से जुड़े पुराने विवादों का पता चलता था। अब रजिस्ट्री से पहले ही उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड की जांच कराने की कोशिश की जा रही है। खरीदार के लिए इसका फायदा यह है कि जोखिम कम हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ पूरी प्रक्रिया में पहले की तुलना में ज्यादा समय लगने की संभावना है।

जमीन की सरकारी कीमत सीधे बढ़ी
दूसरा बड़ा बदलाव जमीन की सरकारी कीमत से जुड़ा है। जून 2026 में बिहार में नई न्यूनतम मूल्य दर लागू की गई। इसके तहत शहरी इलाकों में जमीन की सरकारी कीमत को कई मामलों में दोगुना किया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है। लंबे समय बाद हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर जमीन की रजिस्ट्री पर पड़ने वाले शुल्क पर पड़ा है।

पटना में कई इलाकों की जमीन दो करोड़ से ऊपर
राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में नई सरकारी दर काफी ऊपर पहुंच गई है। गांधी मैदान के आसपास, बोरिंग रोड और एग्जीबिशन रोड जैसे इलाकों में प्रति कट्ठा सरकारी मूल्य 2.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पाटलिपुत्र कॉलोनी और कंकड़बाग जैसे इलाकों में भी दर करीब 2.18 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा तक बताई गई है। राजाबाजार में यह दर लगभग 1.85 करोड़ रुपये तक पहुंची है।

रजिस्ट्री कराने में अब ज्यादा पैसा लगेगा
सरकारी मूल्य बढ़ने का मतलब केवल कागज पर जमीन महंगी होना नहीं है। इसी सरकारी मूल्य के आधार पर रजिस्ट्री से जुड़े शुल्क की गणना होती है, इसलिए खरीदार को पहले की तुलना में ज्यादा रकम खर्च करनी होगी। गांधी मैदान जैसे महंगे इलाकों में एक कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री पर शुल्क करीब 27.50 लाख रुपये तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।

हर साल पांच प्रतिशत बढ़ने की तैयारी
सरकार ने केवल एक बार दर बढ़ाकर मामला खत्म नहीं किया है। नई व्यवस्था में न्यूनतम मूल्य दर में हर साल पांच प्रतिशत की स्वतः बढ़ोतरी का प्रावधान भी बताया गया है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में सरकारी दरों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री का खर्च और बढ़ सकता है।

महिलाओं के नाम पर अभी राहत
जमीन या मकान महिलाओं के नाम पर कराने वालों को राहत भी जारी है। महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री में पांच प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान बताया गया है। इसलिए जमीन खरीदने वाले परिवारों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि रजिस्ट्री किसके नाम पर कराई जा रही है और उस पर कौन-कौन सी छूट लागू होती है।

टोपो लैंड पर सरकार ने लगाई रोक
तीसरा और बेहद अहम बदलाव टोपो लैंड को लेकर है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 14 जिलों में टोपो लैंड की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और लगान निर्धारण पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इन जिलों में पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, भोजपुर, सारण, सिवान, खगड़िया, गोपालगंज, बक्सर और पश्चिम चंपारण शामिल हैं।

आखिर क्या होती है टोपो लैंड
आसान भाषा में समझें तो नदी के रास्ते में बदलाव, कटाव या बहाव के कारण सामने आने वाली ऐसी जमीन, जिसका पुराना राजस्व रिकॉर्ड साफ तौर पर उपलब्ध नहीं होता, कई मामलों में टोपो लैंड कही जाती है। ऐसी जमीन में खाता, खेसरा और सर्वे से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं होने के कारण मालिकाना हक को लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है। इसी वजह से सरकार ने फिलहाल ऐसी जमीनों के निजी स्वामित्व और लेन-देन पर सख्ती दिखाई है।

14 जिलों के खरीदारों को खास सावधानी
सरकार के ताजा आदेश के बाद इन 14 जिलों में टोपो लैंड की खरीद का जोखिम और बढ़ गया है। इसलिए केवल स्थानीय कागज या आपसी समझौते के आधार पर ऐसी जमीन खरीदना नुकसानदेह हो सकता है। जमीन की श्रेणी, पुराना रिकॉर्ड और सरकारी स्थिति की जांच किए बिना सौदा करना खरीदार को कानूनी परेशानी में डाल सकता है।

चार सैटेलाइट टाउनशिप इलाकों में भी रोक
जमीन की खरीद-बिक्री पर एक और अलग तरह की रोक चार प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप से जुड़े इलाकों में लगी है। भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में चिन्हित क्षेत्रों में जमीन के हस्तांतरण, खरीद-बिक्री और नए निर्माण पर 30 जून 2027 तक रोक का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों का मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन के अनियोजित इस्तेमाल को रोकना है।

यह रोक टोपो लैंड से अलग है
यह समझना जरूरी है कि सैटेलाइट टाउनशिप वाले इलाकों पर लगी रोक और टोपो लैंड पर लगी रोक एक ही आदेश नहीं है। टोपो लैंड का मामला जमीन की प्रकृति और सरकारी स्वामित्व से जुड़ा है, जबकि सैटेलाइट टाउनशिप वाले क्षेत्रों में रोक भविष्य की शहरी योजना और मास्टर प्लान तैयार करने के लिए लगाई गई है। चारों क्षेत्रों के लिए 30 जून 2027 तक की समय-सीमा तय की गई है।

जमीन खरीदने वालों के लिए अब तीन जांच जरूरी
अब बिहार में जमीन खरीदने वाले व्यक्ति के लिए तीन बातें पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं। पहली, जमीन का सरकारी रिकॉर्ड और अंचल अधिकारी की जांच। दूसरी, उस इलाके की नई सरकारी मूल्य दर और रजिस्ट्री खर्च। तीसरी, जमीन कहीं टोपो लैंड या किसी प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में तो नहीं आती। इन तीनों की जानकारी लिए बिना जल्दबाजी में किया गया सौदा बाद में परेशानी का कारण बन सकता है।

सरकार का मकसद पारदर्शिता, खरीदार पर बढ़ा बोझ
सरकार इन बदलावों को जमीन के फर्जीवाड़े और पुराने विवादों को कम करने, सरकारी रिकॉर्ड को मजबूत बनाने और जमीन की वास्तविक स्थिति सामने लाने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है। लेकिन खरीदारों के लिए तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। अब जमीन खरीदने में ज्यादा जांच, ज्यादा कागजी प्रक्रिया और कई मामलों में ज्यादा खर्च होगा। खासकर महंगे शहरी इलाकों में बढ़ी सरकारी दर का सीधा असर मध्यम वर्ग की जेब पर पड़ सकता है।

सौदा करने से पहले यह गलती न करें
बिहार में अब जमीन खरीदना केवल जमीन पसंद करने और कीमत तय करने का मामला नहीं रह गया है। खरीदार को पहले यह देखना होगा कि जमीन किसके नाम दर्ज है, जमाबंदी और खेसरा सही हैं या नहीं, जमीन विवादित तो नहीं है, उसकी सरकारी दर क्या है और उस इलाके में किसी तरह की रोक तो लागू नहीं है। इन जांचों के बाद ही अंतिम सौदा करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES