By Malay Ojha | Published: 26 August 2026 at 09:08 PM
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रबंध शास्त्र संस्थान के प्रोफेसर आशुतोष मोहन का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक के योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयन किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करेंगी।
प्रो. आशुतोष मोहन ने पारंपरिक कक्षा शिक्षण को तकनीक आधारित अधिगम से जोड़ने के साथ डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्तमान में वह शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आईएनआई-स्वयम के राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने स्वयम मंच के लिए तीन ऑनलाइन पाठ्यक्रम विकसित किए हैं, जिनमें दो पाठ्यक्रम जर्मनी की संस्था जीआईजेड के सहयोग से तैयार किए गए हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में भूमिका
बीएचयू में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में भी प्रो. मोहन की सक्रिय भूमिका रही है। वह वर्तमान में बीएचयू की एनईपी समन्वय प्रकोष्ठ के सह-संयोजक हैं। इस जिम्मेदारी के माध्यम से उन्होंने बहुविषयक, लचीले और विद्यार्थी-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण के विकास में योगदान दिया है।
12 शोधार्थियों और 100 से अधिक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन
प्रबंध शास्त्र संस्थान में प्रो. मोहन विपणन प्रबंधन, उपभोक्ता व्यवहार, सेवा विपणन, शोध पद्धति और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन जैसे विषयों का अध्यापन एवं पाठ्यक्रम विकास कर चुके हैं। उनका शिक्षण विद्यार्थियों में व्यावहारिक समझ, आलोचनात्मक चिंतन और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित रहा है। वह अब तक 12 पीएचडी शोधार्थियों और 100 से अधिक स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर चुके हैं।
शोध और उद्योग से भी मजबूत जुड़ाव
प्रो. मोहन की शोध रुचियां आपूर्ति एवं मांग शृंखला प्रबंधन तथा विपणन प्रबंधन के आपसी संबंधों पर केंद्रित हैं। उन्होंने 50 से अधिक शोध-पत्र समीक्षित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं, जिनमें स्कोपस क्यू-1 पत्रिकाएं भी शामिल हैं। वह छह पुस्तकों के लेखक या संपादक हैं और उनकी पुस्तक ‘कंज्यूमर बिहेवियर’ भी प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा उन्होंने आईसीएसएसआर, एआईसीटीई और यूजीसी जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तपोषित पांच प्रमुख शोध परियोजनाएं पूरी की हैं।
प्रो. मोहन ने प्रबंधन शिक्षा को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने के लिए अपोलो हॉस्पिटल्स, गेल, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, वीएससीएल, सीपीआरआई और बीएसएनएल सहित विभिन्न संस्थानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए हैं। वह ‘बीएचयू मैनेजमेंट रिव्यू’ के प्रबंध संपादक के रूप में अकादमिक प्रकाशन से जुड़े हैं और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के समीक्षक भी रहे हैं।
पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रो. मोहन की अकादमिक उपलब्धियों की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले वह एआईसीटीई के ‘करियर अवॉर्ड फॉर यंग टीचर्स’ और अमेरिका की सीएपीएस फेलोशिप प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने बीएचयू से एमबीए, दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से पीएचडी और बाद में बीएचयू से प्रबंधन में डी.लिट. की उपाधि हासिल की। बीएचयू से जुड़ने से पहले उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज में अध्यापन किया।
बोले- सम्मान जिम्मेदारी को और बढ़ाता है
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन पर प्रो. आशुतोष मोहन ने कहा कि उनके लिए शिक्षण केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास और मूल्यों का विकास करना इसका वास्तविक उद्देश्य रहा है। उन्होंने इस सम्मान को अपने शिक्षकों, विद्यार्थियों, सहकर्मियों, बीएचयू, परिवार और उन सभी संस्थाओं की सामूहिक उपलब्धि बताया, जिन्होंने उनकी अकादमिक यात्रा को आकार दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और अधिक नवाचारी, समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में काम करने की उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाता है।
5 सितंबर को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करना प्रो. मोहन की अकादमिक यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। यह सम्मान विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण, डिजिटल अधिगम, शैक्षिक सुधार और उच्च शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देगा।
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