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14 साल तक के बच्चों की शिक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को नोटिस; 4 हफ्ते में मांगा जवाब

By Malay Ojha | Published: 15 September 2026 at 06:09 PM

14 साल से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों के नियमन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी.के. अनिल कुमार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह कार्रवाई पहले दिए गए आदेश पर कथित तौर पर अमल नहीं होने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर हुई है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यह आदेश अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। उपाध्याय का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देश के बावजूद उनकी ओर से दिए गए प्रतिवेदन पर संबंधित स्तर पर जरूरी कार्रवाई नहीं की गई।

11 मई को केंद्र को दिया गया था निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को मूल याचिका का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार को उपाध्याय के प्रतिवेदन पर विचार कर फैसला लेने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें कार्रवाई या फैसले की जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने अवमानना याचिका के जरिए दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सभी संस्थानों के रजिस्ट्रेशन की मांग
याचिका में मांग की गई है कि 14 साल तक के बच्चों को सामान्य या धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों का पंजीकरण और मान्यता अनिवार्य की जाए। इसके साथ ही ऐसे संस्थानों की नियमित निगरानी और निरीक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

बच्चों की सुरक्षा को बताया गया अहम मुद्दा
याचिकाकर्ता ने अपनी मांग को संविधान के अनुच्छेद 21ए, 39(एफ), 45 और 51-ए(के) की भावना से जोड़ते हुए कहा है कि कम उम्र के बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर राज्य की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। याचिका में यह भी कहा गया है कि बच्चों की कम उम्र और उनकी संवेदनशीलता को देखते हुए शिक्षा देने वाले संस्थानों पर न्यूनतम निगरानी जरूरी है।

सीमावर्ती इलाकों को लेकर भी दावा
याचिका में उत्तर प्रदेश से सटे कुछ जिलों में बड़ी संख्या में अपंजीकृत और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों के संचालन का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता ने सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे संस्थानों की निगरानी को लेकर चिंता जताई है। **हालांकि ये दावे याचिकाकर्ता के हैं और इन्हें सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

अब शिक्षा सचिव को देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी.के. अनिल कुमार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत यह देखेगी कि पहले दिए गए निर्देश पर क्या कार्रवाई हुई और याचिकाकर्ता की शिकायत पर संबंधित विभाग ने क्या कदम उठाए हैं।

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14 साल तक के बच्चों की शिक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को नोटिस; 4 हफ्ते में मांगा जवाब

By Malay Ojha | Published: 15 September 2026 at 06:09 PM

14 साल से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों के नियमन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी.के. अनिल कुमार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह कार्रवाई पहले दिए गए आदेश पर कथित तौर पर अमल नहीं होने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर हुई है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यह आदेश अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। उपाध्याय का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देश के बावजूद उनकी ओर से दिए गए प्रतिवेदन पर संबंधित स्तर पर जरूरी कार्रवाई नहीं की गई।

11 मई को केंद्र को दिया गया था निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को मूल याचिका का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार को उपाध्याय के प्रतिवेदन पर विचार कर फैसला लेने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें कार्रवाई या फैसले की जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने अवमानना याचिका के जरिए दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सभी संस्थानों के रजिस्ट्रेशन की मांग
याचिका में मांग की गई है कि 14 साल तक के बच्चों को सामान्य या धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों का पंजीकरण और मान्यता अनिवार्य की जाए। इसके साथ ही ऐसे संस्थानों की नियमित निगरानी और निरीक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

बच्चों की सुरक्षा को बताया गया अहम मुद्दा
याचिकाकर्ता ने अपनी मांग को संविधान के अनुच्छेद 21ए, 39(एफ), 45 और 51-ए(के) की भावना से जोड़ते हुए कहा है कि कम उम्र के बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर राज्य की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। याचिका में यह भी कहा गया है कि बच्चों की कम उम्र और उनकी संवेदनशीलता को देखते हुए शिक्षा देने वाले संस्थानों पर न्यूनतम निगरानी जरूरी है।

सीमावर्ती इलाकों को लेकर भी दावा
याचिका में उत्तर प्रदेश से सटे कुछ जिलों में बड़ी संख्या में अपंजीकृत और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों के संचालन का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता ने सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे संस्थानों की निगरानी को लेकर चिंता जताई है। **हालांकि ये दावे याचिकाकर्ता के हैं और इन्हें सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

अब शिक्षा सचिव को देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी.के. अनिल कुमार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत यह देखेगी कि पहले दिए गए निर्देश पर क्या कार्रवाई हुई और याचिकाकर्ता की शिकायत पर संबंधित विभाग ने क्या कदम उठाए हैं।

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