By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 at 05:15 PM
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। इस मौके पर विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, इतिहास, लोकपरंपराओं और विकास यात्रा से रूबरू कराने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय परिसर में डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन, भाषण प्रतियोगिता, क्विज, रंगोली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति से जोड़ने की पहल
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने स्वीकृति दी है। आयोजन का मकसद विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने के साथ राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है।
‘विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं’
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता और अलग-अलग परंपराओं में है। राज्यों के स्थापना दिवस मनाने से विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों के इतिहास, संस्कृति, लोकजीवन और उपलब्धियों को करीब से जानने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी सिर्फ शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ना भी जरूरी है। ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रीय चेतना और विविधता के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं।
डॉक्यूमेंट्री में दिखाई जाएगी छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के गठन से लेकर अब तक के सफर पर आधारित एक लघु डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। इसमें राज्य के सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं के साथ विकास की प्रमुख उपलब्धियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके जरिए विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की पहचान और विशेषताओं की जानकारी मिलेगी।
भाषण, क्विज और रंगोली प्रतियोगिता में दिखेगी प्रतिभा
विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई प्रतियोगिताएं भी होंगी। छत्तीसगढ़ की सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विशेषताओं पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी और राज्य की पहचान से जुड़ी रंगोली प्रतियोगिता भी होगी।
पोस्टर और मॉडल से जानेंगे छत्तीसगढ़ की खासियत
विश्वविद्यालय में एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें छात्र-छात्राएं पोस्टर, मॉडल और चार्ट के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं को प्रदर्शित करेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों के जरिए राज्य की विरासत और पहचान से परिचित कराना है।
गीत-संगीत और नृत्य से सजेगा सांस्कृतिक कार्यक्रम
स्थापना दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं नृत्य, गीत, वादन और लघु नाटकों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। शासन के निर्देशों के तहत यदि छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर सहमति बनती है तो वहां की लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को भी समारोह में शामिल किया जाएगा।
कार्यक्रम की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी
समारोह के दौरान आयोजित सभी गतिविधियों का विवरण संकलित कर एक आकर्षक बुकलेट तैयार की जाएगी। कार्यक्रम पूरा होने के बाद इसे शासन के सचिवालय को उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रो. शैलेश मिश्र को सौंपी गई आयोजन की जिम्मेदारी
कार्यक्रम के बेहतर संचालन के लिए छात्र कल्याण संकाय प्रमुख एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष आचार्य प्रो. शैलेश कुमार मिश्र को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं संस्कृत विद्या विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रविशंकर पाण्डेय सह-नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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