By Malay Ojha | Published: 01 September 2026 at 08:13 AM
बिहार में आरक्षण को लेकर NDA के भीतर सियासी टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और कोटे के भीतर कोटा की मांग कर रहे हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान इसका विरोध कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि अब एक-दूसरे से इस्तीफा मांगने तक की नौबत आ गई है।
जीतन राम मांझी का तर्क है कि आरक्षण का फायदा उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए जो अब तक इससे सबसे ज्यादा वंचित रहे हैं। उनका मानना है कि आरक्षण के मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा कर यह देखना जरूरी है कि इसका लाभ अलग-अलग वर्गों को कितना मिला है। इसी आधार पर वह आरक्षण के भीतर उपवर्गीकरण की पैरवी कर रहे हैं।
चिराग ने समीक्षा पर जताया विरोध
चिराग पासवान आरक्षण की समीक्षा के विचार से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि आरक्षण सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक असमानता के कारण मिला अधिकार है, इसे आर्थिक आधार से जोड़ना सही नहीं होगा। उन्होंने क्रीमी लेयर की बात पर भी सवाल उठाए हैं और आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश का विरोध किया है।
बात इस्तीफे तक पहुंची
आरक्षण को लेकर दोनों नेताओं की बयानबाजी अब व्यक्तिगत राजनीतिक चुनौती में बदल गई है। चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन के इस्तीफे की मांग की। इसके जवाब में मांझी ने भी चिराग पासवान से पहले इस्तीफा देने को कहा। मांझी खेमे की ओर से तर्क दिया गया कि अगर चिराग अपनी बात पर कायम हैं तो उन्हें भी पद छोड़कर चुनाव लड़ना चाहिए।
JDU ने भी खोला मोर्चा
इस विवाद में अब NDA के एक और सहयोगी दल JDU की भी एंट्री हो गई है। JDU नेता श्याम रजक ने आरक्षण के मौजूदा स्वरूप में किसी तरह की छेड़छाड़ या समीक्षा का विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आरक्षण व्यवस्था के साथ बदलाव किया गया तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं और गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा होने की आशंका है।
तेजस्वी ने दोनों नेताओं को घेरा
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के विवाद पर हमला बोला है। उन्होंने दोनों नेताओं को मंत्री पद से इस्तीफा देकर किसी सामान्य यानी अनारक्षित सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। तेजस्वी ने आरक्षण खत्म करने की किसी भी कोशिश को लेकर भी सख्त रुख दिखाया है।
कोटे के भीतर कोटा बना विवाद की जड़
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ आरक्षण के भीतर उपवर्गीकरण की मांग है। मांझी का कहना है कि अगर आरक्षण का लाभ कुछ जातियों तक ही ज्यादा पहुंच रहा है और कुछ समुदाय पीछे रह गए हैं तो वंचित समूहों के लिए अलग हिस्सेदारी पर विचार होना चाहिए। वहीं चिराग इसे आरक्षण की मूल व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में कदम मान रहे हैं। इसी मुद्दे ने बिहार में NDA के भीतर सियासी खींचतान बढ़ा दी है।
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