By Malay Ojha | Published: 01 September 2026 at 11:48 AM
बिहार में आरक्षण को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच इमामगंज की विधायक दीपा मांझी ने एक बार फिर ‘कोटे के अंदर कोटा’ का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि गरीब और वंचित वर्गों की बात करने वालों को मुद्दे से भटकने के बजाय यह बताना चाहिए कि आरक्षण का लाभ आखिर किन लोगों तक पहुंचा और जो आज भी पीछे हैं, उन्हें उनका हिस्सा कब मिलेगा।
दीपा मांझी ने कहा कि गरीबों और वंचितों के लिए आरक्षण सिर्फ राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि उनके अवसर और प्रतिनिधित्व से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि उपदेश देने के बजाय आंकड़ों के आधार पर यह जवाब मिलना चाहिए कि दशकों से आरक्षण की व्यवस्था लागू होने के बावजूद समाज के कई वर्ग शिक्षा, नौकरी और प्रतिनिधित्व में पीछे क्यों हैं।
‘कोटे के अंदर कोटा’ की मांग
विधायक ने आरक्षण व्यवस्था में उपवर्गीकरण की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि अगर आरक्षण का फायदा कुछ वर्गों को लगातार ज्यादा मिल रहा है और सबसे पिछड़े तबके अब भी पीछे हैं, तो उनके लिए अलग हिस्सेदारी तय करने पर विचार होना चाहिए। उन्होंने इसे किसी का हक छीनने के बजाय वंचितों तक अवसर पहुंचाने का तरीका बताया।
‘जिसकी जितनी भागीदारी, उतनी हिस्सेदारी’
दीपा मांझी ने अपने बयान में ‘जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ की बात दोहराई। उनका कहना है कि आरक्षण का मकसद सिर्फ व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि उन लोगों तक अवसर पहुंचाना भी होना चाहिए जो अब तक इसका पर्याप्त लाभ नहीं उठा पाए हैं।
विरोधियों पर भी साधा निशाना
अपने बयान में दीपा मांझी ने विरोधियों पर व्यक्तिगत और तीखे आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जो लोग गरीबों और सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने अपने विरोधियों से कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर ‘ज्ञान’ देने के बजाय यह बताएं कि गरीब और वंचित लोगों का हिस्सा कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
‘अब आंकड़ों पर जवाब चाहिए’
दीपा मांझी ने कहा कि आरक्षण को लेकर बहस सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अब यह चर्चा आंकड़ों के आधार पर होनी चाहिए कि शिक्षा, सरकारी नौकरी और दूसरे क्षेत्रों में अलग-अलग वंचित वर्गों की हिस्सेदारी कितनी है।
आरक्षण खत्म करने की बात नहीं
दीपा मांझी ने साफ किया कि उनकी मांग आरक्षण खत्म करने की नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि आरक्षण का लाभ समाज के उन लोगों तक भी पहुंचे, जो अभी सबसे पीछे हैं। इसी आधार पर उन्होंने अपने कोटे में कोटा देने की मांग रखी है।
बिहार में पहले से चल रही बहस
बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा पहले से ही चर्चा के केंद्र में है। आरक्षण की समीक्षा और कोटे के भीतर कोटा जैसे सवालों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी चल रही है। ऐसे में दीपा मांझी का यह बयान इस बहस को और तेज कर सकता है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

