By Malay Ojha | Published: 30 August 2026 at 02:57 PM
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने सेना की कमान में बड़ा बदलाव किया है। किम जोंग उन की अध्यक्षता में हुई बैठक में रक्षा मंत्री नो क्वांग-चोल को पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कोरियाई पीपुल्स आर्मी के जनरल पॉलिटिकल ब्यूरो के डायरेक्टर किम सोंग-गी को नया रक्षा मंत्री बनाया गया है। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी KCNA ने इसे सेना के ढांचे में बड़े बदलाव का हिस्सा बताया है।
नो क्वांग-चोल को सिर्फ रक्षा मंत्री के पद से ही नहीं हटाया गया, बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी में उनकी रैंक भी कम की गई है। अब उन्हें आर्मामेंट इंडस्ट्री डिपार्टमेंट का फर्स्ट डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया है। इस बदलाव को उत्तर कोरिया की सेना और रक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है।
पाक जोंग-चोन को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
सेना में बदलाव के दौरान वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा सलाहकार पाक जोंग-चोन को सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का वाइस चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें सत्तारूढ़ पार्टी के पॉलिटिकल ब्यूरो में भी जगह दी गई है। KCNA के मुताबिक कई अन्य अधिकारियों के पद बदले गए हैं और कुछ को प्रमोशन भी मिला है।
हथियारों पर भी किम जोंग उन का फोकस
सेना में फेरबदल के साथ किम जोंग उन ने देश के वैज्ञानिकों, रिसर्चर्स और अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने रक्षा तकनीक में हुई प्रगति की तारीफ की और कई लोगों को देश के बड़े राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा। KCNA के मुताबिक इन लोगों ने नए लड़ाकू हथियार सिस्टम तैयार करने से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी समस्याओं को हल करने में योगदान दिया है। हालांकि, उत्तर कोरिया ने इन हथियारों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
रॉकेट और आर्टिलरी सिस्टम का हुआ था परीक्षण
जून के आखिर में किम जोंग उन ने नई लंबी दूरी की मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर और आर्टिलरी सिस्टम के परीक्षण की निगरानी की थी। ऐसे में सेना के शीर्ष पदों पर हुए ताजा बदलाव के बीच उत्तर कोरिया का रक्षा तकनीक पर जोर भी अहम माना जा रहा है।
अमेरिका-दक्षिण कोरिया की एक्सरसाइज के बाद बदलाव
उत्तर कोरिया की सेना में यह फेरबदल अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सालाना संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज खत्म होने के तुरंत बाद हुआ है। प्योंगयांग लंबे समय से इन अभ्यासों का विरोध करता रहा है और इन्हें अपने खिलाफ हमले की तैयारी बताता है। इस बार अभ्यास को लेकर इसलिए भी चर्चा रही क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका स्तर कम करने की बात कही थी।
ट्रंप ने भी सैन्य अभ्यास पर उठाए सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास को उत्तर कोरिया के लिए उकसावे वाला कदम बताया था। उन्होंने दक्षिण कोरिया की भी आलोचना की थी। ट्रंप और किम जोंग उन की पहले दो मुलाकातें हो चुकी हैं और ट्रंप ने इस साल फिर मुलाकात की इच्छा जताई है।
प्योंगयांग का रुख अब तक नहीं बदला
हालांकि, उत्तर कोरिया की ओर से अमेरिका के साथ रिश्तों में सुधार के संकेत नहीं मिले हैं। प्योंगयांग ने मिसाइल परीक्षण जारी रखे हैं और कम किए गए सैन्य अभ्यास की भी आलोचना की है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया को हथियार बेचने की अमेरिकी मंजूरी और उत्तर कोरिया में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अमेरिकी कार्यक्रमों की फंडिंग पर भी उसने नाराजगी जताई है।
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