By aryavartalive | Published: 18 September 2026 at 01:00 PM
दीपनगर एवं संगत पर अमरपुर गांव में बुधवार शाम सामाजिक न्याय मोर्चा के तत्वावधान में ईवी रामासामी ‘पेरियार’ की जयंती मनाई गई। शाम सात बजे आयोजित कार्यक्रम में उनके चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने सामाजिक बराबरी, शिक्षा और भेदभाव के खिलाफ पेरियार के विचारों पर चर्चा की।
अतिपिछड़ा/दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष रामदेव चौधरी और आम जनता पार्टी ‘इंडिया’ के राष्ट्रीय सचिव रंजीत कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से कहा कि पेरियार ने सामाजिक भेदभाव और जातिगत असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने लोगों से उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समानता और सामाजिक न्याय के लिए काम करने की बात कही।
1925 में शुरू किया आत्मसम्मान आंदोलन
वक्ताओं ने बताया कि ईवी रामासामी का जन्म 17 सितंबर 1879 को तमिलनाडु के इरोड में हुआ था। शुरुआत में वे कांग्रेस से जुड़े और बाद में सामाजिक भेदभाव के सवालों को लेकर उससे अलग हो गए। वर्ष 1925 में उन्होंने आत्मसम्मान आंदोलन शुरू किया, जिसका जोर सामाजिक बराबरी, आत्मसम्मान और जातिगत भेदभाव के विरोध पर था। तमिलनाडु के इतिहास में उनके आंदोलन का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। ([The Indian Express][2])
महिलाओं के अधिकार और शिक्षा की बात
पेरियार ने जाति व्यवस्था, छुआछूत और अंधविश्वास का विरोध किया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, समान अधिकार और सामाजिक सुधार की भी वकालत की। उनके विचारों में बाल विवाह, दहेज और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव का विरोध प्रमुख रहा। बाद में उन्होंने द्रविड़ कड़गम (Dravidar Kazhagam) की स्थापना की, जिसने सामाजिक सुधार और द्रविड़ पहचान से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाया। ([The Indian Express][2])
बच्चों के बीच बांटी मिठाई
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों और बच्चों के बीच चॉकलेट व मिठाई बांटी गई। आयोजकों और उपस्थित लोगों ने पेरियार के बताए सामाजिक न्याय और समानता के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में लड्डू कुमार, विक्रम रविदास, रंजीत रविदास, अशोक रविदास, सोनू रविदास, गुरु सहाय मांझी, केश्वर मांझी, वेवी देवी, रूबी देवी, मानो देवी, रामचंद्र मांझी, गुरुदेव मांझी, कारू मांझी, संजू देवी, नीलम देवी, गिरिजा देवी, शनिचरा मांझी, रंजीत मांझी, शारदा देवी, पिंकी देवी, राजकुमार समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मौजूद रहे।
पेरियार का निधन 1973 में हुआ
ईवी रामासामी का निधन 24 दिसंबर 1973 को 94 वर्ष की उम्र में हुआ था। उनके सामाजिक और राजनीतिक विचारों का प्रभाव खास तौर पर तमिलनाडु के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में दर्ज है।
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