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पटना के ‘मोगली’ ने कैमरे से बनाई अलग पहचान, पॉकेट मनी बचाकर खरीदा था पहला कैमरा

By Malay Ojha | Published: 18 August 2026 at 10:19 PM

पटना: बचपन में जंगल की दुनिया के मोगली की कहानी आपने जरूर सुनी या देखी होगी, लेकिन पटना के मोगली की कहानी कुछ अलग है। यहां मोगली जंगल में नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे नजर आते हैं। फोटोग्राफी के जुनून ने उन्हें एक ऐसे सफर पर पहुंचाया, जहां शुरुआत स्कूल के दिनों में हुई और आज करीब एक दशक बाद वह पटना में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। शहर की गलियों, लोगों की जिंदगी, सामाजिक गतिविधियों और खास आयोजनों को कैमरे में उतारना उनकी पहचान बन गया है।

पटना में जन्मे मोगली की शुरुआती पढ़ाई राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजेंद्र नगर से हुई। इसके बाद उन्होंने कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। हालांकि पढ़ाई के साथ ही उनके मन में तस्वीरों को लेकर एक अलग तरह की दिलचस्पी पैदा हो चुकी थी। दसवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान एक फोटोग्राफर उन्हें अलग-अलग कार्यक्रमों में अपने साथ लेकर जाते थे।

कार्यक्रमों में साथ जाते-जाते सीखी कैमरे की बारीकी
शुरुआत में मोगली के लिए किसी कार्यक्रम में जाना और कैमरे से तस्वीरें लेना महज एक अनुभव था। लेकिन धीरे-धीरे कैमरे के पीछे काम करने की बारीकियां उन्हें आकर्षित करने लगीं। तस्वीर कैसे ली जाती है, सही पल को कैसे पहचाना जाता है और किसी घटना की कहानी तस्वीर के जरिए कैसे बताई जा सकती है, इन चीजों को उन्होंने वहीं से समझना शुरू किया।

पॉकेट मनी बचाई और खरीद लिया अपना कैमरा
फोटोग्राफी का शौक जब जुनून में बदलने लगा तो मोगली ने इसे सिर्फ देखने या सीखने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी पॉकेट मनी बचानी शुरू की और कुछ समय बाद अपना कैमरा खरीद लिया। यह उनके फोटोग्राफी सफर का अहम मोड़ था। अपना कैमरा मिलने के बाद उन्होंने खुद तस्वीरें लेना शुरू किया और छोटे-छोटे कार्यक्रमों से अपने काम की शुरुआत की।

छोटे कार्यक्रमों से बड़े काम तक पहुंचा सफर
शुरुआती दौर में काम का दायरा छोटा था, लेकिन मोगली लगातार सीखते रहे। हर कार्यक्रम के साथ उनका अनुभव बढ़ता गया और तस्वीरों में उनकी अपनी शैली दिखाई देने लगी। धीरे-धीरे उनके काम की चर्चा बढ़ी और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने के मौके मिलने लगे। यही वह दौर था, जब शौक धीरे-धीरे पेशे में बदलने लगा।

सरकारी संस्थानों से लेकर फिल्म जगत तक मिला काम
समय के साथ मोगली को अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिला। उन्होंने सरकारी संस्थानों से जुड़े काम किए, वहीं फिल्म जगत से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी अपनी फोटोग्राफी का हुनर दिखाया। अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने के अनुभव ने उन्हें एक बेहतर और अनुभवी फोटोग्राफर बनाने में अहम भूमिका निभाई।

तस्वीर में सिर्फ चेहरा नहीं, पूरी कहानी देखते हैं
मोगली की फोटोग्राफी की खास बात सिर्फ कैमरा चलाना नहीं है। वह किसी तस्वीर में उस पल की कहानी को पकड़ने की कोशिश करते हैं। उनके लिए एक अच्छी तस्वीर वही है, जिसे देखने के बाद सामने वाला उस पल को महसूस कर सके। यही सोच उनकी तस्वीरों को सामान्य तस्वीरों से अलग पहचान देती है।

पटना की गलियों और आम लोगों पर खास नजर
करीब दस वर्षों से पटना में सक्रिय मोगली ने शहर को बहुत करीब से कैमरे में देखा है। शहर की गलियों से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तक, आम लोगों की गतिविधियों से लेकर सामाजिक आयोजनों तक, वह अलग-अलग रंगों को तस्वीरों में दर्ज करते रहे हैं। उनके कैमरे में पटना का वह हिस्सा भी दिखाई देता है, जो अक्सर बड़ी खबरों और चकाचौंध के बीच नजरअंदाज हो जाता है।

