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काशी विद्यापीठ में शिक्षक प्रशिक्षण: विद्यार्थियों की जिंदगी का हिस्सा बनें संवैधानिक मूल्य

By Malay Ojha | Published: 26 August 2026 at 07:59 PM

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे गुरु दक्षता कार्यक्रम के 20वें दिन संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकार शिक्षा पर विशेष चर्चा हुई। पहले सत्र में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विधि संकाय के प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि संविधान के मूल्यों को केवल पढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के व्यवहार और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है।

डॉ. धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी ताकत हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को इन शब्दों का अर्थ बताना नहीं, बल्कि उनके भीतर इन मूल्यों को लेकर समझ और जिम्मेदारी विकसित करना भी होना चाहिए।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों की समझ जरूरी
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने संवैधानिक अधिकारों के साथ कर्तव्यों की जानकारी भी होनी चाहिए। शिक्षा के माध्यम से बच्चों और युवाओं में लोकतांत्रिक सोच, जिम्मेदारी और दूसरों के अधिकारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जा सकती है।

दूसरे सत्र में मानवाधिकार शिक्षा पर चर्चा
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुधीर सिंह ने ‘मानवाधिकार शिक्षा’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। विद्यार्थियों में मानवाधिकारों की समझ विकसित होने से वे समाज में समानता और सम्मान के महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

शिक्षकों की भूमिका को बताया अहम
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों के बीच संवैधानिक और मानवाधिकार संबंधी समझ विकसित करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कक्षा में पढ़ाई जाने वाली बातें तभी प्रभावी होंगी, जब उनका असर विद्यार्थियों के व्यवहार और सोच में भी दिखाई दे।

केंद्र निदेशक के निर्देशन में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन केंद्र निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह के निर्देशन में किया गया। संचालन डॉ. विनय सिंह और दीपशिखा श्रीवास्तव ने किया। आशीष लेपचा ने स्वागत किया, जबकि योगेश न्यौपाने ने धन्यवाद ज्ञापित किया। तकनीकी सहयोग अनुपम मिश्रा, त्रियंबिका सिंह और सरस्वती ने दिया।

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काशी विद्यापीठ में शिक्षक प्रशिक्षण: विद्यार्थियों की जिंदगी का हिस्सा बनें संवैधानिक मूल्य

By Malay Ojha | Published: 26 August 2026 at 07:59 PM

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे गुरु दक्षता कार्यक्रम के 20वें दिन संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकार शिक्षा पर विशेष चर्चा हुई। पहले सत्र में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विधि संकाय के प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि संविधान के मूल्यों को केवल पढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के व्यवहार और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है।

डॉ. धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी ताकत हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को इन शब्दों का अर्थ बताना नहीं, बल्कि उनके भीतर इन मूल्यों को लेकर समझ और जिम्मेदारी विकसित करना भी होना चाहिए।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों की समझ जरूरी
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने संवैधानिक अधिकारों के साथ कर्तव्यों की जानकारी भी होनी चाहिए। शिक्षा के माध्यम से बच्चों और युवाओं में लोकतांत्रिक सोच, जिम्मेदारी और दूसरों के अधिकारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जा सकती है।

दूसरे सत्र में मानवाधिकार शिक्षा पर चर्चा
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुधीर सिंह ने ‘मानवाधिकार शिक्षा’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। विद्यार्थियों में मानवाधिकारों की समझ विकसित होने से वे समाज में समानता और सम्मान के महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

शिक्षकों की भूमिका को बताया अहम
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों के बीच संवैधानिक और मानवाधिकार संबंधी समझ विकसित करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कक्षा में पढ़ाई जाने वाली बातें तभी प्रभावी होंगी, जब उनका असर विद्यार्थियों के व्यवहार और सोच में भी दिखाई दे।

केंद्र निदेशक के निर्देशन में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन केंद्र निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह के निर्देशन में किया गया। संचालन डॉ. विनय सिंह और दीपशिखा श्रीवास्तव ने किया। आशीष लेपचा ने स्वागत किया, जबकि योगेश न्यौपाने ने धन्यवाद ज्ञापित किया। तकनीकी सहयोग अनुपम मिश्रा, त्रियंबिका सिंह और सरस्वती ने दिया।

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