By Malay Ojha | Published: 17 August 2026 at 07:06 PM
माउंटेन मैन के नाम से मशहूर दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठी है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने केंद्र सरकार से दशरथ मांझी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मांझी का संघर्ष सिर्फ गया या बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे देश के लिए मेहनत, संकल्प और जनसेवा की मिसाल हैं।
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने करीब 22 वर्षों तक लगातार मेहनत कर पहाड़ के बीच रास्ता बना दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा काम केवल शारीरिक मेहनत से नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से संभव हुआ। इसलिए उनके योगदान को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए।
निजी दुख को समाज की जरूरत से जोड़ा
संतोष सुमन ने कहा कि दशरथ मांझी का जीवन इस बात की मिसाल है कि कोई व्यक्ति अपने निजी दुख को भी समाज की भलाई के काम में बदल सकता है। उनकी कोशिश का मकसद ऐसा रास्ता बनाना था, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने और इलाज जैसी जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में आसानी हो। यही वजह है कि उनका नाम आज भी लोगों के बीच सम्मान के साथ लिया जाता है।
गरीब और मेहनतकश लोगों के लिए प्रेरणा
उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी का जीवन गरीब, वंचित और मेहनतकश समाज के लिए खास संदेश देता है। उनके पास न बड़ी मशीन थी और न कोई बड़ा साधन, लेकिन उन्होंने अपने हौसले के दम पर पहाड़ को रास्ते में बदल दिया। उनका संघर्ष बताता है कि परिस्थितियां चाहे जितनी मुश्किल हों, मजबूत इरादे के साथ लगातार कोशिश की जाए तो बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।
भारत रत्न से सम्मानित करने की अपील
संतोष सुमन ने कहा कि भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। उनके मुताबिक दशरथ मांझी जैसे जननायक को यह सम्मान देना उनके जीवनभर के संघर्ष और समाज के प्रति योगदान के प्रति देश की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में गंभीरता से विचार करते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाए।
पुण्यतिथि पर याद किए गए माउंटेन मैन
दशरथ मांझी की पुण्यतिथि के अवसर पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार के नेतृत्व में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके जीवन और संघर्ष को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया।
डॉ. अनिल कुमार ने बताया संघर्ष की मिसाल
डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि दशरथ मांझी केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि मेहनत, हिम्मत और मजबूत इरादे की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ काटकर रास्ता बनाना अपने आप में असाधारण काम था। मांझी ने जिस धैर्य के साथ वर्षों तक अपना काम जारी रखा, वह आज की पीढ़ी के लिए भी बड़ी सीख है।
पत्नी की मौत के बाद शुरू किया था काम
डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि दशरथ मांझी की पत्नी की मौत के बाद उन्होंने गांव के लोगों को बेहतर इलाज और आने-जाने की सुविधा दिलाने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने हथौड़ा और छेनी लेकर पहाड़ काटने का काम शुरू किया। वर्षों तक लगातार मेहनत के बाद उन्होंने पहाड़ के बीच रास्ता बना दिया। यही रास्ता बाद में उनके नाम को देशभर में पहचान दिलाने वाली सबसे बड़ी वजह बना।
उनका काम सिर्फ रास्ता नहीं, एक संदेश था
दशरथ मांझी ने जिस रास्ते को तैयार किया, वह केवल दो जगहों को जोड़ने वाला रास्ता नहीं था। वह इस बात का प्रतीक बन गया कि एक आम आदमी भी अपने संकल्प और मेहनत से समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। बिहार पर्यटन विभाग भी उनके बनाए रास्ते और स्मारक को उनके दृढ़ निश्चय की याद के रूप में प्रस्तुत करता है।
नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए उनकी कहानी
डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि दशरथ मांझी की याद को केवल पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनकी कहानी को बच्चों और युवाओं तक पहुंचाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी मेहनत, धैर्य और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझ सके।
कमजोर वर्गों के लिए काम करने का संकल्प
कार्यक्रम में मौजूद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए काम करने का संकल्प लिया। नेताओं ने कहा कि दशरथ मांझी का जीवन तभी सही मायने में याद किया जाएगा, जब उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर जरूरतमंद लोगों की मदद की जाए और समाज में बराबरी के लिए काम किया जाए।
22 साल का संघर्ष आज भी जिंदा है
दशरथ मांझी को गुजरे कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उनके हाथ में हथौड़ा-छेनी लेकर पहाड़ काटने की कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है। बिहार पर्यटन विभाग के मुताबिक उनके बनाए रास्ते की लंबाई करीब 110 मीटर है और यह उनकी 22 वर्षों की मेहनत की निशानी है। आज गेहलौर में बना उनका स्मारक भी उनके संघर्ष की याद दिलाता है।
अब केंद्र के फैसले पर नजर
दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर भारत रत्न की मांग सामने आने के बाद अब नजर केंद्र सरकार के रुख पर है। संतोष कुमार सुमन ने इसे उनके संघर्ष के प्रति राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ते हुए मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की है। वहीं, पार्टी ने उनके जीवन और संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
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