By Malay Ojha | Published: 25 September 2026 at 08:33 PM
UPI पर लागू होने जा रहे Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर व्यापारिक संगठनों का विरोध तेज हो रहा है। इसी कड़ी में 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन ‘No UPI Day’ मनाने का आह्वान किया गया है। AIJGF बिहार के मुताबिक राज्य के ज्वेलर्स और व्यापारी भी इस अभियान में सांकेतिक तौर पर शामिल होंगे।
AIJGF बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि 2 अक्टूबर को व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों पर लगे UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण और सांकेतिक अभियान बताया।
व्यापारी बोले- UPI से नहीं, शुल्क से विरोध
अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि व्यापारियों का विरोध डिजिटल भुगतान या UPI व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि अतिरिक्त MDR से खासकर कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे और मध्यम कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। यह व्यापारिक संगठनों की ओर से व्यक्त की गई चिंता है।
15 अक्टूबर से लागू होगी नई MDR व्यवस्था
NPCI की अधिसूचित व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की रकम पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के एक लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।
ग्राहकों पर सीधे नहीं डाला जाएगा शुल्क
नई व्यवस्था में MDR व्यापारी की ओर से भुगतान प्रक्रिया से जुड़ा शुल्क है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बैंक और भुगतान सेवा प्रदाताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि यह शुल्क सीधे ग्राहकों से न वसूला जाए। वहीं छोटे पात्र व्यापारियों और व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI ट्रांजैक्शन को इस MDR से बाहर रखा गया है।
बिहार के व्यापारियों से अपील
अशोक कुमार वर्मा ने बिहार के ज्वेलर्स और व्यापारियों से 2 अक्टूबर को अपने प्रतिष्ठानों पर काला कपड़ा लगाकर अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की मांग है कि MDR व्यवस्था पर उनके हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार किया जाए।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर बढ़ी बहस
UPI पर MDR लागू होने की खबर के बाद व्यापारिक संगठनों में इसके असर को लेकर चर्चा शुरू हुई है। सरकार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्ष इसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम की लागत और ढांचे को बनाए रखने से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ कारोबारी संगठनों को अतिरिक्त लागत का असर अपने कारोबार पर पड़ने की चिंता है।
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