By Malay Ojha | Published: 26 August 2026 at 07:36 PM
नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। नदी का पानी तिमुरे और स्याफ्रुबेशी समेत कई इलाकों में घुस गया, जिससे सड़कें, पुल, घर और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अनुसार 384 यात्रियों के लापता होने की सूचना है, जिनमें 105 भारतीय शामिल हैं।
बाढ़ की चपेट में आए इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। कई जगह सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण रेस्क्यू टीमों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में कई लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ([Reuters][2])
चीन की तरफ से आया पानी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भोटेकोशी में अचानक इतनी बड़ी मात्रा में पानी कहां से आया। नेपाली अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ का पानी तिब्बत की तरफ से आया था। शुरुआती जांच में भूस्खलन, हिमस्खलन या ग्लेशियल झील के अचानक टूटने जैसी संभावनाओं पर जांच की जा रही है। अभी किसी एक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्लेशियल झील टूटने का भी शक
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज और बड़ी बाढ़ केवल सामान्य बारिश से नहीं आई होगी। भोटेकोशी नदी में पानी का अचानक बढ़ना किसी बड़े जलस्रोत के टूटने की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों ने नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में मौजूद हिमनदी झीलों और संभावित भूस्खलन की जांच की जरूरत बताई है।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलेगा राज
बाढ़ की असली वजह का पता लगाने में ताजा सैटेलाइट तस्वीरें और ऊपरी इलाकों का डेटा अहम हो सकता है। नेपाली विशेषज्ञों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्र से तुरंत और पर्याप्त जानकारी हासिल करना है। संभावित घटना स्थल सीमा क्षेत्र के आसपास होने के कारण जांच और ज्यादा कठिन हो गई है।
पिछले साल भी मची थी तबाही
भोटेकोशी क्षेत्र में पिछले साल भी अचानक आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया था। उस घटना के बाद ग्लेशियल झील से अचानक पानी निकलने की संभावना सामने आई थी। इस बार बाढ़ का वेग और तबाही का दायरा देखकर विशेषज्ञ स्थिति को गंभीर मान रहे हैं।
बिहार और यूपी तक बढ़ी चिंता
नेपाल में आई इस बाढ़ का असर नीचे की ओर बहने वाली नदियों पर पड़ सकता है। भारत में भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है। बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक नदी के जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। बिहार सरकार ने भी अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने को कहा है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा खतरा
हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और मौसम में बदलाव के कारण ग्लेशियल झीलों का खतरा बढ़ रहा है। ऐसी झीलों में पानी का दबाव बढ़ने के बाद अचानक बांध टूटने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे कुछ ही समय में नदी का जलस्तर खतरनाक तरीके से बढ़ जाता है।
अभी सबसे बड़ा सवाल यही
भोटेकोशी की इस तबाही में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बाद अब सबसे जरूरी काम प्रभावित लोगों की तलाश और सुरक्षित बचाव है। वहीं बाढ़ की असली वजह सामने आने का इंतजार भी किया जा रहा है। विशेषज्ञों की आशंका सही साबित होती है या इसके पीछे कोई दूसरी प्राकृतिक घटना थी, इसका जवाब जांच और ताजा सैटेलाइट डेटा से ही मिलेगा।
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