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कमलापति त्रिपाठी की जयंती पर संस्कृत को नई दिशा देने का संकल्प, कुलपति बोले- ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना होगा

By aryavartalive | Published: 15 September 2026 at 05:35 PM

वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी की 121वीं जयंती ऋषि पंचमी के अवसर पर मनाई गई। योग साधना केन्द्र में हुए समारोह में उनके शिक्षा, संस्कृत, संस्कृति और लोकसेवा से जुड़े योगदान को याद किया गया। साथ ही उनकी सोच को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी ने संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत आधार देने के लिए संस्थान निर्माण पर जोर दिया। आज जरूरत है कि संस्कृत विश्वविद्यालय परंपरा को बचाने के साथ उसे आधुनिक तकनीक, शोध और नए ज्ञान से भी जोड़े।

पं. कमलापति की विरासत को राष्ट्रसेवा से जोड़ा
मुख्य अतिथि डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने पं. कमलापति त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन शिक्षा, संस्कृति, समाज और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वह केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि लेखक, पत्रकार और भारतीय संस्कृति की समझ रखने वाले दूरदर्शी व्यक्ति भी थे।

काशी और पूर्वांचल के विकास में भी योगदान
डॉ. सिंह ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी ने शिक्षा और संस्कृति के साथ काशी और पूर्वांचल के विकास पर भी काम किया। रेलवे, सड़क और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों में उनकी भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विकास सोच में लोककल्याण को खास जगह मिली थी।

ऋषि पंचमी पर याद किया गया ऋषितुल्य व्यक्तित्व
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि ऋषि पंचमी के दिन पं. कमलापति त्रिपाठी को याद करना विशेष महत्व रखता है। उनके व्यक्तित्व में साधना, त्याग, चिंतन और लोकमंगल की भावना दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र केवल सत्ता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा था।

संस्कृत को परंपरा से आगे ले जाने की जरूरत
कुलपति ने कहा कि संस्कृत को केवल पुराने ग्रंथों और परंपराओं तक सीमित रखने के बजाय भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक तकनीक और वैश्विक ज्ञान संवाद से जोड़ना होगा। यही प्रयास आने वाली पीढ़ी को संस्कृत की उपयोगिता और व्यापक भूमिका से परिचित करा सकता है।

अतिथियों का सम्मान, वैदिक मंगलाचरण से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंगलाचरण और पौराणिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर पं. कमलापति त्रिपाठी और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। मंचस्थ अतिथियों के अलावा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्यों प्रो. जितेन्द्र कुमार और प्रो. सुधाकर मिश्र का भी सम्मान किया गया।

प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पौधरोपण
जयंती समारोह के बाद प्रकाशन संस्थान परिसर में पं. कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उनकी स्मृति को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए अतिथियों ने पांच पौधे लगाए। इस दौरान हरित भविष्य और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।

राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मधुसूदन मिश्र ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. दिनेश कुमार गर्ग ने किया। समारोह में कुलसचिव राकेश कुमार समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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कमलापति त्रिपाठी की जयंती पर संस्कृत को नई दिशा देने का संकल्प, कुलपति बोले- ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना होगा

By aryavartalive | Published: 15 September 2026 at 05:35 PM

वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी की 121वीं जयंती ऋषि पंचमी के अवसर पर मनाई गई। योग साधना केन्द्र में हुए समारोह में उनके शिक्षा, संस्कृत, संस्कृति और लोकसेवा से जुड़े योगदान को याद किया गया। साथ ही उनकी सोच को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी ने संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत आधार देने के लिए संस्थान निर्माण पर जोर दिया। आज जरूरत है कि संस्कृत विश्वविद्यालय परंपरा को बचाने के साथ उसे आधुनिक तकनीक, शोध और नए ज्ञान से भी जोड़े।

पं. कमलापति की विरासत को राष्ट्रसेवा से जोड़ा
मुख्य अतिथि डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने पं. कमलापति त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन शिक्षा, संस्कृति, समाज और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वह केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि लेखक, पत्रकार और भारतीय संस्कृति की समझ रखने वाले दूरदर्शी व्यक्ति भी थे।

काशी और पूर्वांचल के विकास में भी योगदान
डॉ. सिंह ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी ने शिक्षा और संस्कृति के साथ काशी और पूर्वांचल के विकास पर भी काम किया। रेलवे, सड़क और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों में उनकी भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विकास सोच में लोककल्याण को खास जगह मिली थी।

ऋषि पंचमी पर याद किया गया ऋषितुल्य व्यक्तित्व
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि ऋषि पंचमी के दिन पं. कमलापति त्रिपाठी को याद करना विशेष महत्व रखता है। उनके व्यक्तित्व में साधना, त्याग, चिंतन और लोकमंगल की भावना दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र केवल सत्ता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा था।

संस्कृत को परंपरा से आगे ले जाने की जरूरत
कुलपति ने कहा कि संस्कृत को केवल पुराने ग्रंथों और परंपराओं तक सीमित रखने के बजाय भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक तकनीक और वैश्विक ज्ञान संवाद से जोड़ना होगा। यही प्रयास आने वाली पीढ़ी को संस्कृत की उपयोगिता और व्यापक भूमिका से परिचित करा सकता है।

अतिथियों का सम्मान, वैदिक मंगलाचरण से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंगलाचरण और पौराणिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर पं. कमलापति त्रिपाठी और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। मंचस्थ अतिथियों के अलावा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्यों प्रो. जितेन्द्र कुमार और प्रो. सुधाकर मिश्र का भी सम्मान किया गया।

प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पौधरोपण
जयंती समारोह के बाद प्रकाशन संस्थान परिसर में पं. कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उनकी स्मृति को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए अतिथियों ने पांच पौधे लगाए। इस दौरान हरित भविष्य और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।

राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मधुसूदन मिश्र ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. दिनेश कुमार गर्ग ने किया। समारोह में कुलसचिव राकेश कुमार समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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