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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया ‘अष्ट भैरव’ ग्रंथ का विमोचन, आठ मंदिरों में दर्शन के साथ भक्तों ने किया समर्पित

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 at 05:21 PM

वाराणसी। ज्योतिर्मठ के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित ग्रंथ ‘अष्ट भैरव’ का विमोचन किया। इस ग्रंथ में छत्तीसगढ़ के सलधा में शंकराचार्य जी के प्रवचनों को संकलित किया गया है। विमोचन के बाद आठ भक्तों के दल ने अष्ट भैरव दर्शन यात्रा शुरू की और आठों भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना कर ग्रंथ समर्पित किया।

भगवान शिव के आठ स्वरूपों पर आधारित है ग्रंथ
‘अष्ट भैरव’ ग्रंथ में भगवान शिव के विभिन्न अवतारों और स्वरूपों से जुड़े धार्मिक विषयों को शामिल किया गया है। इसकी सामग्री सलधा (छत्तीसगढ़) में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के दिए गए प्रवचनों पर आधारित है। इन प्रवचनों के माध्यम से भगवान शिव के स्वरूपों और उनसे जुड़े आध्यात्मिक ज्ञान को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

साध्वी पूर्णांबा ने किया प्रवचनों का संकलन और संपादन
इस ग्रंथ के संपादन की जिम्मेदारी शंकराचार्य जी की पूर्णाभिषिक्त शिष्या साध्वी पूर्णांबा ने निभाई है। उन्होंने महाराज श्री के प्रवचनों के महत्वपूर्ण अंशों को संकलित कर पुस्तक को व्यवस्थित रूप दिया है। डॉ. रंजन शर्मा ने उप-संपादक के रूप में योगदान दिया है। वहीं ग्रंथ के आवरण संयोजन में मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय और विवेक भूषण का सहयोग रहा। पुस्तक का प्रकाशन ज्योतिर्मठ प्रकाशन सेवालय ने किया है।

आठ भक्तों ने शुरू की अष्ट भैरव दर्शन यात्रा
ग्रंथ विमोचन के बाद शंकराचार्य जी महाराज के शिष्य अधिवक्ता पंडित रमेश उपाध्याय के नेतृत्व में आठ भक्तों का दल अष्ट भैरव दर्शन यात्रा पर निकला। इस दौरान दल ने आठों भैरव मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। प्रत्येक मंदिर में ‘अष्ट भैरव’ ग्रंथ की एक प्रति श्रद्धापूर्वक समर्पित की गई।

धार्मिक परंपरा और आध्यात्मिक ज्ञान को जोड़ने की पहल
इस आयोजन के जरिए भगवान शिव के अष्ट भैरव स्वरूपों से जुड़े आध्यात्मिक ज्ञान को पुस्तक के माध्यम से श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। ग्रंथ विमोचन और मंदिरों में समर्पण की इस पहल को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संबंध में जानकारी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया ‘अष्ट भैरव’ ग्रंथ का विमोचन, आठ मंदिरों में दर्शन के साथ भक्तों ने किया समर्पित

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 at 05:21 PM

वाराणसी। ज्योतिर्मठ के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित ग्रंथ ‘अष्ट भैरव’ का विमोचन किया। इस ग्रंथ में छत्तीसगढ़ के सलधा में शंकराचार्य जी के प्रवचनों को संकलित किया गया है। विमोचन के बाद आठ भक्तों के दल ने अष्ट भैरव दर्शन यात्रा शुरू की और आठों भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना कर ग्रंथ समर्पित किया।

भगवान शिव के आठ स्वरूपों पर आधारित है ग्रंथ
‘अष्ट भैरव’ ग्रंथ में भगवान शिव के विभिन्न अवतारों और स्वरूपों से जुड़े धार्मिक विषयों को शामिल किया गया है। इसकी सामग्री सलधा (छत्तीसगढ़) में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के दिए गए प्रवचनों पर आधारित है। इन प्रवचनों के माध्यम से भगवान शिव के स्वरूपों और उनसे जुड़े आध्यात्मिक ज्ञान को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

साध्वी पूर्णांबा ने किया प्रवचनों का संकलन और संपादन
इस ग्रंथ के संपादन की जिम्मेदारी शंकराचार्य जी की पूर्णाभिषिक्त शिष्या साध्वी पूर्णांबा ने निभाई है। उन्होंने महाराज श्री के प्रवचनों के महत्वपूर्ण अंशों को संकलित कर पुस्तक को व्यवस्थित रूप दिया है। डॉ. रंजन शर्मा ने उप-संपादक के रूप में योगदान दिया है। वहीं ग्रंथ के आवरण संयोजन में मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय और विवेक भूषण का सहयोग रहा। पुस्तक का प्रकाशन ज्योतिर्मठ प्रकाशन सेवालय ने किया है।

आठ भक्तों ने शुरू की अष्ट भैरव दर्शन यात्रा
ग्रंथ विमोचन के बाद शंकराचार्य जी महाराज के शिष्य अधिवक्ता पंडित रमेश उपाध्याय के नेतृत्व में आठ भक्तों का दल अष्ट भैरव दर्शन यात्रा पर निकला। इस दौरान दल ने आठों भैरव मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। प्रत्येक मंदिर में ‘अष्ट भैरव’ ग्रंथ की एक प्रति श्रद्धापूर्वक समर्पित की गई।

धार्मिक परंपरा और आध्यात्मिक ज्ञान को जोड़ने की पहल
इस आयोजन के जरिए भगवान शिव के अष्ट भैरव स्वरूपों से जुड़े आध्यात्मिक ज्ञान को पुस्तक के माध्यम से श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। ग्रंथ विमोचन और मंदिरों में समर्पण की इस पहल को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संबंध में जानकारी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी।

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