By aryavartalive | Published: 01 September 2026 at 10:13 AM
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा की व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर दी है। इसके साथ ही 1976 और 1981 से लागू पुराने सरकारी आदेशों को भी रद्द कर दिया गया है। अब जिन कर्मचारियों के लिए हिंदी परीक्षा पास करना जरूरी था, उन्हें वेतन बढ़ोतरी या प्रमोशन के लिए यह परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। सरकार का यह फैसला 7 मई 2026 से प्रभावी माना गया है।
पहले जिन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने 10वीं तक हिंदी विषय के तौर पर नहीं पढ़ी थी, उनके लिए नौकरी के दौरान हिंदी परीक्षा पास करना जरूरी था। परीक्षा पास नहीं करने पर कुछ मामलों में वेतन वृद्धि और प्रमोशन प्रभावित हो सकता था। अब यह शर्त पूरी तरह खत्म हो गई है।
जून में फिर शुरू हुआ था विवाद
इस फैसले से पहले भाषा संचालनालय ने 28 जून 2026 को सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा कराने का कार्यक्रम जारी किया था। परीक्षा की घोषणा के बाद महाराष्ट्र में इसका विरोध शुरू हो गया। मामला बढ़ने पर 7 मई को सरकार ने पहले परीक्षा स्थगित की और बाद में इसकी पूरी व्यवस्था खत्म करने का फैसला लिया।
MNS ने किया था सबसे ज्यादा विरोध
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने हिंदी परीक्षा के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला था। पार्टी ने इसे महाराष्ट्र में हिंदी थोपने की कोशिश बताया और परीक्षा होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। शिवसेना (UBT) ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए मराठी को प्राथमिकता देने की मांग की थी।
मराठी संगठनों ने भी उठाए सवाल
मराठी भाषा से जुड़े संगठनों और भाषाविदों ने भी हिंदी परीक्षा की जरूरत पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि महाराष्ट्र में सरकारी कामकाज मुख्य रूप से मराठी में होता है, ऐसे में सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी परीक्षा को अनिवार्य बनाए रखने का औचित्य नहीं है।
क्यों खत्म की गई हिंदी परीक्षा?
सरकार के फैसले के पीछे एक प्रमुख तर्क यह है कि महाराष्ट्र में सरकारी कामकाज की मुख्य भाषा मराठी है। केंद्र और दूसरे राज्यों के साथ होने वाला आधिकारिक पत्राचार भी बड़े पैमाने पर अंग्रेजी में होता है। ऐसे में राज्य सरकार ने माना कि कर्मचारियों के लिए अलग से हिंदी परीक्षा की अनिवार्यता मौजूदा व्यवस्था में जरूरी नहीं रह गई है।
1976 से चली आ रही थी व्यवस्था
महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी परीक्षा की अनिवार्यता से जुड़ी व्यवस्था 1976 के नियमों के तहत चल रही थी। मई 2026 में सरकार ने परीक्षा को पहले स्थगित करते हुए यह भी कहा था कि करीब पांच दशक पुराने नियम की आज के समय में जरूरत है या नहीं, इसकी समीक्षा की जाएगी। अब सरकार ने पुराने आदेशों को ही रद्द कर दिया है।
भाषा विवाद को फिर मिली हवा
महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी को लेकर राजनीतिक विवाद नया नहीं है। हिंदी परीक्षा का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया था। अब परीक्षा की व्यवस्था खत्म होने के बाद सरकार के फैसले को मराठी भाषा से जुड़े संगठनों के विरोध की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है।
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