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जादवपुर यूनिवर्सिटी में ‘आजादी’ के नारों पर भड़के शुभेंदु अधिकारी, बोले- अब या तो वे रहेंगे या हम

By Malay Ojha | Published: 29 August 2026 at 09:11 AM

जादवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को ‘आजादी’ के नारों और कैंपस की दीवारों पर लिखे ‘लाल सलाम किशनजी’ को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रवाद के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अब हिसाब-किताब का समय आ गया है और “या तो वे रहेंगे या हम रहेंगे।”

रक्षाबंधन के मौके पर जादवपुर यूनिवर्सिटी के बाहर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारी ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह जेएनयू और उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवाद को लेकर अभियान चलाए गए, उसी तरह जादवपुर में भी यह काम आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जादवपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को ‘थ्रेट कल्चर’ से बाहर निकालने की जरूरत है।

‘आपको किस आजादी की जरूरत है?’
अधिकारी ने कैंपस और कोलकाता की सड़कों पर लगाए जा रहे ‘आजादी’ के नारों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर ऐसी आजादी किसलिए मांगी जा रही है। उन्होंने नशीले पदार्थों और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का जिक्र करते हुए इन नारों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत 1947 में आजाद हो चुका है और नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद करना चाहिए।

‘लाल सलाम किशनजी’ पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे ‘लाल सलाम किशनजी’ पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि नई पीढ़ी को ऐसे लोगों के बारे में क्या संदेश दिया जा रहा है। किशनजी के नाम से चर्चित कोटेश्वर राव वरिष्ठ माओवादी नेता था, जिसकी नवंबर 2011 में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मौत हुई थी। अधिकारी ने कहा कि किशनजी लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के खिलाफ था।

‘कश्मीर मांगे आजादी’ के नारों पर भी निशाना
अधिकारी ने जादवपुर और कोलकाता में कश्मीर से जुड़े ‘आजादी’ के नारों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देश ने कश्मीर को लेकर कई युद्ध और संघर्ष देखे हैं, ऐसे में कोलकाता की सड़कों पर इस तरह के नारे लगना उन्हें परेशान करता है। उन्होंने फिलिस्तीन से जुड़े नारों का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मुद्दों पर प्रदर्शन करने वालों को पहले देश के हित और सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

‘अंदर से देश को कमजोर करने वालों को साफ करेंगे’
रक्षाबंधन कार्यक्रम में अधिकारी ने कहा कि बाहरी दुश्मनों से निपटने का काम देश की सेनाएं कर रही हैं, लेकिन देश के भीतर से राष्ट्रवाद, देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ काम करने वालों पर भी सख्ती जरूरी है। उन्होंने ऐसे तत्वों को “घर के कचरे की तरह साफ” करने की बात कही।

जादवपुर में हालिया विवाद के बाद बढ़ा तनाव
जादवपुर यूनिवर्सिटी में हाल के दिनों में एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच विवाद और विरोध-प्रदर्शन को लेकर माहौल तनावपूर्ण रहा है। अधिकारी ने इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि छात्रों को कई बार उनकी इच्छा के खिलाफ राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार कैंपस में ऐसी गतिविधियों पर नजर रख रही है।

10 हजार लोगों ने गाया ‘वंदे मातरम’
अधिकारी के कार्यक्रम में जादवपुर के पास करीब 10 हजार लोगों ने ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया। उन्होंने इसे राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना मजबूत करने की कोशिश बताया। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के स्कूलों और कॉलेजों में एनसीसी शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही।

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जादवपुर यूनिवर्सिटी में ‘आजादी’ के नारों पर भड़के शुभेंदु अधिकारी, बोले- अब या तो वे रहेंगे या हम

By Malay Ojha | Published: 29 August 2026 at 09:11 AM

जादवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को ‘आजादी’ के नारों और कैंपस की दीवारों पर लिखे ‘लाल सलाम किशनजी’ को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रवाद के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अब हिसाब-किताब का समय आ गया है और “या तो वे रहेंगे या हम रहेंगे।”

रक्षाबंधन के मौके पर जादवपुर यूनिवर्सिटी के बाहर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारी ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह जेएनयू और उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवाद को लेकर अभियान चलाए गए, उसी तरह जादवपुर में भी यह काम आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जादवपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को ‘थ्रेट कल्चर’ से बाहर निकालने की जरूरत है।

‘आपको किस आजादी की जरूरत है?’
अधिकारी ने कैंपस और कोलकाता की सड़कों पर लगाए जा रहे ‘आजादी’ के नारों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर ऐसी आजादी किसलिए मांगी जा रही है। उन्होंने नशीले पदार्थों और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का जिक्र करते हुए इन नारों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत 1947 में आजाद हो चुका है और नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद करना चाहिए।

‘लाल सलाम किशनजी’ पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे ‘लाल सलाम किशनजी’ पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि नई पीढ़ी को ऐसे लोगों के बारे में क्या संदेश दिया जा रहा है। किशनजी के नाम से चर्चित कोटेश्वर राव वरिष्ठ माओवादी नेता था, जिसकी नवंबर 2011 में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मौत हुई थी। अधिकारी ने कहा कि किशनजी लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के खिलाफ था।

‘कश्मीर मांगे आजादी’ के नारों पर भी निशाना
अधिकारी ने जादवपुर और कोलकाता में कश्मीर से जुड़े ‘आजादी’ के नारों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देश ने कश्मीर को लेकर कई युद्ध और संघर्ष देखे हैं, ऐसे में कोलकाता की सड़कों पर इस तरह के नारे लगना उन्हें परेशान करता है। उन्होंने फिलिस्तीन से जुड़े नारों का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मुद्दों पर प्रदर्शन करने वालों को पहले देश के हित और सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

‘अंदर से देश को कमजोर करने वालों को साफ करेंगे’
रक्षाबंधन कार्यक्रम में अधिकारी ने कहा कि बाहरी दुश्मनों से निपटने का काम देश की सेनाएं कर रही हैं, लेकिन देश के भीतर से राष्ट्रवाद, देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ काम करने वालों पर भी सख्ती जरूरी है। उन्होंने ऐसे तत्वों को “घर के कचरे की तरह साफ” करने की बात कही।

जादवपुर में हालिया विवाद के बाद बढ़ा तनाव
जादवपुर यूनिवर्सिटी में हाल के दिनों में एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच विवाद और विरोध-प्रदर्शन को लेकर माहौल तनावपूर्ण रहा है। अधिकारी ने इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि छात्रों को कई बार उनकी इच्छा के खिलाफ राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार कैंपस में ऐसी गतिविधियों पर नजर रख रही है।

10 हजार लोगों ने गाया ‘वंदे मातरम’
अधिकारी के कार्यक्रम में जादवपुर के पास करीब 10 हजार लोगों ने ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया। उन्होंने इसे राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना मजबूत करने की कोशिश बताया। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के स्कूलों और कॉलेजों में एनसीसी शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही।

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