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‘जब तक अनंत सिंह को फांसी नहीं, तब तक ब्रह्मभोज नहीं’, दुलारचंद यादव के परिवार ने लिया संकल्प

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 at 05:57 PM

दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने बड़ा ऐलान किया है। पूर्व विधायक अनंत सिंह की जमानत रद्द होने और एक दिसंबर तक सरेंडर करने के आदेश से परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। दुलारचंद यादव के बड़े पोते नीरज कुमार ने कहा है कि जब तक अनंत सिंह को फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं मिल जाती, तब तक परिवार न तो ब्रह्मभोज करेगा और न ही पुण्यतिथि मनाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परिवार ने लिया संकल्प
नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए न्यायालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परिवार को अदालत पर पूरा भरोसा है। न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। परिवार आगे भी कानूनी तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

सजा मिलने तक नहीं होगा ब्रह्मभोज और पुण्यतिथि
दुलारचंद यादव के पोते ने कहा कि दादा की हत्या के बाद ही परिवार ने फैसला कर लिया था कि जब तक दोषियों को फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं मिलती, तब तक ब्रह्मभोज और पुण्यतिथि नहीं मनाई जाएगी। परिवार आज भी अपने इस संकल्प पर कायम है। नीरज ने कहा कि न्याय मिलने तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पीयूष प्रियदर्शी ने भी फैसले का किया स्वागत
इस मामले में 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा से जन सुराज के प्रत्याशी रहे पीयूष प्रियदर्शी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले से गरीब और कमजोर लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।

पीयूष प्रियदर्शी ने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि हत्याकांड में जो भी लोग दोषी हैं, उन्हें कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए।

चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी दुलारचंद यादव की मौत
दुलारचंद यादव की मौत 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। वह जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इस मामले में अनंत सिंह को एक नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बेऊर जेल भेज दिया गया था।

पांच महीने बाद हाई कोर्ट से मिली थी जमानत
करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद पटना हाई कोर्ट ने 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को जमानत दे दी थी। इसके बाद 23 मार्च को वह जेल से बाहर आ गए थे। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी है और एक दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दुलारचंद यादव हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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‘जब तक अनंत सिंह को फांसी नहीं, तब तक ब्रह्मभोज नहीं’, दुलारचंद यादव के परिवार ने लिया संकल्प

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 at 05:57 PM

दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने बड़ा ऐलान किया है। पूर्व विधायक अनंत सिंह की जमानत रद्द होने और एक दिसंबर तक सरेंडर करने के आदेश से परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। दुलारचंद यादव के बड़े पोते नीरज कुमार ने कहा है कि जब तक अनंत सिंह को फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं मिल जाती, तब तक परिवार न तो ब्रह्मभोज करेगा और न ही पुण्यतिथि मनाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परिवार ने लिया संकल्प
नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए न्यायालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परिवार को अदालत पर पूरा भरोसा है। न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। परिवार आगे भी कानूनी तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

सजा मिलने तक नहीं होगा ब्रह्मभोज और पुण्यतिथि
दुलारचंद यादव के पोते ने कहा कि दादा की हत्या के बाद ही परिवार ने फैसला कर लिया था कि जब तक दोषियों को फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं मिलती, तब तक ब्रह्मभोज और पुण्यतिथि नहीं मनाई जाएगी। परिवार आज भी अपने इस संकल्प पर कायम है। नीरज ने कहा कि न्याय मिलने तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पीयूष प्रियदर्शी ने भी फैसले का किया स्वागत
इस मामले में 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा से जन सुराज के प्रत्याशी रहे पीयूष प्रियदर्शी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले से गरीब और कमजोर लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।

पीयूष प्रियदर्शी ने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि हत्याकांड में जो भी लोग दोषी हैं, उन्हें कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए।

चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी दुलारचंद यादव की मौत
दुलारचंद यादव की मौत 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। वह जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इस मामले में अनंत सिंह को एक नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बेऊर जेल भेज दिया गया था।

पांच महीने बाद हाई कोर्ट से मिली थी जमानत
करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद पटना हाई कोर्ट ने 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को जमानत दे दी थी। इसके बाद 23 मार्च को वह जेल से बाहर आ गए थे। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी है और एक दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दुलारचंद यादव हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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