By Malay Ojha | Published: 19 August 2026 at 10:26 PM
बिहार में राजभवन मार्च को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के मार्च को लेकर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने इसे तेजस्वी यादव की राजनीतिक छवि सुधारने और घटते जनाधार को संभालने की कोशिश बताया। कुशवाहा का दावा है कि मार्च में छात्र-युवाओं की अपेक्षित भागीदारी नहीं दिखी और मुख्य रूप से राजद के कार्यकर्ता ही नजर आए।
उमेश सिंह कुशवाहा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि राजभवन मार्च से तेजस्वी यादव को कोई राजनीतिक फायदा मिलने वाला नहीं है। उनके मुताबिक, राजद नेतृत्व इस समय अपने घटते जनसमर्थन को लेकर परेशान है और इसी वजह से ऐसे कार्यक्रमों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
कुशवाहा ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की छवि बिहार की जनता, खासकर राजद के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच एक ऐसे नेता की बनती जा रही है, जो राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार गंभीर नहीं दिखाई देते। उन्होंने कहा कि राजभवन मार्च इसी छवि को बदलने की कोशिश का हिस्सा था, लेकिन जमीन पर इसका असर नजर नहीं आया।
छात्र-युवाओं की भागीदारी पर सवाल
जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि राजभवन मार्च में छात्र और युवा बड़ी संख्या में शामिल नहीं हुए। उनके अनुसार, कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों से बुलाए गए राजद के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ही प्रमुख रूप से दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से इस मार्च को छात्र-युवा मुद्दों से जोड़कर पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन जिन वर्गों के नाम पर आंदोलन खड़ा करने का दावा किया गया, उनकी व्यापक भागीदारी दिखाई नहीं दी। कुशवाहा ने इसे राजद की राजनीतिक रणनीति की कमजोरी बताया।
सदन और आंदोलनों को लेकर तेजस्वी पर निशाना
उमेश कुशवाहा ने तेजस्वी यादव की सक्रियता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा का महत्वपूर्ण सत्र चलता है, जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने का मौका होता है और छात्र-युवा अपने सवालों को लेकर आंदोलन करते हैं, तब तेजस्वी यादव की सक्रियता वैसी नहीं दिखाई देती, जैसी एक जिम्मेदार विपक्षी नेता से अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मौकों पर तेजस्वी यादव विदेश यात्राओं में व्यस्त रहते हैं। जदयू नेता के मुताबिक, जनता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार मौजूद रहना विपक्ष के नेता की राजनीतिक जिम्मेदारी है और इससे पीछे हटने का सीधा असर उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर पड़ता है।
रेलवे मामले का जिक्र कर साधा निशाना
बयान में उमेश कुशवाहा ने तेजस्वी यादव के परिवार से जुड़े पुराने रेलवे नौकरी के बदले जमीन मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन नेताओं पर युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर जमीन लेने से जुड़े आरोपों का राजनीतिक विवाद रहा है, वे अब खुद को छात्र-युवाओं का सबसे बड़ा हितैषी बताकर किस आधार पर आंदोलन कर रहे हैं।
हालांकि, यह जदयू नेता का राजनीतिक आरोप है और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इस मुद्दे का जिक्र करते हुए कुशवाहा ने राजद नेतृत्व की कथित दोहरी राजनीति पर सवाल खड़े किए और कहा कि जनता अब ऐसे दावों को आसानी से स्वीकार करने वाली नहीं है।
विपक्ष पर भी लगाया मुद्दाविहीन होने का आरोप
जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष के पास बिहार के विकास और युवाओं के भविष्य से जुड़े ठोस मुद्दों का अभाव है। उनके अनुसार, इसी वजह से राजनीतिक दल आंदोलन और मार्च के जरिए माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार के छात्र और युवा अब राजनीतिक नारों से आगे बढ़कर अपने भविष्य, पढ़ाई, रोजगार और अवसरों को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे में केवल सड़क पर भीड़ जुटाकर खुद को युवाओं की आवाज बताना पर्याप्त नहीं है। जनता यह देखती है कि किसी नेता की मौजूदगी उसके सवालों के समय कितनी रहती है।
तेजस्वी के राजनीतिक भविष्य पर भी टिप्पणी
उमेश कुशवाहा ने अपने बयान में तेजस्वी यादव के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राजद नेतृत्व को अपने घटते जनाधार की चिंता है और इसी वजह से अलग-अलग राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की राजनीति में गंभीरता की कमी अब जनता के सामने स्पष्ट हो चुकी है। हालांकि, यह बयान पूरी तरह जदयू की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे बिहार की मौजूदा सियासी खींचतान के बीच दिया गया हमला माना जा रहा है।
जदयू ने युवाओं को लेकर किया दावा
कुशवाहा ने कहा कि बिहार के छात्र और युवा राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और वे किसी भी दल की ओर से किए जाने वाले दावों को बिना सवाल किए स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने विपक्ष पर युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उनका कहना है कि बिहार के युवा रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर गंभीर हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय इन मुद्दों पर स्पष्ट नीति और ठोस काम की बात करनी चाहिए।
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