पत्रकारिता की पढ़ाई ने भी फोटोग्राफी को दिया नया नजरिया
मोगली ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और इसका असर उनके काम में भी दिखाई देता है। किसी घटना को केवल तस्वीर के तौर पर देखने के बजाय उसके पीछे की कहानी समझना उनके काम का हिस्सा रहा है। शायद यही वजह है कि उनके लिए फोटोग्राफी सिर्फ खूबसूरत तस्वीरें लेने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी घटना, व्यक्ति और समाज को दर्ज करने का तरीका भी है।

जुनून को पेशा बनाने की कहानी युवाओं के लिए मिसाल
मोगली की कहानी का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने शुरुआत किसी बड़े संसाधन के साथ नहीं की। स्कूल के दिनों में कैमरे से परिचय हुआ, पॉकेट मनी बचाकर अपना कैमरा खरीदा और फिर छोटे कार्यक्रमों से शुरुआत करते हुए धीरे-धीरे बड़े प्रोजेक्ट्स तक पहुंचे। इस सफर में लगातार सीखने और अपने काम को बेहतर करने की कोशिश उनकी सबसे बड़ी ताकत रही।

कैमरे के पीछे खड़े होकर बनाई अपनी पहचान
आज पटना में मोगली को फोटोग्राफी के क्षेत्र में एक अनुभवी नाम के तौर पर जाना जाता है। करीब दस वर्षों के सफर में उन्होंने कई तरह के काम किए और अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी कला को निखारा। उनके लिए फोटोग्राफी आज भी केवल रोजगार का जरिया नहीं है। यह वह माध्यम है, जिसके जरिए वह लोगों, घटनाओं और शहर की बदलती तस्वीर को अपने कैमरे में सुरक्षित करते हैं।

मोगली का सफर यह बताता है कि किसी हुनर को पहचान दिलाने के लिए शुरुआत बड़ी होना जरूरी नहीं है। जरूरी है उस काम के प्रति लगाव, लगातार सीखने की इच्छा और अपने काम को बेहतर बनाने की कोशिश। स्कूल के दिनों में शुरू हुआ कैमरे का यह सफर आज पटना में उनकी अलग पहचान बन चुका है।

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पटना के ‘मोगली’ ने कैमरे से बनाई अलग पहचान, पॉकेट मनी बचाकर खरीदा था पहला कैमरा

By Malay Ojha | Published: 18 August 2026 at 10:19 PM

पटना: बचपन में जंगल की दुनिया के मोगली की कहानी आपने जरूर सुनी या देखी होगी, लेकिन पटना के मोगली की कहानी कुछ अलग है। यहां मोगली जंगल में नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे नजर आते हैं। फोटोग्राफी के जुनून ने उन्हें एक ऐसे सफर पर पहुंचाया, जहां शुरुआत स्कूल के दिनों में हुई और आज करीब एक दशक बाद वह पटना में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। शहर की गलियों, लोगों की जिंदगी, सामाजिक गतिविधियों और खास आयोजनों को कैमरे में उतारना उनकी पहचान बन गया है।

पटना में जन्मे मोगली की शुरुआती पढ़ाई राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजेंद्र नगर से हुई। इसके बाद उन्होंने कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। हालांकि पढ़ाई के साथ ही उनके मन में तस्वीरों को लेकर एक अलग तरह की दिलचस्पी पैदा हो चुकी थी। दसवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान एक फोटोग्राफर उन्हें अलग-अलग कार्यक्रमों में अपने साथ लेकर जाते थे।

कार्यक्रमों में साथ जाते-जाते सीखी कैमरे की बारीकी
शुरुआत में मोगली के लिए किसी कार्यक्रम में जाना और कैमरे से तस्वीरें लेना महज एक अनुभव था। लेकिन धीरे-धीरे कैमरे के पीछे काम करने की बारीकियां उन्हें आकर्षित करने लगीं। तस्वीर कैसे ली जाती है, सही पल को कैसे पहचाना जाता है और किसी घटना की कहानी तस्वीर के जरिए कैसे बताई जा सकती है, इन चीजों को उन्होंने वहीं से समझना शुरू किया।

पॉकेट मनी बचाई और खरीद लिया अपना कैमरा
फोटोग्राफी का शौक जब जुनून में बदलने लगा तो मोगली ने इसे सिर्फ देखने या सीखने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी पॉकेट मनी बचानी शुरू की और कुछ समय बाद अपना कैमरा खरीद लिया। यह उनके फोटोग्राफी सफर का अहम मोड़ था। अपना कैमरा मिलने के बाद उन्होंने खुद तस्वीरें लेना शुरू किया और छोटे-छोटे कार्यक्रमों से अपने काम की शुरुआत की।

