By aryavartalive | Published: 18 August 2026 at 09:33 AM
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से देश की प्रत्येक महिला को सरकारी खजाने से 10-10 लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सदियों से महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्तर पर भेदभाव और शोषण का सामना करना पड़ा है। इसका असर आज भी दिख रहा है और बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाई हैं।
छोटी आर्थिक मदद से नहीं बदलेगी महिलाओं की स्थिति
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि महिलाओं को 10 हजार, 20 हजार या 50 हजार रुपये जैसी छोटी आर्थिक सहायता देकर उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा सकता। सरकारों को महिलाओं को ऐसी पर्याप्त पूंजी उपलब्ध करानी चाहिए, जिससे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और अपनी आय का स्थायी साधन बना सकें।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर
उन्होंने कहा कि सरकारी खजाने पर समाज के हर वर्ग का अधिकार है। हालांकि, जिन महिलाओं को सदियों तक आर्थिक अवसरों से दूर रखा गया, उनके सशक्तीकरण को सरकारों की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए। महिलाओं को केवल सहायता पाने वाला वर्ग मानने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
हर महिला के खाते में 10 लाख रुपये देने की मांग
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार समेत देश की सभी राज्य सरकारों को महिलाओं के लिए 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता योजना शुरू करनी चाहिए। उनका कहना है कि यह राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाए, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार स्वरोजगार, लघु उद्योग, कारोबार, कृषि, पशुपालन या अन्य आर्थिक गतिविधियां शुरू कर सकें।
चुनावी घोषणाओं से आगे बढ़ने की अपील
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल चुनावी घोषणाओं और सीमित आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्हें इतनी आर्थिक ताकत दी जानी चाहिए कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
महिला सशक्तीकरण को बताया सामाजिक न्याय का मुद्दा
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना महज कोई कल्याणकारी योजना नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और बराबरी की दिशा में जरूरी कदम है। सरकारों को महिलाओं को केवल लाभार्थी के तौर पर देखने के बजाय उनके आर्थिक अधिकार के नजरिये से नीतियां बनानी चाहिए।
उद्योगपतियों को मदद मिल सकती है तो महिलाओं को क्यों नहीं?
सोशलिस्ट नेता ने कहा कि यदि सरकारें बड़े उद्योगपतियों को अलग-अलग क्षेत्रों में हजारों करोड़ रुपये की सहायता दे सकती हैं, हजारों एकड़ जमीन उपलब्ध करा सकती हैं और बड़े कर्ज माफ कर सकती हैं, तो देश की आधी आबादी को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भी पर्याप्त संसाधन जुटाए जा सकते हैं।
सोशलिस्ट पार्टी की सरकारों से सीधी मांग
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की स्पष्ट मांग है कि देश की प्रत्येक महिला को 10 लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाए। उनके अनुसार, इस तरह की पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके आर्थिक और सामाजिक अधिकारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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