By Malay Ojha | Published: 01 September 2026 at 02:21 PM
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP Growth दर्ज की है। 31 अगस्त को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून के बीच अर्थव्यवस्था की यह रफ्तार पिछले साल की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से बेहतर रही। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस प्रदर्शन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत बताया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में वास्तविक GVA भी 8.2 प्रतिशत बढ़ा है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत प्रदर्शन
संजय सरावगी ने कहा कि जब दुनिया युद्ध, ऊर्जा संकट, आपूर्ति व्यवस्था में रुकावट और आर्थिक अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से गुजर रही है, तब भारत का 7.8 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ना बड़ी बात है। उनके मुताबिक यह आंकड़ा बताता है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की घरेलू मांग और विकास की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
RBI के अनुमान से भी आगे निकली अर्थव्यवस्था
भारत की पहली तिमाही की GDP Growth भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी ज्यादा रही। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में संशोधित विकास दर 6.9 प्रतिशत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस प्रदर्शन को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा है कि तेल की कीमतों के दबाव, सप्लाई चेन की दिक्कतों और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद देश ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है।
सेवा और विनिर्माण क्षेत्र ने संभाली रफ्तार
सरावगी ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के पीछे कई क्षेत्रों का योगदान है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र 10 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा। द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि 8.6 प्रतिशत रही। वित्तीय, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं ने भी सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन को मजबूत किया।
निवेश और घरेलू मांग पर भी जोर
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था केवल एक क्षेत्र के भरोसे आगे नहीं बढ़ रही है। निवेश, घरेलू खपत, विनिर्माण और सेवाओं में मजबूती का असर कुल विकास पर दिखाई दे रहा है। पहली तिमाही में सकल स्थायी पूंजी निर्माण में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निजी अंतिम उपभोग व्यय 7.1 प्रतिशत बढ़ा। इससे निवेश और घरेलू मांग दोनों में मजबूती के संकेत मिलते हैं।
कृषि क्षेत्र की रफ्तार भी बनी रही
सरावगी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण बताया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में पहली तिमाही के दौरान 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि कृषि, छोटे उद्योग, सेवाओं और ग्रामीण बाजारों की मजबूती देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से निपटने में मदद करती है।
बिहार को भी विकास का फायदा मिलने का दावा
बिहार भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश की तेज आर्थिक वृद्धि का असर बिहार पर भी पड़ेगा। उनके मुताबिक निवेश बढ़ने से राज्य में उद्योग, सड़क, रेल, ऊर्जा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के युवा अब केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्टार्टअप और छोटे कारोबार के जरिए रोजगार देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
विकास की रफ्तार में बिहार की हिस्सेदारी
सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार को देश की विकास गति से जोड़ने की कोशिश जारी है। उनके मुताबिक बेहतर बुनियादी ढांचा, उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल और कौशल विकास पर जोर मिलने से राज्य के युवाओं, किसानों और कारोबारियों के लिए नए अवसर बन सकते हैं।
बोले- 7.8 प्रतिशत सिर्फ आंकड़ा नहीं
संजय सरावगी ने कहा कि 7.8 प्रतिशत की GDP Growth को सिर्फ एक आर्थिक आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह मुश्किल वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की आर्थिक क्षमता और भरोसे को दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक आर्थिक बदलावों का केवल असर झेलने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया की विकास गति में अहम भूमिका निभाने वाली अर्थव्यवस्था बन रहा है।
‘भारत ने विकास की रफ्तार बनाए रखी’
सरावगी ने कहा, “दुनिया में संकट और अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी विकास गति बनाए रखी। 7.8 प्रतिशत की वृद्धि विकसित भारत के संकल्प की दिशा में मजबूत कदम है।” उन्होंने भरोसा जताया कि देश की आर्थिक मजबूती का लाभ आने वाले समय में बिहार को भी मिलेगा और राज्य में रोजगार, निवेश तथा कारोबार के नए रास्ते खुलेंगे।
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