छोटे कार्यक्रमों से बड़े काम तक पहुंचा सफर
शुरुआती दौर में काम का दायरा छोटा था, लेकिन मोगली लगातार सीखते रहे। हर कार्यक्रम के साथ उनका अनुभव बढ़ता गया और तस्वीरों में उनकी अपनी शैली दिखाई देने लगी। धीरे-धीरे उनके काम की चर्चा बढ़ी और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने के मौके मिलने लगे। यही वह दौर था, जब शौक धीरे-धीरे पेशे में बदलने लगा।

सरकारी संस्थानों से लेकर फिल्म जगत तक मिला काम
समय के साथ मोगली को अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिला। उन्होंने सरकारी संस्थानों से जुड़े काम किए, वहीं फिल्म जगत से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी अपनी फोटोग्राफी का हुनर दिखाया। अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने के अनुभव ने उन्हें एक बेहतर और अनुभवी फोटोग्राफर बनाने में अहम भूमिका निभाई।

तस्वीर में सिर्फ चेहरा नहीं, पूरी कहानी देखते हैं
मोगली की फोटोग्राफी की खास बात सिर्फ कैमरा चलाना नहीं है। वह किसी तस्वीर में उस पल की कहानी को पकड़ने की कोशिश करते हैं। उनके लिए एक अच्छी तस्वीर वही है, जिसे देखने के बाद सामने वाला उस पल को महसूस कर सके। यही सोच उनकी तस्वीरों को सामान्य तस्वीरों से अलग पहचान देती है।

पटना की गलियों और आम लोगों पर खास नजर
करीब दस वर्षों से पटना में सक्रिय मोगली ने शहर को बहुत करीब से कैमरे में देखा है। शहर की गलियों से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तक, आम लोगों की गतिविधियों से लेकर सामाजिक आयोजनों तक, वह अलग-अलग रंगों को तस्वीरों में दर्ज करते रहे हैं। उनके कैमरे में पटना का वह हिस्सा भी दिखाई देता है, जो अक्सर बड़ी खबरों और चकाचौंध के बीच नजरअंदाज हो जाता है।

पत्रकारिता की पढ़ाई ने भी फोटोग्राफी को दिया नया नजरिया
मोगली ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और इसका असर उनके काम में भी दिखाई देता है। किसी घटना को केवल तस्वीर के तौर पर देखने के बजाय उसके पीछे की कहानी समझना उनके काम का हिस्सा रहा है। शायद यही वजह है कि उनके लिए फोटोग्राफी सिर्फ खूबसूरत तस्वीरें लेने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी घटना, व्यक्ति और समाज को दर्ज करने का तरीका भी है।

जुनून को पेशा बनाने की कहानी युवाओं के लिए मिसाल
मोगली की कहानी का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने शुरुआत किसी बड़े संसाधन के साथ नहीं की। स्कूल के दिनों में कैमरे से परिचय हुआ, पॉकेट मनी बचाकर अपना कैमरा खरीदा और फिर छोटे कार्यक्रमों से शुरुआत करते हुए धीरे-धीरे बड़े प्रोजेक्ट्स तक पहुंचे। इस सफर में लगातार सीखने और अपने काम को बेहतर करने की कोशिश उनकी सबसे बड़ी ताकत रही।

कैमरे के पीछे खड़े होकर बनाई अपनी पहचान
आज पटना में मोगली को फोटोग्राफी के क्षेत्र में एक अनुभवी नाम के तौर पर जाना जाता है। करीब दस वर्षों के सफर में उन्होंने कई तरह के काम किए और अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी कला को निखारा। उनके लिए फोटोग्राफी आज भी केवल रोजगार का जरिया नहीं है। यह वह माध्यम है, जिसके जरिए वह लोगों, घटनाओं और शहर की बदलती तस्वीर को अपने कैमरे में सुरक्षित करते हैं।

मोगली का सफर यह बताता है कि किसी हुनर को पहचान दिलाने के लिए शुरुआत बड़ी होना जरूरी नहीं है। जरूरी है उस काम के प्रति लगाव, लगातार सीखने की इच्छा और अपने काम को बेहतर बनाने की कोशिश। स्कूल के दिनों में शुरू हुआ कैमरे का यह सफर आज पटना में उनकी अलग पहचान बन चुका है।

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