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सुप्रीम कोर्ट की दोटूक- सार्वजनिक जगह पर अनिश्चितकाल तक नहीं चलेगा धरना, प्रदर्शनकारियों को भी बताना होगा दूसरा रास्ता!

By Malay Ojha | Published: 03 November 2026 at 04:51 PM

सार्वजनिक जगहों पर लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन करने वालों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ किया कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के अधिकार के साथ आम लोगों की सुविधा और उनकी रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना जरूरी है। खासकर उन दिहाड़ी मजदूरों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिनकी कमाई सार्वजनिक रास्तों और बाजारों की गतिविधियों पर निर्भर करती है।

प्रदर्शन के नाम पर किसी एक समूह का कब्जा नहीं चलेगा
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। वहीं, एक व्यापार संगठन ने अदालत को बताया कि लगातार होने वाले प्रदर्शनों के कारण कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है।

किसान, मजदूर और ट्रेड यूनियन कहां करेंगे प्रदर्शन?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि प्रदर्शन के लिए एक या दो स्थान निर्धारित किए जा सकते हैं, लेकिन वहां सभी संगठनों को अपनी बात रखने का बराबर मौका मिलना चाहिए। किसी एक समूह को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह लंबे समय तक किसी जगह पर कब्जा जमाकर दूसरे संगठनों के लिए रास्ता बंद कर दे।

कोर्ट ने इस दौरान सवाल उठाया कि अगर किसान, मजदूर, ट्रेड यूनियन या बेघर लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना चाहें तो उनके लिए जगह कहां होगी? अदालत की टिप्पणी का संकेत साफ था कि सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल किसी एक संगठन या समूह तक सीमित नहीं किया जा सकता।

राहुल गांधी से जुड़े आरोप पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के समय बनी स्थिति का मुद्दा भी उठा। इसके साथ ही राहुल गांधी पर एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने के आरोप का भी जिक्र हुआ। हालांकि, इस मामले में अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की।

23 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े आरोपों और याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख तय की है। याचिकाकर्ता को सभी प्रतिवादियों को याचिका की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि संबंधित पक्ष अपना जवाब दाखिल कर सकें।

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सुप्रीम कोर्ट की दोटूक- सार्वजनिक जगह पर अनिश्चितकाल तक नहीं चलेगा धरना, प्रदर्शनकारियों को भी बताना होगा दूसरा रास्ता!

By Malay Ojha | Published: 03 November 2026 at 04:51 PM

सार्वजनिक जगहों पर लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन करने वालों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ किया कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के अधिकार के साथ आम लोगों की सुविधा और उनकी रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना जरूरी है। खासकर उन दिहाड़ी मजदूरों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिनकी कमाई सार्वजनिक रास्तों और बाजारों की गतिविधियों पर निर्भर करती है।

प्रदर्शन के नाम पर किसी एक समूह का कब्जा नहीं चलेगा
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। वहीं, एक व्यापार संगठन ने अदालत को बताया कि लगातार होने वाले प्रदर्शनों के कारण कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है।

किसान, मजदूर और ट्रेड यूनियन कहां करेंगे प्रदर्शन?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि प्रदर्शन के लिए एक या दो स्थान निर्धारित किए जा सकते हैं, लेकिन वहां सभी संगठनों को अपनी बात रखने का बराबर मौका मिलना चाहिए। किसी एक समूह को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह लंबे समय तक किसी जगह पर कब्जा जमाकर दूसरे संगठनों के लिए रास्ता बंद कर दे।

कोर्ट ने इस दौरान सवाल उठाया कि अगर किसान, मजदूर, ट्रेड यूनियन या बेघर लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना चाहें तो उनके लिए जगह कहां होगी? अदालत की टिप्पणी का संकेत साफ था कि सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल किसी एक संगठन या समूह तक सीमित नहीं किया जा सकता।

राहुल गांधी से जुड़े आरोप पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के समय बनी स्थिति का मुद्दा भी उठा। इसके साथ ही राहुल गांधी पर एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने के आरोप का भी जिक्र हुआ। हालांकि, इस मामले में अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की।

23 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े आरोपों और याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख तय की है। याचिकाकर्ता को सभी प्रतिवादियों को याचिका की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि संबंधित पक्ष अपना जवाब दाखिल कर सकें।

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