By aryavartalive | Published: 17 August 2026 at 06:57 PM
कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की दो दिवसीय बिहार राज्य कमेटी की बैठक महत्वपूर्ण राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों के साथ समाप्त हो गई। बैठक में लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर राज्य के हर जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला लिया गया। पार्टी ने शोधार्थियों और पीएचडी धारकों के चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी मांगों पर तत्काल सकारात्मक कदम उठाने की मांग भी की।
राज्य कमेटी की बैठक में तय किया गया कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर पार्टी अब जिला स्तर पर आंदोलन को तेज करेगी। इसके तहत हर जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व ने संगठन की निचली इकाइयों से लेकर राज्य स्तर तक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
शोधार्थियों के आंदोलन को पार्टी का समर्थन
बैठक में देशभर में चल रहे ऑल इंडिया पीएचडी होल्डर और रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन के आंदोलन पर भी चर्चा हुई। राज्य सचिव ललन चौधरी ने कहा कि आंदोलन कर रहे शोधार्थियों की मांगें लोकतांत्रिक हैं और सरकार को उनके प्रति सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए। बैठक में उनकी मांगों को जल्द स्वीकार कर आंदोलन समाप्त कराने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
विजय राघवन ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
बैठक के समापन भाषण में पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और बिहार प्रभारी ए. विजयाराघवन ने केंद्र सरकार पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि छात्र-नौजवानों के संघर्ष के बाद 15 अगस्त को लाल किले से संघर्ष कर रहे युवाओं को कथित तौर पर ‘दिमागी नक्सल’ कहने और नागरिक सेफ गार्ड बनाने की घोषणा को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
भाजपा पर लगाया फासीवाद की ओर बढ़ने का आरोप
विजयाराघवन ने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा देश में फासीवादी व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसी कोशिशों को सफल नहीं होने देगी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर पार्टी आगे भी संघर्ष जारी रखेगी।
तीन महीने की राजनीतिक रिपोर्ट हुई पेश
बैठक के दौरान बिहार राज्य सचिव ललन चौधरी ने पिछले तीन महीनों की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट पर सदस्यों के बीच विस्तार से चर्चा हुई। बहस और विचार-विमर्श के बाद रिपोर्ट को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर जोर
राज्य कमेटी की बैठक में केवल आंदोलन ही नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। पार्टी ने शाखा स्तर से लेकर राज्य कमेटी तक संगठनात्मक ढांचे को ज्यादा सक्रिय बनाने का फैसला लिया। इसके साथ ही जनसंगठनों की गतिविधियों को भी बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार अभियान चलाया जा सके।
दो पोलित ब्यूरो सदस्य बैठक में रहे मौजूद
दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कमेटी सदस्य अवधेश कुमार ने की। बैठक में पार्टी के पोलित ब्यूरो के दो सदस्य और बिहार प्रभारी ए. विजयाराघवन तथा अशोक ढावले भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने केंद्रीय स्तर पर लिए गए पार्टी के फैसलों और राजनीतिक दिशा से राज्य कमेटी के सदस्यों को अवगत कराया।
कई नेताओं ने चर्चा में लिया हिस्सा
बैठक में विधायक अजय कुमार, विनोद कुमार, रामपरी, संजय कुमार, राजेंद्र सिंह, प्रभुराज नारायण राव, अहमद अली, श्याम भारती, मनोज कुमार चंद्रवंशी, भोला दिवाकर, रणधीर यादव, शशिकांत राय और अनुपम कुमार समेत कई नेताओं ने विभिन्न एजेंडों पर चर्चा में भाग लिया। नेताओं ने संगठन, आंदोलन और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े प्रस्तावों पर अपनी राय रखी।
आंदोलन और संगठन दोनों मोर्चों पर बढ़ेगी सक्रियता
बैठक के फैसलों से साफ है कि सीपीआई(एम) बिहार में आने वाले दिनों में लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन को जिला स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। एक तरफ पार्टी शोधार्थियों के आंदोलन के समर्थन में खड़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन के जरिए अपने संगठन को भी सक्रिय करने की योजना बनाई गई है।
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